डॉक्टर पथिक-
कल पूर्ण एचडी प्रिंट में पायरेटेड पुष्पा द्वितीय फिल्म देखी। पुष्पा द्वितीय जैसी फिल्मों की सफलता बताती है कि वर्तमान में हिंदुस्तानी युवाओं की प्राथमिकता जॉब नही बल्कि ब्लोजॉब है।
आदरणीय ने उचित किया जो इन युवाओं को नौकरी धंधा छीनकर 5 किलो राशन की कतार में लगा दिया।
पुष्पा द्वितीय फिल्म स्विमिंग पूल में नहाते लॉ एंड ऑर्डर के ऊपर मूत देती है और उसे चेलेंज करती है “दम है तो रोक के दिखा शेखावत।”
इन्ही फिल्मों से प्रेरणा लेकर आज का युवा दूसरे धर्म के धर्मस्थलों में घुसकर उत्पात मचा रहा है। इस फिल्म में जब पुष्पा भाऊ सौ पांच सौ हजार पांच हजार करोड़ की बातें करते हैं तो पांच किलो सरकारी अनाज पर जीवन यापन करते उधार की बीड़ी पीते आज के युवा की हसरतों को ओर्गास्म प्राप्त हो जाता होगा और फिर वह तत्काल कश्मीर में प्लॉट खरीदने के सपने देख लेता होगा।
इस फिल्म में रश्मिका मंदाना कदाचित भी कामोद्दीपक नही लगी। रश्मिका की फीलिंग भले ही दिव्यांग वनमानुष अल्लू अर्जुन को देखकर बार-बार जाग रही थीं पर दर्शकों में हृदय में फीलिंग जागृत करने में असफल रही रश्मिका।
ऊपर से रश्मिका को आधी फिल्म में गर्भवती दिखाकर उसका फिगर खराब करवा दिया जाता है जिससे दर्शकों का रश्मिका से मोह भंग हो जाता है।
अपनी गर्भवती पत्नी को गोद में उठाकर पेशाब करवाने ले जाते अल्लू अर्जुन को महान दिखाने की कोशिश की गई है देखा देखी में यही काम आम आदमी करने लगे तो उसे निश्चित तौर पर स्पॉन्डिलाइटिस हो जायेगा।
इससे तो बढ़िया होता कि अल्लू अर्जुन किसी नर्स को बुलाकर रश्मिका को यूरीन बैग लगवा देता। श्री लीला ने भी अपने आइटम सॉन्ग से निराश किया।
गुंटूर कारम फिल्म में महेश बाबू के साथ जोरदार आइटम नंबर करने वाली श्री लीला इस फिल्म में बुझी-बुझी सी दिखी, मानो निर्माता ने इसको मुंह मांगी फीस न दी हो।
पुष्पा द्वितीय फिल्म की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसके डायलॉग्स और डायलॉग डिलीवरी है।
मेरी राय है कि भक्तों को पुष्पा भाऊ के हिंदी में डायलॉग बोलने वाले श्रेयस तलपड़े को भी अपना छोटा मोटा बाप तो बना ही लेना चाहिए।




Abhishek shukla
December 28, 2024 at 9:24 am
यह लेख लिखने वाला भाई तगड़ा फ्रैंस्टेड है, मानसिक इलाज करा भाई