दंगों के दाग और अपराधों की आग से कैसे बचेंगे अखिलेश यादव

अलीगढ़ में हुई महिलाओं से मारपीट और लूटपाट की दो घटनाओं ने बुलंदशहर कांड की याद फिर ताजा कर दी है। उत्त्तर प्रदेश में दंगों के सवाल पर सपा सरकार को विपक्षी दल पहले से ही घेरते आ रहे हैं। तो ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चुनाव के समय अब अखिलेश यादव दंगों के दाग और अपराधों की आग से खुद और पार्टी को कैसे बचाएंगे ?

धीरज सिंह

घटनाएं होती हैं और कुछ समय बाद लोग उन्हें भूल जाते हैं मगर चुनाव आते ही राजनैतिक दल एक- दूसरे का लेखा-जोखा कुरेद कर फिर बाहर निकाल देते है। लोग जिन बातों को भूल चुके थे, चुनाव के ऐन पहले फिर से सुर्खियां बनने लगती हैं। प्रदेश में हुए दंगे और आपराधिक वारदात, कुछ ऐसे ही मुद्दे हैं जो समाजवादी पार्टी और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पीछा नहीं छोड़ेंगे। मार्च 2012 में उत्तर प्रदेश का चुनाव परिणाम आने के बाद जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने अपने युवा पुत्र अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया तो जनता प्रदेश के विकास का सपना देख रही थी। लैपटॉप मिलने की आशा में प्रदेश के युवाओं में भारी उत्साह था।

उ.प्र. सपा के किले में दरार : टीपू से टीपू सुल्तान बनने के अखिलेश के मंसूबों पर फिर गया पानी

अलग-अलग चाहर दिवारियों से समय-समय पर झर-झर के बाहर आये बयान जिन्हें पाठकों की सुविधा के लिए, सिलसिलेवार नीचे परोसा गया हैं, तो यही संकेत दे रहे हैं कि “टीपू“ से “टीपू सुलतान“ बनने के अखिलेश (घर परिवार में टीपू) के मंसूबों पर पूरी तरह पानी फिर गया है।

अखिलेश यादव की कहानी से याद आये राजीव गांधी!

अनेहस शाश्वत
23 जून, 1980 की सुबह रेडियो पर एक समाचार आया और सन्नाटा छा गया। समाचार यह था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के छोटे पुत्र और उनके सम्भावित उत्तराधिकारी कांग्रेस नेता संजय गांधी का दुर्घटना में निधन हो गया। इस दारुण दुख के आघात से उबरी इन्दिरा गांधी ने सिर्फ इतना कहा कि-‘‘मेरे साथ इससे ज्यादा बुरा और क्या हो सकता है।’’ लेकिन किन्हीं भी परिस्थितियों में न डिगने वाली भारतीय मानसिकता की इन्दिरा गांधी ने तत्काल अपने बड़े पुत्र राजीव गांधी को अपना उत्तराधिकारी चुनकर प्रषिक्षण देना शुरू किया। अभी यह प्रशिक्षण चल ही रहा था कि दूसरी दुर्घटना घटी और 31 अक्टूबर, 1984 को इन्दिरा गांधी की हत्या कर दी गयी। चूंकि सारी गोटें इन्दिरा गांधी बिछा चुकी थीं और उनके सिपहसालार भी जांनते थे कि उनका भविष्य वंशवादी शासन में ही सुरक्षित है। इसलिए तत्काल राजीव गांधी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिला दी गयी।

यूपी में जंगलराज : जेल के चिकित्साधिकारी को क्यों है मौत का अंदेशा, पढ़िए पूरा पत्र

सेवा में
महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
महानिदेशालय स्वास्थ्य भवन लखनऊ उ.प्र.
विषय – हत्या से पूर्व का बयान
महोदय

सविनय निवेदन है कि मैं जिला कारागार फिरोजाबाद में चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हूँ। मैं डायबिटीज का मरीज़ हूँ और सुबह-शाम इन्सुलिन लेता हूँ। जनवरी 2016 में जब मैं नवीन प्रा. स्वास्थ्य केंद्र इटौली पर तैनात था, तब मुझे पैनिक एंग्जायटी की समस्या हो गई थी। ढाई महीने तक नियमित दवा लेने और 21 फरवरी से 22 मार्च तक स्वास्थ्य लाभ हेतु अर्जित अवकाश लेने के बाद में पूरी तरह ठीक हो गया।

