
सौरभ यादव-
सब MOदी के मास्टर स्ट्रोक की झूठी बातें करते हैं जबकि असली मास्टर स्ट्रोक तो आज राहुल गांधी ने लगाया है। दिन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में शानदार प्रजेंटेशन देकर चुनाव आयोग की पोल खोली और शाम को इंडिया गठबंधन के साथियों को डिनर पर बुलाकर उनके सामने भी एक और प्रजटेंशन देकर सही से समझाया कि चुनाव आयोग ने कैसे वोट की चोरी की है।
ये राहुल गांधी का मास्टर स्ट्रोक नहीं तो और क्या है…शानदार बेहद शानदार
राकेश कायस्थ-
तस्वीर में दिखाई दे रहा यह आदमी भारतीय चुनावी तंत्र का प्रतिनिधि चेहरा है। पूरा देश जानता है कि जो सत्ता तंत्र मेयर का पद हड़पने के लिए सरेआम चोरी करवा सकता है, उसे विधानसभा और संसदीय चुनाव में सदाचार का दौरा नहीं पड़ेगा।

नेता प्रतिपक्ष हमारी राजनीतिक व्यवस्था में प्रधानमंत्री के बाद देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति होता है। उसकी बात प्रधानमंत्री जैसा ही वजन रखती है। अगर वह तथ्य सामने रखते हुए अगर कोई बात कह रहा है, तो चुनाव आयोग का यह प्रशासनिक और नैतिक दायित्व है कि देश के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
जवाब में चुनाव आयोग की तरफ से बंदर घुड़की आई है, हलफनामा लिखकर दो, अगर गलत हुआ तो एफआईआर करूंगा। ये धमकी कुछ ऐसी है जैसे चोरी की शिकायत करने गये किसी गरीब आदमी को थानेदार यह कहकर हड़काता है कि पहले ये साबित करो कि जिस साइकिल की चोरी की रिपोर्ट तुम लिखवाने आये हो, वो तुम्हारी ही थी। बात गलत निकली तो जेल में डाल दूंगा।
केंचुआ परिस्थितियों को भांपने में बड़ी चूक कर रहा है। माना कि पिछले 11 साल में पूरे तंत्र का अपराधीकरण हुआ है। प्रशासनिक अमला चोरी के खेल में सहभागी है और न्यायपालिका बेदाग नहीं है। लेकिन इस देश की जनता अंधी नहीं है। पाप का घड़ा कितना भी बड़ा हो, एक ना एक दिन भरता जरूर है।
अंबरीश कुमार-
कुछ पत्रकार कह रहे हैं कि वोटर लिस्ट में पहले भी गड़बड़ होती रही है। करीब सौ करोड़ वोटर की लिस्ट परफेक्ट करना मुश्किल है। लेकिन वो असली बात भूल रहे हैं:-
- पहले चुनाव आयोग मांगने पर वोटर लिस्ट की जाँच में अड़चन नहीं डालता था। 2018 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने ही जाँच की थी। उसके बाद चुनाव आयोग ने 27 लाख नक़ली वोटर हटाए थे।
- लेकिन उसके बाद चुनाव आयोग ने encryption तकनीक का इस्तेमाल किया। इससे छपी हुई वोटर लिस्ट को अब डेटाबेस में बदलना असंभव हो गया है, इससे अब जाँच असंभव हो गई है। चुनाव आयोग ने ऐसा क्यों किया?
- पहले कोई भी शिकायत करता था या प्रमाण देता था, तो चुनाव आयोग गड़बड़ियों का संज्ञान के ले कर जाँच करता था। अब लिखित में देने पर भी नहीं करता। क्यों?
- पहले चुनाव आयोग पारदर्शिता बढ़ाने के लिए CCTV जैसे कदम को प्रोत्साहन देता रहा है। अब वो CCTV फुटेज को 45 दिन में डिलीट करने का फैसला ले लेता है। क्यों?
- चुनाव आयोग फाइनल वोटर लिस्ट देने से इंकार क्यों कर रहा है? supplementary list और additional supplementary list जो पार्टियों को नहीं मिलती, उसे देने से क्यों मना कर रहा है?
- पहले चुनाव आयोग कोई भी बड़ा रिफार्म या फैसले से पहले राजनैतिक दलों से मशविरा करता था। लेकिन अब अचानक SIR जैसा फैसला लेता है और उसे सब पर थोप रहा है। क्यों?
- पहले चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों के नुमाइंदों से खुल कर, सौहार्दपूर्ण वातावरण में मिलता था। राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों का सम्मान करता था। लेकिन अब निर्देश देने लगा है कि उससे कौन मिलेगा। क्यों?
- पहले चुनाव आयोग हर फैसले की प्रेस कांफ्रेंस करता था। SIR पर कोई नहीं की। क्यों?
