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सुख-दुख

समाचार प्लस के सीईओ उमेश कुमार ने एक दुखी परिवार को हर माह पांच हजार रुपये देने का वादा किया

समाचार प्लस के सीईओ उमेश कुमार ने एक लाचार, बेसहारा और आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की मदद के लिए हर महीने पांच हजार रुपये देने का वादा किया है. उन्होंने शुरुआत पांच हजार रुपये देकर कर दी है. इस परिवार के खाते में उन्होंने पांच हजार रुपए डाल दिए. उन्होंने प्रतिमाह इस परिवार को पांच हजार रुपए देने की बात कही है. असहाय महिला राजी देवी का कहना है कि उमेश जी का शुक्रिया अदा करने के लिए उनके पास शब्द नहीं है. इस आर्थिक मदद से अब उनके परिवार को दो वक्त की रोटी मिल पाएगी.  उमेश इससे पूर्व विकलांग जगदीश की भी मदद कर चुके हैं. इस परिवार की भी उमेश जी पांच हजार रुपए प्रतिमाह मदद कर रहे हैं.

समाचार प्लस के सीईओ उमेश कुमार ने एक लाचार, बेसहारा और आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार की मदद के लिए हर महीने पांच हजार रुपये देने का वादा किया है. उन्होंने शुरुआत पांच हजार रुपये देकर कर दी है. इस परिवार के खाते में उन्होंने पांच हजार रुपए डाल दिए. उन्होंने प्रतिमाह इस परिवार को पांच हजार रुपए देने की बात कही है. असहाय महिला राजी देवी का कहना है कि उमेश जी का शुक्रिया अदा करने के लिए उनके पास शब्द नहीं है. इस आर्थिक मदद से अब उनके परिवार को दो वक्त की रोटी मिल पाएगी.  उमेश इससे पूर्व विकलांग जगदीश की भी मदद कर चुके हैं. इस परिवार की भी उमेश जी पांच हजार रुपए प्रतिमाह मदद कर रहे हैं.

रुद्रप्रयाग के सुनई (मुसाढुंग) गांव की राजी देवी का पति पिछले 28 साल से घर नहीं लौटा है. अब तो शायद ही पति कभी घर लौट पाए. इसके बाद भी मन नहीं मानता. 28 साल का वक्त कम नहीं होता है. बेटी के पैदा होने के बाद से पति का सुराग तक नहीं है. सोचा था कि बेटी उसका सहारा बनेगी. लेकिन आज वह स्वयं बेटी का सहारा बनी हुई है. बेटी बचपन से शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग है. कुछ बोल नहीं पाती. चल नहीं पाती. पति की राह देखते-देखते आज राजी देवी 59 वर्ष की हो चुकी है. राजी की हर सुबह उम्मीद की किरण के साथ होती है. उम्मीद पति के घर वापस लौटने की.

राजी की बेटी पैदाइश विकलांग है. बेटी के पैदा होने के बाद से पति की सूरत नहीं देखी है. बेटी को मिलने वाली विकलांग पेंशन से ही दो वक्त की रोटी नसीब हो रही है. शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग बेटी घुटनों के बल चलती है. न बोल पाती है और न सुन सकती है. बस इशारों की बातें समझ पाती है. उसका न तो कोई साथी है और न हमदर्द. मन ही मन मुस्कुराकर अपनी पीड़ा छुपा लेती है. घर की देहरी से बाहर शायद ही उसने कभी कदम रखा हो. राजी देवी के पास एक अदद घरोंदा भी नहीं है. वह अपनी विकलांग बेटी के साथ गौशाला में रहकर जिंदगी के एक-एक पल को काट रही है. आपदा में जमीन धंसने के कारण खेती-बाड़ी का साधन भी नहीं रहा. राजी देवी चाहती है कि उसे विधवा पेंशन मिले लेकिन मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना विधवा पेंशन मिलना संभव नहीं है.

मोहित डिमरी के फेसबुक वाल से.

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2 Comments

2 Comments

  1. Kaushalendra Kumar

    November 11, 2014 at 8:17 am

    उमेश सर जैसे लोग मीडिया में बिरले ही दिखते हैं।
    [email protected]

  2. HARISH

    November 12, 2014 at 2:11 am

    saalam umesh ji ko..

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