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एचटी ग्रुप का एचआर डायरेक्टर मजीठिया वेज बोर्ड मामले में डीएलसी के सामने ये क्या बोल गया!

दिनांक 21 अगस्त को मजीठिया वेज लागू करने के सवाल पर बिहार में दो जगहों सुनवाई हुई। फार्म सी के साथ दिए गए क्लेम पर सुनवाई राज्य सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी अमरेन्द्र मिश्र ने की। फरवरी में दिए गए आवेदन पर सुनवाई की शुरुआत करने में 5 महीने लग गये। सुप्रीम कोर्ट की मोनेटरिन्ग होने के बाद भी गति नौ दिन चले ढाई कोस की तरह धीमी रही। दूसरा मजीठिया मामलों मे कंप्लेन केस, गलत बयानी और दमनात्मक कार्रवाई पर डीएलसी पटना के यहां सुनवाई थी। दोनों जगहों पर एचटी के एचआर डायरेक्टर राकेश गौतम खुद उपस्थित हुए और बेहूदगी व मूर्खता की सारी सीमा लांघ दी।

दिनांक 21 अगस्त को मजीठिया वेज लागू करने के सवाल पर बिहार में दो जगहों सुनवाई हुई। फार्म सी के साथ दिए गए क्लेम पर सुनवाई राज्य सरकार के डिप्टी सेक्रेटरी अमरेन्द्र मिश्र ने की। फरवरी में दिए गए आवेदन पर सुनवाई की शुरुआत करने में 5 महीने लग गये। सुप्रीम कोर्ट की मोनेटरिन्ग होने के बाद भी गति नौ दिन चले ढाई कोस की तरह धीमी रही। दूसरा मजीठिया मामलों मे कंप्लेन केस, गलत बयानी और दमनात्मक कार्रवाई पर डीएलसी पटना के यहां सुनवाई थी। दोनों जगहों पर एचटी के एचआर डायरेक्टर राकेश गौतम खुद उपस्थित हुए और बेहूदगी व मूर्खता की सारी सीमा लांघ दी।

एचटी की ओर से हर समय यह कहा जाता रहा कि जवाब देने के लिए समय चाहिए। राकेश गौतम ने खुद जब उपस्थित हुए तो बोले- ”कैसा जवाब? किस कानून के तहत आप (डीएलसी) जवाब मांग रहे हैं? किस कानून के तहत वर्कर्स की ओर से वकील रखे गए हैं?”

राकेश गौतम की ओर से हो रही बेहूदगी के चलते डीएलसी ने कहा कि आप पूरी कानूनी प्रक्रिया पर सवाल कैसे उठा सकते हैं? डीएलसी ने कहा कि आगे से आप ले-मैन की तरह नहीं बल्कि अपने वकील के साथ आएं।

एचआर डायरेक्टर देश की समस्त कानूनी प्रक्रिया को चुनौती देता रहा। वकील रखने का अधिकार मैनेजमेंट को है, कामगार या पत्रकार को नहीं, ऐसा जताता रहा। यूनियन पर सवाल उठाता रहा। कामगार के वकील और ग्रुप के ऑथराइजेशन पर सवाल उठाता रहा। वो बोलता रहा- ‘वकील किस कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं, इसका जवाब चाहिए।’

उसकी मंशा महज इतना जरूर दिख रही थी कि उसे कोई एक आदेश चाहिए था जिस पर वह कोर्ट का स्टे आर्डर लगा सके। कुछ दलाल कोर्ट से काले पैसे की जोड़ पर स्टे आर्डर ला देने का ठेका जो ले रखे हैं।

राकेश गौतम हिन्दुस्तान के संपादक शशि शेखर सहित पूरे लाव लश्कर के साथ 20 अगस्त को ही आ गये थे। पैसा और पैरवी का नंगा नाच रविवार की रात से चलता रहा। पिछले सप्ताह एचटी ग्रुप के सीईओ राजीव वर्मा और संपादक शशि शेखर आदि पटना आकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर श्रम विभाग के ईमानदार अधिकारियों को हटाने का गुहार लगाकर गए थे। सुनते हैं प्रेस में दलाली करने वाले एक खास एजेंट पत्रकार के जरिए पैसे का जमकर वितरण हुआ। वह पैसा जगह पर पहुंचा या नहीं, यह अलग बात है क्योंकि यह एजेंट मिथिला का नामी चोर है।

कल मिलाकर राकेश गौतम संस्थान की नाक पटना से कटा कर गये ही, साथ ही यह बता गए कि अयोग्य प्रबंधन किस तरह लूट मचाकर संस्थान को दिवालिया करने पर उतारू है। अब अगली सुनवाई 4 सितम्बर को श्रम विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी के यहां तथा 9 सितम्बर को डीएलसी के यहां होगी।

पटना से दिनेश सिंह की रिपोर्ट.

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