राष्ट्रीय सहारा पटना में तब हंगामा शुरू हो गया जब स्थानीय संपादक रहे रमाकांत प्रसाद चंदन ने नए स्थानीय संपादक बने संजय त्रिपाठी के लिए चेंबर छोड़ने से मना कर दिया। स्थानीय एचआर हेड के बार-बार कहने के बाद भी जब स्थानीय संपादक ने चेंबर नहीं खाली किया तो दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पंचायत हुई। तब जाकर बमुश्किल स्थानीय संपादक रहे रमाकांत प्रसाद चंदन ने चैंबर खाली किया।
इस बीच राष्ट्रीय सहारा पटना के डिप्टी संपादक किशोर केशव ने वरिष्ठता के आधार पर उन्हें स्थानीय संपादक न बनाए जाने से क्षुब्ध होकर गुरुवार को त्यागपत्र देकर घर चले गए।
राष्ट्रीय सहारा पटना के स्थानीय संपादक रमाकांत प्रसाद चंदन को रिटायरमेंट के बाद एक्सटेंशन मिला था। दुबारा एक्सटेंशन का इंतजार था। पर प्रबंधन ने उनका एक्सटेंशन होल्ड कर दिया। चंदन को उम्मीद थी कि उनका कार्यकाल एक बार फिर बढ़ जाएगा। पर चेयरमैन आफिस ने कुछ शिकायतों के कारण चंदन का एक्सटेंशन रिक्वेस्ट लेटर होल्ड पर डाल दिया। इसके बावजूद वह लगातार आफिस आते रहे और चैंबर खाली करने से मना कर दिया।
जब इसकी शिकायत दिल्ली की गयी तो दिल्ली से समूह संपादक मनोज तोमर और एच आर हेड ने भी उन्हे चेंबर खाली करने का निर्देश दिया। लेकिन वह नहीं माने और काफी जद्दोजहद के बाद भी चेंबर खाली नहीं किया तो गुरुवार को सहारा मीडिया के हेड उपेंद्र राय ने गाजीपुर स्थित अपने गांव से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समूह संपादक मनोज तोमर, दिल्ली के एच आर हेड, पटना के स्थानीय संपादक रहे रमाकांत प्रसाद चंदन और वर्तमान स्थानीय संपादक संजय त्रिपाठी को लाइन पर लिया।
उपेंद्र राय ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए रमाकांत प्रसाद चंदन को करीब आधा घंटा से ज्यादा समझाया तब जाकर वह किसी तरह से चेंबर छोड़ घर गये।
इस बीच डिप्टी संपादक रहे किशोर केशव ने इस पूरे प्रकरण से क्षुब्ध होकर त्यागपत्र दे दिया। वह यह कह कर घर चले गये कि इस कंपनी में इमानदारी से काम करने का कोई प्रतिफल नहीं मिला, यहां चापलूसों को ही प्रमोट किया जा रहा है।
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Saharabolega
January 9, 2022 at 11:54 am
प्रिय मित्रों, खबर के सही तथ्य के बारे में जानिए:
पहली बात, किशोर केशव ने इस पूरे प्रकरण के पहले इस्तीफा भेज दिया था। उनकी नौकरी बिल गेट्स फाउंडेशन में लगी है। कई लोगों से उनकी बात हुई है है। इसलिए यह कहना कि वे दुखी होकर छोड़े बिल्कुल गलत है। सहारा मैनेजमेंट ने पहली बार योग्य व्यक्ति को तरजीह दी है। खासकर पटना के बारे में। संजय त्रिपाठी ने दिल्ली से पत्रकारिता शुरू की है। और यहां पटना में साठ हजार से अधिक महिलाओं के गर्भाशय गलत तरीके से निकले जाने का मामला ब्रेक किया। देश के नंबर कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से पढ़ाई की है। 10 वर्ष संसद का कवर किया है। मैं दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया में हूं और मुझे मालूम है राष्ट्रीय सहारा के कई वरिष्ठ व्यक्ति जो आज सीईओ तक पहुंचे है संजय त्रिपाठी के जूनियर रह चुके है। सभी वरिष्ठों में इनका आदर है। सहाराश्रीजी भी इन्हेंजानते हैं। जब भी कंपनी का काम होता है कौन करता है सहारा मैनेजमेंट जनता है।
महत्वपूर्ण है कि पूर्व के संपादक रमाकांत चंदन को पहले ही तीन बार एक्सटेंशन मिल चुका है। 60 वर्ष होने के बाद इन्हें घर मे बैठना चाहिए था पर ये सहारा को अपनी निजी समझ रहे थे। श्री उपेंद्र राय जी ने इनपर खूब भरवा किया पर ये संस्थान व उपेंद्र राय दोनों के भरोसा तोड़ दिए थे। तीन बार इनके खिलाफ जांच गठित हुई पर झूठ के बल पर टीके रहे। अरे भाई, जा मैनेजमेंट ने कहा दिया कि आप रिटायरमेंट के बाद ओफ्फिक मत आइए तो फिर आफिस आकर क्यों भद्द पिटवाई। छिह…
Insaf
January 9, 2022 at 12:22 pm
Sahara management has taken valuable decision to not give forth time extension to Ramakant Chandan. So correct the fact. Ramakant has already got three time extension. Although three time extension is against the policy of Sahara.