जंगलराज और घरेलू झगड़े के आरोपी अखिलेश यादव मीडिया पर निकाल रहे भड़ास

यूपी में अजब गजब राज चल रहा है. सीएम किसी बच्चे की तरह अपनी हर हार का ठीकरा मीडिया पर फोड़ रहा है. प्रदेश में जंगलराज चरम पर है. सरकारी आफिसों में घूसखोरी और भ्रष्टाचार, सपा नेताओं व मंत्रियों की नंगई, सत्ताधारियों के परिजनों की गुंडई, समाजवादी पार्टी के कुनबे में आंतरिक विवाद, महिलाओं का उत्पीड़न और बलात्कार, बाढ़ से परेशान लाखों किसान, पुलिस प्रशासन द्वारा आम जनता की सुनवाई से इनकार… यूपी के बारे में जितना लिखा जाए कम है. लेकिन नौजवान सीएम अखिलेश यादव लंबे चौड़े कई कई पन्ने और कई कई मिनट के विज्ञापन अखबारों-चैनलों में देकर खुद की बढ़िया इमेज गढ़ने-काढ़ने में लगे हैं लेकिन कोई मामला जब उनके सिर के उपर सवार हो जाता है तो वह सारा ठीकरा मीडिया के सिर मढ़ देते हैं…

लखनऊ में सपाई साइकिलों की खटर पटर और ताज होटल में टिप टिप बरसा पानी…

Yashwant Singh : अखिलेश यादव अदूरदर्शी और बकलोल नेता हैं. उन्हें जमीनी हालत की समझ ही नहीं है. पूर्वांचल में कौमी एकता दल के पास ठीकठाक जनाधार है. मुसहर, जुलाहा टाइप हिंदू मुस्लिम्स की बेहद पिछड़ी या यूं कहिए अति दलित जातियों का माई बाप कौमी एकता दल ही है. सपा में इस पार्टी के विलय से सपा को जबरदस्त फायदा होता. लेकिन मीडिया और दूसरी पार्टियों के नेताओं के ‘अपराधीकरण अपराधीकरण’ के हो हल्ले के जाल झांसे में फंसकर अखिलेश न सिर्फ इस विलय को रद करा बैठे बल्कि जमीनी स्तर पर सपा संगठन को मजबूती देने वाले शिवपाल को भी नाराज कर दिया.

सपा नेताओं के स्त्री विरोधी चेहरे को दिखाने वाला यह पोस्टर सोशल मीडिया पर हो रहा वायरल

सोशल मीडिया पर इन दिनों समाजवादी पार्टी की थू थू हो रही है. सपा के स्त्री विरोधी चेहरे के बखूबी उजागर हो जाने के बाद हर पढ़ा लिखा नागरिक इस पार्टी की भरपूर निंदा कर रहा है. बुलंदशहर गैंगरेप प्रकरण पर आजम खान के बेवकूफी भरे बयान के बाद हर आम ओ खास यह कहने पर मजबूर है कि आखिर सपा के नेताओं को हो क्या गया है, क्या उनके घर में बेटी मां नहीं हैं? सपा की सोच को उजागर करता एक पोस्टर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

यूपी में जंगलराज : बुलन्दशहर से जुड़े सवालों के जवाब चाहिए

उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में नेशनल हाइवे पर गैंगरेप का बेहद ही शर्मनाक मामला सामने आया है। कार में सवार परिवार को बंधक बनाकर वहशी दरिंदो ने मां और बेटी को हवश का शिकार बनाया है। सामूहिक दुष्कर्म की यह खौफनाक घटना कानून के शासन को कलंकित करने और सभ्य समाज को लज्जित करने वाली हैं। रूह को कंपा देने वाली इस घटना ने एक बार फिर नारी अस्मिता को कुचला है। एक बार फिर नारी की इज्जत को तार-तार किया गया। उस डरावनी एवं खौफनाक रात्रि की कल्पना ही सिहरन पैदा करती है कि परिवार के सदस्यों के सामने किस तरह एक मां-बेटी को अगवा किया और फिर बंधक बनाकर गैंगरेप किया गया।

