
संजय कुमार सिंह
आप जानते हैं कि हरियाणा और जम्मू व कश्मीर में चुनाव हैं। आज के अखबार सरकार का प्रचार करते दिख रहे हैं। ऐसे में आज सिर्फ द हिन्दू की लीड को कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार का प्रचार नहीं है। द टेलीग्राफ की लीड डॉक्टर्स की हड़ताल से संबंधित है और कहने की जरूरत नहीं है कि वह भी भाजपा की ही राजनीति है। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, कोलकाता के डॉक्टर्स ने नई शर्तें रखीं, आंदोलन जारी। उपशीर्षक है, प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्यमंत्री की उपस्थिति में बैठक का समाचार चैनलों पर सीधा प्रसारण हो। प्रदेश के स्वास्थ्यमंत्री ने पूछा कि क्या डॉक्टर्स राजनीति से निर्देशित हो रहे हैं, उनसे काम शुरू करने की अपील की। द टेलीग्राफ की लीड इसी मामले पर है। फ्लैग शीर्षक है, “मुख्यमंत्री पूर्व शर्तों से ‘नाराज’ गुस्सा ‘राजनीति’ को लेकर भी जताया”। सरकार ने कहा है, वार्ता के लिए तैयार है पर कोई पूर्व शर्त नहीं। इसके साथ सिंगल कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, विरोध कर रहे डॉक्टर्स ने कहा, हम हिलेंगे भी नहीं। कहने की जरूरत नहीं है कि इस आंदोलन का अंत चाहे जो हो, जब हो – ममता बनर्जी को घेरने की कोशिश कामयाब हुई नहीं लगती है।
लोकसभा चुनाव में सीटें कम होने के बाद भाजपा के लिए जरूरी है कि वह राज्यों के विधानसभा चुनाव जीते, अगर वहां भाजपा की सरकार थी तो बनी रहे और नहीं थी तो जरूर बनें। पर हालात ऐसे लगते नहीं हैं और इसलिए सरकार, समर्थकों और प्रचारकों की परेशानी जायज है। यह इधर-उधर दिखती रहती है और जैसे-तैसे अखबारों में आ ही जाती है। कल मैंने लिखा था कि राहुल गांधी ने अमेरिका में सरकार के खिलाफ जो बोला वह यहां नहीं छपा और जो छपा वह भाजपा के जवाब या प्रतिक्रिया के साथ छपा। आज वही खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में है। दिलचस्प यह है कि सिखों के मामले में सिख्स फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतंवत सिंह पन्नून ने राहुल गांधी का समर्थन किया है जबकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी की आलोचना की है। कहने की जरूरत नहीं है कि विपक्ष के नेता ने अगर अमेरिका में कुछ कहा तो उसका अपना महत्व है। यहां की सरकार उसका समर्थन करे यह जरूरी नहीं है और विरोध करे तो सामान्य है। फिर भी कल यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर नहीं थी लेकिन केंद्रीय मंत्रियों के विरोध करते यह पहले पन्ने पर आ गई भले राहुल गांधी को गुरपतंवत सिंह पन्नून का समर्थन मुद्दा हो।
बीबीसी की 30 नवंबर 2023 की एक खबर के अनुसार, अमेरिका ने दावा किया है कि भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क में अलगाववादी नेता की हत्या के लिए एक व्यक्ति को भाड़े पर लिया था, जिसके बदले एक लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) दिए गए। अमेरिकी कोर्ट में पेश दस्तावेजों के मुताबिक़, निखिल गुप्ता को भारत सरकार के एक कर्मचारी (अधिकारी कहना चाहिये) से निर्देश मिले थे। कथित साज़िश में किस अलगाववादी