Secondly, Kishore Keshav has resigned prior the Sanjay Tripathi incharge to RE. Infact Kishore Keshav has opened door to Sanjay Tripathi. It’s a fact. However once both Ramakant Chandan and Kishore Keshav were very junior to Sanjay Tripathy in cadre and designation. Ramakant hah defame the journalism from his behaviours.
ज्योति शर्मा
January 9, 2022 at 1:17 pm
पटना से दी गयी खबर बिल्कुल बेबुनियाद है। इस खबर का सच जाने बगैर इसे प्रकाशित करना भड़ास की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। ऐसा कुछ भी नही हुआ था। जैसा कि बताया जा रहा है। कोई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बातचीत नही की गई है। चंदन जी टर्म पूरा हो गया था। वह कई बार वरीय प्रबंधन को सूचना दे चुके थे। प्रबधन की ओर से उन्हें कहा गया था कि जब तक कोई व्यवस्था नही होती आप काम संभाले। चंदन जी,संजय त्रिपाठी जी प्रभार देकर छुट्टी पर गये है। अभी किसी का कोई पत्र नही आया है। मामला अटका है किन्ही कारणों से। केशव जी को भी यू ही बीच मे घसीटा गया है वे इन घटनाओं से पहले ही जा चुके थे। मेरा निवेदन भड़ास से जो कोई भी आपको खबर देता है कृपया उसकी जांच कर ले नही तो वो आपको भी ले डूबेगा।
ज्योति शर्मा
January 9, 2022 at 6:42 pm
इस खबर ने भड़ास की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर दिया है। जिस फिल्मी अंदाज में आपने चटखारे ले कर छापा है ऐसी कुछ घटना हुई ही नहीं। रमाकांत जी को जब पता चला कि उनके एक्सटेंशन को होल्ड किया गया है तो उन्होंने स्वयं सभी वरिष्ठ को जानकारी दी। प्रभारी ने मिठाई मंगाई और लगभग सभी वरिष्ठ उन्हें छोड़ने भी गए। किशोर जी का तो प्रकरण तो पहले का है। खैर ,ऐसे खबर भेजने वालो से सावधान रहें। आग्रह है अपनी विश्वसनीयता बनाए रखें।
Vijay Kumar
January 12, 2022 at 7:43 pm
संपादक पद की लड़ाई तो सुनने में ही अजीब लगता है लेकिन इसमें भी शब्दों की मर्यादा न रहे तो यह और बुरा लगता है। कोई भी साथ काम करने वाला व्यक्ति सीईओ बन जाता है या उच्च पद पर चला जाता है तो यह गिनाना कत्तई अच्छा नहीं लगता कि वह आपका जूनियर रह चुका। ऐसी मानसिकता वाली लड़ाई लड़कर कोई संपादक बन भी जाता है इससे अखबार का भला नहीं हो सकता। वरिष्ठों को निर्णय लेते समय इसका ध्यान रखना चाहिए।