यूपी में जंगलराज : अखिलेश यादव के राज में अपराधियों का मनोबल चरम पर

यूपी के बुलंदशहर में दिल्ली-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बंधक बनाकर मां-बेटी से गैंगरेप और लूटपाट कोई पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी एक-दो नहीं हजार से भी अधिक ऐसे मामले है, जिसमें गैंगरेप, लूट, हत्या, डकैती, बच्चियों संग बलातकार जैसी वारदाते हुई है। इन घटनाओं में संलिप्त अपराधियों को धर दबोचने के बजाय सपाई गुंडों संग मिलकर पैसा बनाने में जुटे पुलिसकर्मी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ और सिर्फ खानापूर्ति ही की है। चार-छह घटनाओं को छोड़ दें तो हरेक घटनाओं में निर्दोषों की गिरफ्तारी दिखाकर पुलिस न सिर्फ वाहवाही लूटी बल्कि अवैध वसूली का कुछ हिस्सा सत्ताई कुनबे को पहुंचाकर न मलाईदार थानों में तैनाती के साथ तरक्की का तगमा भी हासिल कर ली या करने वाले है।

यूपी में मंत्री ने अफसर को दी मां-बहन की गालियां (सुनें टेप)

यूपी में समाजवार्दी पार्टी की सरकार के मंत्री बेलगाम हैं और पूरा जंगलराज कायम कर रखा है. अखिलेश यादव अपनी इमेज के सहारे इलेक्शन जीतने की तैयारी में लगे हैं लेकिन उनके मंत्री उनकी लुटिया डुबाने के लिए कमर कसे हैं. तभी तो आए दिन मंत्रियों के कारनामों की खबरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है. ताजा मामला सपा सरकार के एक राज्यमंत्री की दबंगई का है.

यूपी में जंगलराज : पत्रकार को कालर पकड़ बाहर निकाला और बोला- ‘जहां चाहे शिकायत कर लो, कुछ न होगा’

यूपी में वास्तव में जंगल राज है। इलाहाबाद में एक पत्रकार को गरियाते धकियाते कालर पकड़कर गैस एजेंसी से बाहर कर दिया गया। साथ ही चेतावनी भी दी गई कि जहां चाहो शिकायत कर दो कुछ नहीं होने वाला। भुक्तभोगी पत्रकार ने थाने जाकर घटना की तहरीर दी पर पांच दिन बाद भी मुकदमा दर्ज करने को कौन कहे, पुलिस प्राथमिकी तक दर्ज नहीं कर सकी है। मामला इलाहाबाद के नवाबगंज थाना क्षेत्र का है। ‘पत्रकारों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं’ का जोर जोर से गाना गाने वाले ‘क्रांतिकारी पत्रकार’ हों या इलाहाबाद के पत्रकारीय संगठन इस मामले में बगल झांकने और आश्चर्यजनक हद तक चुप्पी साधे हुए हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो गई यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन की क्रूर कथा

मुख्‍य सचिव आलोक रंजन को हार चाहिए, न मिले तो नकद तीस लाख रुपया दो… चोरी के आरोप में दो महीनों तक अवैध हिरासत में रखा अपने दो घरेलू नौकरों को… इसी सारे मामले से जुड़ी है लखनऊ के एसएसपी के तबादले की इंटरनल स्टोरी….

यूपी में जंगलराज : लाख रुपये न देने पर पुलिस वालों ने पीटकर मार डाला और लाश हवालात में टांग दिया

यूपी की संभल पुलिस का बर्बर चेहरा… युवक की हवालात में मौत… परिजनों ने पुलिस पर लगाया हत्या का आरोप… हवालात के शौचालय में फाँसी पर झूलता मिला युवक का शव… पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारी समेत सात पुलिस कर्मियो को किया निलंबित… मजिस्ट्रेटी जाँच के दिए आदेश… परिजनों ने काटा हंगामा…. भारी पुलिस बल मौके पर तैनात… कई थानों की पुलिस को बुलाया गया…  

यूपी के जंगलराज से भयमुक्त होने के लिए वरिष्ठ पत्रकार ने अपनाया था यह नायाब तरीका

Shambhunath Shukla : तीव्र शहरीकरण किसी इलाके को हुआ है तो वह शायद एनसीआर का इलाका ही होगा। देखते ही देखते दिल्ली के करीब बसे नोएडा व गाजियाबाद में इस तेजी से बहुमंजिली इमारतें खड़ी हुई हैं कि यह पूरा इलाका कंक्रीट के जंगल में ही बदल गया है। इसमें भी गाजियाबाद जिले का इंद्रा पुरम इलाका तो अव्वल है। अभी ज्यादा दिन नहीं बीते जब यहां से गुजरने मेें दिन को भी डर लगता था। मैने यहां पर अपना 200 मीटर का एक भूखंड इसलिए गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को वापस कर दिया था क्योंकि 1993 में उन्होंने इस भूखंड के लिए 264000 रुपये मांगे थे जो कि मेरे लिए बहुत ज्यादा रकम थी और मैने वह आवंटित भूखंड सरेंडर कर दिया।

