नई दिल्ली। दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) ने मेरठ के पत्रकार राजेश अवस्थी की आत्महत्या पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि लंबे समय तक दैनिक जागरण में कार्यरत रहे राजेश अवस्थी को नौकरी से निकाले जाने के बाद गंभीर आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्होंने कथित तौर पर सल्फास की गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली।
DUJ ने जारी बयान में कहा कि पत्रकारों को मिलने वाला कम वेतन और नौकरी की असुरक्षा उन्हें लगातार आर्थिक संकट में धकेल रही है। संगठन के अनुसार, छंटनी (रिट्रेंचमेंट) किसी भी कर्मचारी के लिए बड़ा झटका होती है और कई मामलों में यह परिवारों को गरीबी की कगार पर पहुंचा देती है।
संगठन ने कहा कि पत्रकारिता पेशे में काम करने वाले अधिकांश लोग इतना बचत नहीं कर पाते कि अपना घर बना सकें या सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक जीवन जी सकें। पेंशन व्यवस्था के अभाव में उन्हें अपने बच्चों पर निर्भर होना पड़ता है।
DUJ ने केंद्र सरकार के नए श्रम कानूनों की भी आलोचना की। संगठन के मुताबिक, पहले वर्किंग जर्नलिस्ट्स एक्ट के तहत छंटनी की स्थिति में तीन महीने के वेतन के बराबर मुआवजा मिलता था, लेकिन नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) में इसे घटाकर एक महीने का कर दिया गया है। साथ ही, संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) आधारित नियुक्तियों ने पत्रकारों की नौकरी को और अधिक असुरक्षित बना दिया है।
दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स का कहना है कि नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा के अभाव ने कई पत्रकारों को निराशा और हताशा की स्थिति में पहुंचा दिया है। संगठन ने राजेश अवस्थी के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
DUJ ने सभी राज्य सरकारों से पत्रकारों के लिए सम्मानजनक पेंशन व्यवस्था लागू करने, बेहतर वेतन सुनिश्चित करने, कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम पर रोक लगाने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं समेत सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही पत्रकारों से इन मुद्दों पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील भी की है।