नेता की हत्या की जानी थी, उसकी जानकारी अभियोजन पक्ष ने नहीं दी है, लेकिन भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रपटों के मुताबिक़, निशाने पर वकील और सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नून थे। अमेरिका ने इस मामले को शीर्ष स्तर पर भारत के सामने उठाया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक बयान जारी कर तब कहा था कि भारत इन आरोपों को गंभीरता से ले रहा है। भारतीय मीडिया में आपको इस खबर का फॉलो अप दिखा हो तो मुझे बताइयेगा।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने आज अपनी खबर में लिखा है, … पर एक घोषित आतंकवादी पन्नून द्वारा राहुल गांधी की बातों के समर्थन ने विवाद को एक नया आयाम दिया। हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार पन्नून ने कहा है, राहुल गांधी का बयान …. न सिर्फ निडर और अग्रणी है बल्कि सिख जिन बातों का सामना करते रहे हैं उसके वास्तविक इतिहास में मजबूती से खड़ा है। टाइम्स ऑफ इंडिया में आज राहुल गांधी का स्पष्टीकरण है कि वे 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के समर्थन में हैं और चाहते हैं कि यह सीमा खत्म हो। इसके साथ शीर्षक में यह भी कहा गया है कि उन्होंने जातिवार जनगणना की मांग दोहराई। इसके साथ पन्नून के मामले में भाजपा की आलोचना की खबर सिंगल कॉलम में है। भाजपा के पक्ष के साथ आज यह खबर इंडियन एक्सप्रेस में भी है। अमर उजाला में इस खबर का शीर्षक है, “भारत विरोधी इल्हान उमर से मिले राहुल …. विवाद”।
नवाज शरीफ को निमंत्रण
आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले 2014 के शपथग्रहण में नवाज शरीफ आमंत्रित थे। आज तक यह सवाल भी नहीं उठा कि शपथग्रहण से पहले उन्हें किसने बुलाया होगा और किसके बुलावे पर वे आ गये थे फिर बिना बुलाये नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान गये इसका प्रचार खुद किया लेकिन राहुल गांधी के भारत विरोधी के मिलने पर अमर उजाला ने फोटो के साथ चार कॉलम में ऐसे शीर्षक लगाया है जैसे हर किसी को पहचानना जरूरी हो या भारत के विरोध में बोलने वालों से कांग्रेस या विपक्षी नेताओं के नहीं मिलने का कोई रिवाज है। नवोदय टाइम्स में इस खबर का शीर्षक है, “देश तोड़ने वाली ताकतों के साथ खड़े राहुल : शाह”। यहां यह दिलचस्प है और सिर्फ नवोदय टाइम्स में दिखा, इसी पन्ने पर सिंगल कॉलम का एक शीर्षक है, “20 सीटें और मिलतीं तो जेल में होते चार सौ पार वाले खरगे”। खबर के लिहाज से यह आपको चाहे जितनी बेमतलब लगे तथ्यों के आधार पर यह निश्चित रूप से बड़ी खबर है पर और किसी अखबार में पहले पन्ने पर नहीं दिखी। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के एक शिखर के सदस्य ने कहा है कि अदाणी पावर डील की समीक्षा चल रही है दूसरी ओर कंपनी ने कहा है कि बकाया के बावजूद साझेदारी की भावना के तहत आपूर्ति जारी है।
मुसलमानों को परेशान करना