यूपी के खराब सूचना आयुक्तों के नाम का खुलासा : मुलायम के समधी अरविन्द बिष्ट टॉप पर, जावेद उस्मानी नंबर दो

लखनऊ : येश्वर्याज सेवा संस्थान की सचिव और सामाजिक कार्यकत्री उर्वशी शर्मा, आरटीआई कार्यकर्ता तनवीर अहमद सिद्दीकी, आरटीआई विधिक सलाहकार और उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ के अधिवक्ता रुवैद कमाल किदवई और आरटीआई एक्सपर्ट आर.एस. यादव ने आज लखनऊ में एक प्रेस वार्ता को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए सबसे खराब सूचना आयुक्त पता लगाने के वास्ते किए जा रहे सर्वे के परिणाम सार्वजनिक किये. सर्वे के आधार पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के समधी सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिष्ट को सूबे का सबसे खराब सूचना आयुक्त बताया गया है तो वहीं जन सूचना अधिकारियों द्वारा आरटीआई आवेदनों के निस्तारण में की जा रही हीलाहवाली आरटीआई एक्ट के क्रियान्वयन की सबसे बड़ी बाधा के रूप में सामने आयी है.

यूपी में जंगलराज : गरीबी, कर्ज और भूख से त्रस्त किसान झिनकू पेड़ से लटक मरा

(उपरोक्त तस्वीर पर क्लिक कर संबंधित वीडियो देखें)


-रामजी मिश्र ‘मित्र’-

सीतापुर : कैसे कोई गरीब किसान झिनकू पेड़ पर लटक कर मर जाने में ही मुक्ति देख पाता है, इसे जानना हो तो आपको उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में आना पड़ेगा। यहां झिनकू की मौत अफसरों, नेताओं, सिस्टम से ढेर सारे सवालों का जवाब मांग रही है लेकिन सब भ्रष्टाचारी चुप्पी साधे मामले को दबाने में लगे हैं। किसान अन्नदाता होता है। झिनकू भी अन्नदाता था। लेकिन गरीबी, कर्ज और भूख ने उसे ऐसे बेबस किया कि पूरा सिस्टम उसे आत्महत्या की ओर ले जाने लगा।

समाजवादी राज का सच : मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नवीन सचिवालय भवन में उडाई जा रही है श्रम कानूनों की धज्जियां

निर्माण मजदूरों की जिदंगी लगी है दांव पर निर्माण मजदूर मोर्चा की जांच टीम की रिपोर्ट

लखनऊ :  ‘अरे साहब आप डाक्टर की बात करते है यहां तो हालत यह है कि यदि कोई मजदूर मर जाए तो लाश का भी पता न चले ठेकेदार उसे अपना मजदूर मानने से ही इंकार कर दे‘ यह बातें शटरिंग का काम करने वाले बाराबंकी के एक निर्माण मजदूर ने आज उ0 प्र0 निर्माण मजदूर मोर्चा की जांच टीम से कहीं। जांच टीम उ0 प्र0 के मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट और विधानसभा के ठीक सामने बन रहे नवीन सचिवालय भवन में निर्माण मजदूरों की कार्यस्थितियों की जांच करने के लिए वहां गयी थी। इस टीम में यू0 पी0 वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर, निर्माण मजदूर मोर्चा के जिलाध्यक्ष बाबूराम कुशवाहा, जिला उपाध्यक्ष राम सुदंर निषाद और केश चंद मिश्रा शामिल थे। जांच टीम ने देखा कि उ0 प्र0 निर्माण निगम द्वारा बनवाए जा रहे नवीन सचिवालय में भवन व अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम 1996, उ0 प्र0 भवन एवं सन्निर्माण (नियोजन तथा सेवा शर्त विनियमन) नियम 2009 के प्रावधानों की खुलेआम धज्जियां उडाई जा रही है।

जानिए, मोदी का मूड बिगड़ा तो किस तरह चौटाला के बगल वाली बैरक में पहुंच जाएंगे मुलायम!

