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देह बाँटने वालियों को परेशान न करे पुलिस, मुख्यालय से जारी हुआ आदेश

भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय की महिला सुरक्षा शाखा ने प्रदेश भर की पुलिस इकाइयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के तहत की जा रही कार्रवाई में सेक्स वर्क में शामिल महिलाओं को अपराधी की तरह पेश न किया जाए।

पुलिस मुख्यालय द्वारा 3 अप्रैल 2025 को जारी आदेश में कहा गया है कि यदि कोई महिला स्वेच्छा से यह कार्य कर रही है, तो उसे केवल वेश्यावृत्ति के आधार पर गिरफ्तार या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता।

यह निर्देश माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (क्रिमिनल अपील क्रमांक 135/2010) के आलोक में दिया गया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि सेक्स वर्क को यदि कोई वयस्क महिला अपनी मर्जी से कर रही है तो वह अपराध नहीं माना जा सकता।

आदेश में यह भी कहा गया है कि सेक्स वर्क से जुड़ी महिलाओं को पीड़ित माना जाए, न कि आरोपी। पुलिस को ऐसे मामलों में मानवाधिकार और गरिमा का पूर्ण ध्यान रखने को कहा गया है।

पुलिस मुख्यालय के इस आदेश को प्रदेश के सभी जिलों और रेल पुलिस इकाइयों को भेजा गया है, ताकि कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके और बेगुनाह महिलाओं के साथ अन्याय न हो।


प्रबुद्ध सौरभ- ये नई बात नहीं है। अपने कानून में शुरू से ही sex with consent या sex for money कोई अपराध नहीं है। इस काम को एक organized business के रूप में चलाना ही अपराध है। भारत में लोगों की आम धारणा इसके उलट है लेकिन कानून में ऐसा ही है। ऐसी ही एक आम धारणा Thailand को ले कर है। वहाँ sex work legal है लेकिन सड़क पर ग्राहक जुटाना illegal है। जबकि practical स्थिति कुछ और कहती है। इसलिए prostitution का illegal होना या legal होना ‘हाँ’ या ‘ना’ जैसे सीधे जवाबों के मुक़ाबले बहुत जटिल है।

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