आप जानते हैं कि हिन्दुओं की भलाई के नाम पर सत्ता में आई भाजपा, मुसलमानों को परेशान करके हिन्दुओं को खुश करती रही है। समाज ऐसा हो गया है कि मुसलमान की दुकान से सामान खरीद कर बढ़ने पर एक अनजान बुजुर्ग ने मुझसे मेरा नाम पूछा और आश्वस्त होने के बाद कहा कि मुसलमान से क्यों खरीदते हैं मुझे देखिये मैं पीछे से खरीद कर ला रहा हूं। आज ही टाइम्स ऑफ इंडिया में खबर है कि शिमला में अवैध मस्जिद गिराने की मांग करने वाली भीड़ पुलिस से भिड़ गई और इसमें 10 लोग घायल हुए हैं। ऐसे में मुसलमानों को परेशान करने के लिए सरकार समान नागरिक संहिता की बात भी करती रही है और सिख उसका समर्थन करते हैं। धार्मिक मामलों में अदालतों के फैसले भी अलग आये हैं और इसका मतलब वह भी है जो राहुल गांधी ने कहा है और ऐसा नहीं है कि समझना मुश्किल है। बेशक भाजपा अपनी राजनीति कर रही है तो राहुल गांधी को भी अपनी राजनीति करने का हक है।
राहुल गांधी को पप्पू साबित करना
आप जानते हैं कि अभी तक भाजपा की राजनीति राहुल गांधी को पप्पू साबित करने की रही है। राहुल गांधी जबसे भाजपा विरोधी राजनीति में सक्रिय हुए हैं और जो स्थिति बनाई है उसमें भाजपा उनकी चालों से लगभग हिल जा रही है और इसीलिए राहुल गांधी कहीं, कुछ बोलें, भाजपा की ट्रोल सेना पहले से तैयार लगती है। यह अलग बात है कि भाजपा के पास उस स्तर का कोई नेता अभी तक नहीं दिखा है। दूसरी ओर, चुनाव के दौरान नरेन्द्र मोदी के कांग्रेस विरोधी प्रचार से कांग्रेस वैसे परेशान नहीं हुई, चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की और अखबार में खूब छपा तब भी। नतीजा चुनाव परिणाम में दिखा पर कांग्रेस में कोई भाजपाइयों की तरह परेशान नहीं हुआ। जो भी हो, भाजपा को अपनी स्थिति मजबूत करनी है। ऐसा नहीं हुआ तो सत्ता चली जायेगी। उसका सबसे बड़ा नुकसान (चाहे जब हो) कार्यकाल के घोटाले सार्वजनिक होंगे और उसका प्रचार किया जायेगा। इस प्रचार का नुकसान लंबा, बड़ा और स्थायी होगा। दूसरी ओर, भाजपा के पास लोकप्रिय होने के लिए कुछ नया है नहीं, पुराने तरीके काम नहीं कर रहे हैं और इसलिए पहले जो किया जा रहा था वह अब और खुले व बेशर्म रूप में सामने आ रहा है।
सेना के अधिकारी के साथ मारपीट
आप जानते हैं कि गैर भाजपा शासित राज्यों में जंगल राज होना कहा जाता है और भाजपा शासित राज्यों में राम राज्य। मैं राम राज्य में रहता हूं इसलिए उसके बारे में नहीं बोलूंगा लेकिन मध्य प्रदेश के राम राज्य में क्या हो रहा है उसकी खबर आज इंडियन एक्सप्रेस में है। इसके अनुसार महू कैनटोनमेंट के दो सेना के अधिकारी के साथ मारपीट और इनकी एक महिला मित्र के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार हुआ। यही नहीं, एक अधिकारी और महिला को रोक लिया गया तथा उनसे 10 लाख रुपये की मांग की गई। यह सब ऐसी जगह हुआ जहां मोबाइल काम नहीं करते हैं। पुलिस के अनुसार मारपीट और बलात्कार के शिकार चार लोगों को मेडिकल के लिए सुबह साढ़े छह बजे अस्पताल ले जाया गया था।
हू किल्ड जज लोया