ये ‘सीबीआई प्रमाड़ित ईमानदार’ क्या होता है नेताजी?

सौदेबाज मुलायम का कुनबा 26 अक्टूबर 2007 से वाण्टेड है, क़ानूनी रूप में सीबीआई की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद 40 दिनों में एफआईआर हो जानी चाहिए थी. चूँकि सीबीआई सत्ता चलाने का टूल बन चुकी है, सो सीबीआई कोर्ट पहुँच गई एफआईआर की परमीशन मांगने। उस वक्त मुलायम के पास 39 सांसदों की ताकत थी। खुली लूट की आजादी में रोड़ा बन रहे वामपंथियों से मनमोहन का गिरोह छुटकारा चाहता था और अपने आकाओं के इशारे पर हरहाल में न्यूक्लियर डील कराने पर आमादा था।

यूपी में जंगलराज : तंजील की हत्या बिगड़ी कानून व्यवस्था एक और नमूना

…2007 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को इसलिये हार का सामना करना पड़ा था, क्योंकि तब प्रदेश में जंगलराज जैसे हालात थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया था, यही समस्या अखिलेश सरकार के साथ है…

अजय कुमार, लखनऊ

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद की जिस तरह से एक शादी समारोह से लौटते समय मौत के घाट उतारा गया वह शर्मनाक तो है ही इस तरह की वारदातें कई गंभीर सवाल खड़े करती है। खासकर तब तो और भी आश्चर्य होता है जब ऐसे हादसों के समय सियासतदार चुप्पी साध लेते हैं कथित धर्मनिरपेक्ष शक्तियां की जुबान पर ताला लग जाता है। उम्मीद तो यही की जा रही थी शहीद डीएसपी तंजील की मौत के बाद फिजाओं में तुम कितने तंजील मारोगे, घर-धर से तंजील निकलेगा’ का नारा गूंजेगा। यह तंजील को सच्ची श्रद्धांजलि होती, लेकिन नारा लगाना तो दूर चंद लोगों के अलावा तंजील के घर जाकर उनके परिवार के आंसू तक पोछना किसी ने जरूरी नहीं समझा। तंजील की हत्या आतंकवादी साजिश थी या फिर कोई और वजह, इसका खुलासा देर-सबेर हो ही जायेगा। 

यूपी में हेल्पलाइन नहीं, हेल्पलाइफ चाहिए, माफिया को असहमति के स्वर अब बर्दाश्त नहीं

सच बोलता पत्रकार असहिष्णुता का सबसे बड़ा शिकार

वाराणसी। देश में सहिष्णुता और असहिष्णुता को लेकर खूब घमासान मचा। इस मुद्दे को लेकर फिल्मी हस्तियों सहित धर्माचार्यों ने भी खूब सुर्खियां बटोरी। स्थिति यह हुई कि संसद में भी जमकर हंगामा हुआ। अभिनेता आमिर खान ने तो यहां तक कह डाला कि उनकी पत्नी को देश में डर लगता है। उनके बयान के बाद मानो भूचाल आ गया। हर खास-ओ-आम खुद को असहिष्णुता का शिकार बताने लगा। कुछ समय के लिए लगा पूरा देश ही  असहिष्णुता की आग में झुलस गया हो। लेकिन समय के साथ यह शब्द धीरे-धीरे ठंडा होने लगा। सच कहे तो इस देश में असहिष्णुता का सबसे बड़ा शिकार वह पत्रकार है जो बेबाक बोलता है, सही-गलत को अपने विवेक की तराजू में तौलता है।

यूपी में जंगलराज : अमेठी में यौन उत्पीड़न की शिकार महिला के परिजनों को मिल रही धमकियां

लखनऊ : कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी स्थित मुंशीगंज थाने में 30 जनवरी को यौन हमले की कोशिश का एक मुकदमा धारा 354, 7, 8 के तहत दर्ज कराया गया है। पीड़ित पक्ष शाहगढ़ ब्लॉक स्थित एक गाँव का है। जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, उनके नाम हैं नीरज व हरीश, मौजी का पुरवा और मुंशीगंज स्थित कटरा निवासी मनीश। बिल्कुल शरू में ही आरोपियों से संबंध रखने वाले दबंगों ने पूरी कोशिश की कि मामला थाने में ही दर्ज न होने पाये और इसके लिए थानेदार को बाकायदा विश्वास में लिया गया। इसी कड़ी में पीड़िता के घर जाकर दंबंगों ने शपथ-पत्र व दूसरे कागजात पर हस्ताक्षर करवाए और परिजनों को अपमानित किया।