महाराष्ट्र चुनाव में वोटिंग से पहले महा विकास अघाड़ी की तीनों पार्टियों ने ECI को चिट्ठी लिखी थी। उस पर जांच तो दूर, जवाब तक नहीं दिया। क्यों? कांग्रेस ने पिछले आठ महीने में कई बार लिखित शिकायत की है, क्या कोई जाँच हुई?
उत्तराखंड में करीब 4000 वोटर, जिनके नाम डिलीट हुए थे, उन्होंने जानकारी मांगी थी, उसे क्यों नहीं दिया गया? बात सिर्फ इतनी नहीं है कि गड़बड़ है। बात ये भी है की अब गड़बड़ की सुनवाई नहीं है।
कृष्णन अय्यर-
राहुल गांधी ने एक “प्रोफेशनल डेटा एनालिसिस” पेश किया है..परफेक्ट एंड सॉलिड कॉरपोरेट प्रेजेंटेशन..
- राहुल गांधी ने सुबूत के तौर पर एक वोटर के हर क़ानूनी पहलू की तहक़ीक़ात की है : तस्वीर, नाम, पता, पिता/पति का नाम, वोटर कार्ड नाम और दूसरे डेटा पॉइंट..
- इस वक़्त किसी भी जम्हूरियत में प्रेस, एजेंसी और डेमोक्रेटिक फोरम को चाहिए था कि राहुल गांधी के बताए डेटा पॉइंट का इस्तेमाल करते हुए हर घर पर जा कर असलियत की तहक़ीक़ करते
- मगर तहक़ीक़ के बनिस्बत राहुल गांधी को एफिडेविट देने को कहा गया..राहुल गांधी पर गालियों की बौछार हो रही है..जम्हूरियत के क़ातिलों के पास कोई हथियार नहीं बचा..
- राहुल गांधी से एफिडेविट मांग कर यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि EC से कोई सवाल नहीं पूछ सकता..क्या EC डेमोक्रेटिक सिस्टम से ऊपर है?
- अगर EC में ज़रा सी भी सच्चाई, शर्म, हया और ग़ैरत बची हुई होती तो राहुल गांधी की प्रेस मीट के फ़ौरन बाद राहुल गांधी के बताए एड्रेस पर मीडिया को साथ ले कर पहुंच जाती..
- एक बेडरूम में 80 लोग रहते हैं? एक वोटर 3 राज्यों में वोट डाल रहा है! एक ‘औरत एक ही नाम पर 3 वोटर कार्ड है! और एफिडेविट राहुल गांधी से चाहिए?
- मैं राहुल गांधी की सिर्फ़ एक बात पर फोकस कर रहा हूँ : हम आप को नहीं छोड़ेंगे..और इस बार राहुल गांधी छोड़ने के मूड में नहीं हैं..
- यक़ीन मानिए EC का हर वो गुनाहगार जो इस जुर्म में शामिल है वो ख़ौफ़ज़दा है..उस गुनाहगार को एहसास है कि देशद्रोह का नतीजा बहुत बुरा है..सब की हालत ख़राब है..
- मुझे लगता है कि राहुल गांधी के पास और भी डेटा है..अभी कई और ख़ुलासे बाक़ी हैं..यक़ीन मानिए, पूरी दुनिया में सनसनी फैल चुकी है..दुनिया भर में राहुल गांधी पर बात हो रही है..
- लोकतंत्र और अर्थतंत्र में गहरा रिश्ता है..अगर हम नाकामयाब होते हैं तो भारत का अर्थतंत्र भी नहीं बचेगा..
देवेंद्र सुरजन-
मैंने “वोट चोरी” पर राहुल गांधी की पूरी प्रेस मीट को बहुत ग़ौर से सुना है..दिमाग़ सन्न रह गया..
- मैन्युअली जिस मेहनत से राहुल गांधी और टीम ने वोट चोरी को पकड़ा है वो दुनिया में नज़ीर बन चुकी है
- राहुल गांधी ने जो काग़ज़ पेश किए हैं वो सुबूत बन चुके हैं.. इस सुबूतों से बचना नामुमकिन है..
- राहुल गांधी ने बहुत साफ़ बोला है कि चुनाव आयोग के जो भी लोग इस घोटाले में शामिल हैं उनमें से कोई नहीं बचेगा
- चुनाव आयोग के हर शख़्स को राहुल गांधी की बातों पर संजीदा रहना चाहिए.. बाद में मौक़ा’ नहीं मिलेगा
- चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को एफिडेविट देने को बोला है कि अगर उन के इल्ज़ामात ग़लत साबित हुए तो उन्हें सज़ा होगी
- चुनाव आयोग को भी एफिडेविट देना चाहिए कि अगर राहुल गांधी के इल्ज़ामात सही साबित हुए तो उन्हें भी सज़ा होगी
- राहुल गांधी ने दुनिया की सब से बड़ी चुनावी रिगिंग का पर्दाफ़ाश किया है..
- चुनाव आयोग को एक सीधी सी चुनौती/गुज़ारिश है : वोटर लिस्ट की “इलेक्ट्रॉनिक कॉपी” जारी करे.. भागने को जगह नहीं बचेगी..