कुल मिलाकर, नरेन्द्र मोदी या संघ परिवार अपनी ही राजनीति में फंस गये हैं। इसके लिए जो सब किया गया वह अब सार्वजनिक है। इतना कि एक महत्वपूर्ण फैसले से जुड़े जज की संदिग्ध मौत और उसके बाद मिली राहत के लाभार्थी का पता होने के बावजूद मौत की जांच नहीं हुई। इस पर एक किताब पत्रकार निरंजन टाकले की है और नाम है, हू किल्ड जज लोया। इससे, मौत संदिग्ध न भी रही हो तो हो गई पर आम लोगों ने उसकी परवाह नहीं की। पूरी कहानी वाली एक किताब और उसका कई भाषाओं में अनुवाद होने के बावजूद। दूसरी ओर, यह भी तथ्य है कि (भाजपा के पास) नरेन्द्र मोदी का विकल्प नहीं हैं। एक जज की संदिग्ध मौत और उसकी जांच नहीं होने के बाद प्रधानमंत्री का मुख्य न्यायाधीश के घर जाना मायने रखता है पर खबर वैसे नहीं छपी है।
तड़ीपार से गृहमंत्री तक
वह भी तब जब गुजरात की कहानी कहने वाली एक और किताब, गुजरात फाइल्स पहले से थी। यह गुजरात दंगों, फर्जी मुठभेड़ और राज्य के गृहमंत्री हरेन पंड्या की हत्या के बाद की स्थितियों पर आठ महीने चले एक पत्रकार, राणा अयूब के स्टिंग ऑपरेशन की रिपोर्ट है। इसका भी कई भाषाओं में अनुवाद हुआ है। राणा अयूब ने बहुत बाद में कहा था कि किसी ने उनसे तथ्यों की जांच की बात नहीं की। इसका नतीजा यह हुआ कि एक पूर्व तड़ीपार देश के गृहमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गया। इससे जुड़ी उसकी अपनी कहानी भी सार्वजनिक है पर अभी वह मुद्दा नहीं है। तथ्य यह है कि उस समय जो गृहमंत्री थे उन्हें भी जेल जाना पड़ा और लगभग उतने ही समय जेल में रहना पड़ा। इस व्यवस्था में सबने देखा कि राम मंदिर का फैसला किन स्थितियों में हुआ और मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के संबंध में माना जा रहा था कि वे जनहित के पक्ष में हैं लेकिन उनसे प्रधानमंत्री का मिलना और इससे पहले एक अन्य मुख्य न्यायाधीश से प्रधानमंत्री की मुलाकात और उसके बाद की स्थितियां जब सोशल मीडिया खासकर एक्स पर फैला हुआ है।

अखबारों में इसकी सबसे अच्छी प्रस्तुति टाइम्स ऑफ इंडिया में है। इंडियन एक्सप्रेस ने फोटो जरूर छापी है पर यह 1975 के इमरजेंसी वाले तेवर में नहीं है। यह 2014 के बाद से देश में चल रहे इमरजेंसी की खबर देने के अंदाज में है। यह अलग बात है कि इंडियन एक्सप्रेस के पाठक इतने से ही खबर समझ जायेंगे। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस फोटो को दो कॉलम में टॉप पर लीड के बराबर में तीन कॉलम की एक खबर के साथ छापा है। यह प्रस्तुति इतनी दमदार है कि इसे सुबह से ही लोग एक्स पर साझा कर रहे हैं। खबर का शीर्षक है, केंद्र सुप्रीम कोर्ट के खनिज रॉयल्टी फैसले की समीक्षा चाहता है। इसका इंट्रो है, “मुख्य न्यायाधीश चकित : नौ जजों की पीठ के फैसले की समीक्षा”। अखबार ने फोटो कैप्शन में लिखा है, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक्स हैंडल से पोस्ट की गई एक फोटो में वे भारत के मुख्य न्यायाधीश, डीवाई चंद्रचूड़ के घर पर बुधवार को गणेश पूजा समारोह में। टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी खबर, फोटो औऱ प्रस्तुति से बताया है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट या मुख्य न्यायाधीश से क्या चाहती है और उसके लिए प्रधानमंत्री मुख्य न्यायाधीश के घर जाने से भी नहीं हिचक रहे हैं जबकि यह रिवाज और परंपरा के अनुसार सही नहीं है।
बिना कुछ कहे जो हुआ और दिखा