यूपी में पत्रकारों के लिए हेल्पलाइन अखिलेश सरकार का एक बड़ा छलावा

सुप्रभात यशवंत जी

आपसे टेलीफ़ोन पर हुई वार्ता के सन्दर्भ में पूरी बात लिखकर यहां बताना चाहूंगा आपको कि उत्तर प्रदेश द्वारा शुरू की गयी हेल्पलाइन यदि केवल राजपत्रित (accredit) पत्रकारों के लिए है तो इसका कोई मतलब नहीं है। जागरण, अमर उजाला जैसे बड़े संस्थानों में भी 5% से कम ही राजपत्रित पत्रकार है। बाकी 95% पत्रकार और गैर पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारियों का क्या मीडिया में कोई योगदान नहीं है? राजपत्रित पत्रकारों पर तो मीडिया मालिक और प्रशासन वैसे ही मेहरबान रहता है, उन्हें तो सामान्यता शिकायत की नौबत आती ही नहीं है।

पत्रकार जगेंद्र केस में आरोपी पुलिसकर्मी बरेली क्राइम ब्रांच पर कोर्ट में बयान का बना रहे हैं दबाव

बरेली : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह मर्डर केस में आरोपी पुलिसकर्मी बरेली क्राइम ब्रांच पर जबरन दो गवाहों के कोर्ट में बयान कराने का दबाव बना रहे हैं। इन गवाहों के बयान के जरिए वह खुद को केस से बचाना चाहते हैं, लेकिन बरेली के पुलिस अधिकारियों ने आईओ को बिना किसी दवाब के सही जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

वीमन हेल्पलाइन के बड़े दरोगा नवनीत सिकेरा को पत्रकार कुमार सौवीर ने दिखाया आइना

Kumar Sauvir : 1090 यानी वीमन हेल्प लाइन के बड़े दरोगा हैं नवनीत सिकेरा। अपराध और शोहदागिरी की राजधानी बनते जा रहे लखनऊ में परसो अपना जीवन फांसी के फंदे पर लटका चुकी बलरामपुर की बीडीएस छात्रा की मौत पर सिकेरा ने एक प्रेस-विज्ञप्ति अपनी वाल पर चस्पा किया है। सिकेरा ने निरमा से धुले अपने शब्द उड़ेलते हुए उस हादसे से अपना पल्लू झाड़ने की पूरी कवायद की है। लेकिन ऐसा करते हुए सिकेरा ने भले ही खुद को पाक-साफ़ करार दे दिया हो, लेकिन इस पूरे दर्दनाक हादसे की कालिख को प्रदेश सरकार और पूरे पुलिस विभाग के चेहरे पर पोत दिया है।

यूपी में ‘समाजवादी’ जंगलराज : लखनऊ में छेड़खानी से परेशान एक मेडिकल छात्रा ने फांसी लगाकर जान दी

बधाई हो सरकार में बैठे समाजवादियों और तुम्हारे कारकूनों! तुम्हारे अटूट प्रयास आज फलीभूत हुए और नतीजा यह हुआ कि बीती रात एक मेडिकल छात्रा ने राजधानी के गुडम्बा कालोनी में अपने कमरे में पंखे से लटक  कर खुद को मौत हवाले कर दिया। बधाई हो। ताज़ा खबर है कि लखनऊ के एक डेंटल मेडिकल छात्रा ने छेड़खानी से त्रस्त होकर फांसी लगा ली। पिछले कई महीने से मोहल्ले से लेकर कॉलेज आसपास शोहदों ने उसका जीना हराम कर रखा था। मानसिक तनाव इतना बढ़ने लगा कि उसे खुद की जिंदगी ही अभिशाप लगाने लगी। उसे लगा कि उसका स्त्री-देह ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन है। बस फिर क्या था। इस बच्ची ने उस कलंक-अभिशाप को ही हमेशा-हमेशा के लिए धो डाला।

यूपी सरकार ने मीडिया वालों के लिए जारी किया टोल फ्री नंबर, इस पर करें मजीठिया वेज बोर्ड न मिलने की शिकायत

