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यूपी में जंगलराज : लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार राजीव चतुर्वेदी को पुलिस ने थाने में प्राण निकलने तक प्रताड़ित किया

Kumar Sauvir : लेखक, कवि, चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता राजीव चतुर्वेदी की अभी शाम को पुलिस हिरासत में मौत हो गई। एक धोखाधड़ी के मामले में पुलिस राजीव को पूछताछ के लिए सरोजनी नगर थाने में ले गई थी। बताते हैं कि पुलिस ने राजीव को काफी प्रताड़ित भी किया। नतीजा, दो घंटे बाद ही थाने में ही राजीव ने दम तोड़ दिया। पुलिस का दावा है कि राजीव को जबरदस्त हृदयाघात हुआ और जैसे ही पुलिस उन्हें अस्पताल तक पहुंचाती, राजीव के प्राण पखेरू हो गए।

Kumar Sauvir : लेखक, कवि, चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता राजीव चतुर्वेदी की अभी शाम को पुलिस हिरासत में मौत हो गई। एक धोखाधड़ी के मामले में पुलिस राजीव को पूछताछ के लिए सरोजनी नगर थाने में ले गई थी। बताते हैं कि पुलिस ने राजीव को काफी प्रताड़ित भी किया। नतीजा, दो घंटे बाद ही थाने में ही राजीव ने दम तोड़ दिया। पुलिस का दावा है कि राजीव को जबरदस्त हृदयाघात हुआ और जैसे ही पुलिस उन्हें अस्पताल तक पहुंचाती, राजीव के प्राण पखेरू हो गए।

मूलतः इटावा के रहने वाले राजीव के एक भाई दिल्ली में गुरुतेग मेडिकल कॉलेज में एसपीएम प्रोफेसर हैं। राजीव माने-जाने वकील और पत्रकार थे। एक धोखाधड़ी के मामले में नाम आने के बाद राजीव ने वकालत छोड़ दिया और लखनऊ में जम गए। उन्होंने आधारशिला प्रकाशन के नाम से संस्थान शुरू किया। एक पत्रिका भी शुरू की थी राजीव ने जिसके पहले संपादक थे प्रभात रंजन दीन। लेकिन दोनों के बीच विवाद हुआ और यह पत्रिका बंद हो गई। राजीव की पत्नी स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में अधिकारी हैं लेकिन एक दशक पहले ही उनका परिवार-तंतु पूरी तरह बिखर गया था। उनके एक बेटी और एक बेटा है।

Sanjay Sharma : राजीव चतुर्वेदी जी अच्छे पत्रकार थे. उनकी लखनऊ के सरोजनीनगर थाने मे संदिग्ध हालात में मौत हो गयी. मैंने अभी मुख्यमंत्री महोदय से घटना की न्यायिक जाँच कराने और परिवार को मुआवज़ा देने की माँग की है. अगर न्याय नही मिला तो आंदोलन किया जायेगा.

वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर और संजय शर्मा के फेसबुक वॉल से.

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