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राजेश श्रीनेत के एडिटर इन चीफ बनने पर वरिष्ठ पत्रकार त्रिलोकी उपाध्याय की टिप्पणी पढ़ें!

त्रिलोकी उपाध्याय-

फिनिक्स की तरह फिर जिंदा होने का नाम ही श्रीनेत है। अपने जमीर को जिंदा रख कर भी हिंदी जर्नलिज्म में शीर्ष में रहा जा सकता है। गिरोहबंदी किसी के हुनर को छुपा तो सकती है, लेकिन दबा नहीं सकती।

राजेश श्रीनेत

जानते हैं गिरोहबाजों ने राजेश को क्यों निशाना बनाया। वह राजेश को ब्रोकर बना कर अनैतिक ढंग से दौलत कमाना चाहते थे। राजेश इसके लिए तैयार नहीं हुए। राजेश के ज़मीर ने दलाल नहीं बनने दिया।

राजेश एक बार फिर दैनिक अमृत विचार के एडिटर इन चीफ हो गये हैं। ये बरेली के जाने-माने चिकित्सक का अखबार है। अब राजेश इसे संवारेंगे। हिंदी पत्रकारिता की बेबाकी देखने को मिल सकती है। ढेर सारी शुभकामनाएं। बिहारी जी और नीब करौरी वाले बाबा आप पर कृपा बरसाएं। श्रीराधे वृंदावन धाम।

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