यूपी में अखिलेश सरकार ने मीडिया वालों को टोल फ्री हेल्पालइन का लालीपाप फेंका है. यह हेल्पलाइन कितना कारगर है, इसका टेस्ट सिर्फ एक प्वाइंट पर मीडिया वाले कर सकते हैं. जिन जिन को मजीठिया वेज बोर्ड न मिला हो वे इस टोल फ्री नंबर पर कंप्लेन करें. देखें कि क्या अखिलेश यादव मीडिया मालिकों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से नया पुराना सेलरी एरियर हिसाब दिला पाते हैं. पक्का मानिए, अखिलेश सरकार मीडिया को लेकर सिर्फ दिखावा कर रही है. अगर वह सीरियस है तो टोल फ्री नंबर देने से पहले प्रिंट मीडिया वालों को मजीठिया वेज बोर्ड लागू कराने का तोहफा दे चुकी होती. पर अराजक और जंगल राज चलाने वाली यूपी की समाजवादी सरकार इन दिनों नौकरशाहों के दिखावे वाले तामझाम में इतना मशगूल है कि वह बुनियादी काम भूल-छोड़ चुकी है.

ये यूपी है जनाब : 19 महीने बाद दर्ज हो सका पत्रकार उमेश शुक्ला के लापता होने का मुकदमा

(लापता पत्रकार उमेश शुक्ल)

वाराणसी । वाराणसी पुलिस विगत 19 महीनों से लापता एक पत्रकार को खोजना तो दूर, उनका सुराग तक नहीं लगा पाई। लापता पत्रकार की खोज के लिए लगातार बड़ा भाई दिनेश कार्यालयों और अधिकारियों के दरवाजे भटकता रहा लेकिन किसी ने कुछ नहीं सुना। दिनेश मुख्यमंत्री सहित गृह मंत्रालय को भी पत्र लिखते रहे लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। कुछ दिनों तक पत्रकार संगठनों ने दिलचस्पी दिखाई लेकिन अखबरों में संगठन का नाम छपने के बाद वह भी बैकफुट पर आ गए। लेकिन दिनेश ने हार नहीं माना और न्याय के लिए लड़ते रहे। दिनेश ने पुनः एसएसपी आकाश कुलहरि से गुहार लगाई। एसएसपी से आदेश मिलने के बाद सिगरा थाने ने आईपीसी की धारा 363 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। 

यूपी में जंगलराज : सूचना दिलाने के बजाय आयुक्त बिष्ट ने वादी को बेइज्जत कर नज़रबंद कराया

: राज्य सूचना आयोग के अफसरों की मनमर्जी बेलगाम, कार्यकर्ताओं में क्षोभ : लखनऊ : सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी छवि चमकाने और पार्टी की जड़ों को जमाने की लाख कोशिश कर लें, उनके अनेक बड़े सूबेदार सारा मटियामेट करने में जुटे हैं। ताजा मामला है राज्य के चर्चित सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह विष्ट का, जिन्होंने आज दोपहर एक सूचना कार्यकर्ता के साथ भरे दफ्तर गालियां दीं और अपने सुरक्षाकर्मियों को बुला कर उन्हें एक कमरे में बंद करा दिया। ताज़ा खबर मिलने तक तनवीर बिष्ट के कमरे में गैरकानूनी ढंग से नज़रबंद हैं और उन्हें किसी से भी मिलने से पाबंदी लगा दी गई है।

बलिया में सिपाही ने की अवैध वसूली की शिकायत तो एसपी ने किया सस्पेंड, आहत सिपाही ने दिया इस्तीफा (देखें वीडियो)

उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के नरही थाने के पिकेट पर हो रही अवैध वसूली की शिकायत करना एक सिपाही को महंगा पड़ गया. एसपी ने शिकायत करने वाले सिपाही को ही सस्पेंड कर दिया. इससे आहत निलम्बित सिपाही ने पुलिस हेड क्वार्टर इलाहाबाद को अपना त्याग पत्र भेज दिया है. उसने जान-माल की सुरक्षा की गुहार भी की है.

आज़म खान, रामपुर की पुलिस और दोगला चरित्र

Kanwal Bharti : कल रामपुर पुलिस ने फेसबुक पर आज़म खान के खिलाफ लिखने वाले किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। खबर है कि उसने आज़म और उसके परिवार पर कोई टिप्पणी की थी। किन्तु रामपुर पुलिस दोगली चरित्र की है।