गोरखपुर | राष्ट्रीय सहारा में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। लंबे समय से चल रहे आपसी विवाद के बाद अंततः उच्च प्रबंधन द्वारा करायी गयी जांच के बाद वहां के स्थानीय संपादक दीप्त भानू डे को जहां लंबी छुट्टी (फोर्स लीव) पर भेज दिया गया, वहीं डेस्क इंचार्ज भूत भावन मिश्र और वरिष्ठ रिपोर्टर बीनू मिश्रा को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा ब्यूरो चीफ रमेश शुक्ला को चेतावनी दिया गया है।
मामला गोरखपुर में लंबे समय से चल रहे संपादक और ब्यूरो चीफ के बीच एक दूसरे के खिलाफ लगाये गंभीर आरोपों को लेकर शुरू हुआ था। ब्यूरोचीफ रमेश शुक्ला और संपादक दीप्त भानु डे के बीच वर्चस्व को लेकर कई बार कार्यालय में हंगामा हो चुका था। एक बार तो मारपीट की नौबत आ गयी थी, जो किसी तरह शान्त हुई।
पूरा विवाद क्या है?
संपादक और ब्यूरो चीफ के बीच तनाव तब शुरू हुआ जब ब्यूरोचीफ से संपादक बने दीप्त भानू डे संपादक के चैम्बर के अलावा ब्यूरोचीफ के लिए बने क्यास्क को भी अपने लिए आरक्षित रखे थे। रिपोर्टर से पदोन्नति पाकर ब्यूरोचीफ बने रमेश शुक्ला क्यास्क में बैठने के लिए संपादक से अनुरोध कर रहे थे, लेकिन संपादक बैठने नहीं दे रहे थे।
जब कई माह बीत गया और ब्यूरोचीफ रमेश शुक्ला क्यास्क में नहीं बैठ पाये तो उन्होंने प्रबंधक पीयूष बंका से इसकी शिकायत की। इस पर प्रबंधक ने दिल्ली में मीडिया हेड से मामले की जांच का अनुरोध किया। इस पर तत्कालीन सहारा समय टीवी के यूपी हेड रमेश अवस्थी को गोरखपुर भेजा गया।
रमेश अवस्थी ने धमकाते हुए संपादक को मनमानी न करने की चेतवनी देकर ब्यूरोचीफ को क्यास्क में बैठाया। तभी से संपादक व ब्यूरोचीफ के बीच शुरू हुआ कार्यालयी तनाव लगातार बना रहा।
हाल ही में स्थिति यह बनी कि ब्यूरो चीफ की तरफ से प्रबंधन पीयूष बंका और संपादक की तरफ से मीडिया हेड से शिकायत हुई। इस पर मामले की जांच कराई और जांच के बाद मंगलवार को वहां के स्थानीय संपादक दीप्त भानु डे को जहां फोर्स लीव पर भेज दिया, वहीं ब्यूरो चीफ को कड़ी चेतावनी दी गई। साथ ही वरिष्ठ रिपोर्टर बीनू मिश्रा और डेस्क इंचार्ज भूत भावन मिश्रा को निलंबित किया गया है।
क्राइम रिपोर्टर कमलेश सिंह समेत कई अन्य रिपोर्टरों को भी उनके बीट से हटाकर दूसरे बीट पर भेज दिया गया। इसके बाद से राष्ट्रीय सहारा के गोरखपुर कार्यालय में हड़कंप मचा हुआ है।
इस मामले को लेकर संपादक दीप्त भानु डे, प्रबंधक पीयूष बंका और तत्कालीन यूपी हेड (अब कानपुर से लोकसभा सांसद) रमेश अवस्थी ने भड़ास4मीडिया से क्या कुछ कहा? नीचे पढ़ें…
दीप्त भानु डे- मैनेजमेंट का फैसला है। मैनेजमेंट ने ही नौकरी पर रखा और अब उसी की तरफ से फैसला भी लिया गया है। जो आदेश है मान्य है।
पीयूष बंका- हां, ये 2024 के आस-पास का मामला है। कुछ इंटरनल शिकायतें थीं। जिन्हें लेकर जांच हुई और जो कुछ पाया गया था, उसी अनुसार कार्रवाई की गई थी। कुल मिलाकर उन्होंने कहा, जांच में आरोप सत्य पाए गये।
रमेश अवस्थी- अब वो सब याद नहीं। पूरी तरह से राजनीति में हूं। तब नौकरी पर था तो उसकी बात होती थी लेकिन अब उससे पूरी तरह निकल चुका हूं। और बीती बातें करने का फायदा क्या है। बाकी आपके यहां चाय पीने आऊंगा किसी दिन।