कहने की जरूरत नहीं है कि इसके जरिये बिना कुछ कहे हिन्दू होने और आस्था की दुहाई दी गई है। ट्वीटर पर लोगों ने बताया है कि मराठी मुख्य न्यायाधीश जैसे महाराष्ट्र के परिधान में उनके घर जाने के भी मायने हैं। पर यह सब खबर नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने एक्स पर लिखा है, “यह चौंकाने वाली बात है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश, (न्यायमूर्ति धनंजय यशंवत) चंद्रचूड़ ने (प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी को एक निजी मुलाकात के लिए अपने घर पर आने दिया। यह न्यायपालिका, जिसे कार्यपालिका से नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि सरकार संविधान के दायरे में काम करे, के लिए बहुत बुरा संकेत है। इसीलिए यह जरूरी है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच दूरी बनाकर रखी जाये।” मुझे लगता है कि पूजा जैसे धार्मिक आयोजन के मौके पर ऐसा करना गंभीरता से रेखांकित किये जाने योग्य है। शिवसेना नेता संजय राउत ने इस संबंध में लिखा है, संविधान के घर को आग लगी, घर के चिराग से ….1) ईवीएम को क्लीन चिट, 2) महाराष्ट्र में चल रही संविधान विरोधी सरकार के खिलाफ सुनवाई पर तीन साल से तारीख पे तारीख 3) पश्चिम बंगाल में बलात्कार और हत्या के मामले में स्वतः संज्ञान लेकिन महाराष्ट्र के बलात्कार कांड का जिक्र नहीं 4) दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को जमानत के मामले में तारीख पे तारीख। ये सब क्यों हो रहा है? क्रोनोलॉजी समझ लीजिये …. भारत माता की जय!!!!
बीमे की खबर लीड
इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया और नवोदय टाइम्स में आज 70 साल से ऊपर के लोगों के लिए पांच लाख रुपए के बीमे की खबर लीड है। जहां तक इसके व्यावहारिकता और उपयोग की बात है, भले अनुच्छेद 370 की तरह सरकार की चुनावी घोषणा हो, देश को जरूरत इलाज की सस्ती सुविधाओं की है। निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये में जो इलाज हो सकता है उससे लाभ कम और नुकसान ज्यादा है। दैनिक जागरण की 2019 की एक खबर के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना में भ्रष्टाचार की विषबेल बहुत लंबी निकली। एक तरफ तो करोड़पतियों के कार्ड बनाकर गरीबों का हक छीना गया, वहीं एक-एक गोल्डन कार्ड पर 20 से ज्यादा सदस्यों की एंट्री कर दी गयी। मेरठ में निरीक्षण करने पहुंची नेशनल एन्टी फ्रॉड एजेंसी ने मेरठ में खेल पकड़ा तो प्रदेशभर की पड़ताल हुई। झांसी में एक कार्ड पर 196 सदस्यों को जोड़ दिया गया। अधिकारियों की मिलीभगत से आयुष्मान योजना में ज्यादा लोगों के नाम शामिल कर बड़े पैमाने पर गोल्डन कार्ड बनाए गए। मेरठ में ऐसे हजारों परिवार मिले है। सरकार ने सूबे के सभी सीएमओ को पत्र भेजकर ऐसे नामों की सूची तलब की है। वैसे भी इलाज ही नहीं हो पाये तो पैसे का कोई क्या करेगा। सरकारी प्रचार की आज की दूसरी बड़ी खबर अमर उजाला में लीड है। शीर्षक है, “दुनिया की हर डिवाइस में लगी हो भारत की चिप, यही सपना : मोदी” यह खबर दूसरे अखबारों में भी लीड या सेकेंड लीड है। यह हिन्दुस्तान टाइम्स में भी लीड है। द हिन्दू और द टेलीग्राफ की लीड कोलकाता का मामला है।



