‘व्यापमं’ उर्फ एक व्यापक ‘राष्ट्रवादी’ घोटाला… क्योंकि यहां घोटाले के साथ दनादन हत्याएं भी होती हैं!

Krishna Kant :  व्यापमं घोटाले की जांच से जुड़े मेडिकल कॉलेज के डीन भी निपट गए. पत्रकार अक्षय सिंह को कल निपटाया गया था. अब तक देश में जो घोटाले हुआ करते थे उनमें हत्याएं नहीं होती थीं इसलिए वे राष्ट्रवादी नहीं थे.. उनसे भारत की नाक कट रही थी. देश शर्मिंदा हो गया था. राष्ट्र की सोच बड़ी हो इसलिए घोटाला भी बड़ा होना चाहिए. दो चार आरोपियों वाले घोटाले शर्मिंदा कर देते हैं. इसलिए व्यापक तौर पर व्यापमं हुआ है. 2500 आरोपी. 500 फरार 55 केस. 45 हत्याएं. जनता को भी घोटाला सोटाला में टांग न अड़ाने के लिए सबक मिलना चाहिए. मजबूत भारत बनाना है, इसलिए रोज एक हत्या. इस तरह रोज एक प्राण की आहुति देने से घोटालों के देवता प्रसन्न होते हैं और राष्ट्र तरक्की करता है.

देश में अब तक कमबख्त कांग्रेसियों का शासन था. उन्होंने देश को बदनाम किया. उन्होंने न बाजारवाद ठीक से लागू किया, न ही घोटाला ठीक से किया. अडाणी की तरह कांग्रेस एक भी घोटाला नहीं कर सकी कि करोड़ों अरबों पार कर जाओ और लोग टापते रहें. घोटाला का खुला खेल ऐसा फर्रुखाबादी हो कि जिससे भी खतरा महसुसाए, निपटाते जाओ. मजबूत राष्ट्र बनाना था न? मजबूत राष्ट्र कैसे बनता है? ऐसे कि प्रधानसेवक नौटंकी करे करता जाए. आलोचना करने वालों को भक्तों की फौज गरियाती जाए. बेटी बचाने का नारा लगाती जाए. बेटियों को गलीज गालियों से नवाजती जाए. लुटेरों की फौज लूटती जाए. लोगों को निपटाती जाए. एक इंदिरा गांधी मजबूत थीं. उनकी मजबूती भी देश पर धब्बा साबित हुई. एक साहेब हैं. वे परधान सेवक बनने से पहले ही देश पर धब्बा साबित हो चुके थे. परंतु लोगों को अच्छे दिन चाहिए थे. गुजरात में 41 प्रतिशत बच्चे भुखमरी के शिकार हैं. लोगों को और अच्छे दिन चाहिए थे. अच्छे दिन आ गए. सेल्फी है. गालियां हैं. हत्याएं हैं, तालियां हैं. सेल्फी सम्राट को माइक मिल जाए तो अभी फेंक फेंक के उलाट देंगे, लेकिन हत्याओं पर ऐसे चुप्पी साधेंगे कि मनमोहन का मौन भी शर्मा जाए. भक्तों! बोलो- भारत माता की जय, वंदे मातरम, नमो व्यापमं.

Sandip Naik : जबलपुर मेडिकल कॉलेज के दूसरे डीन है डा अरुण शर्मा जिनकी रहस्यमय ढंग से अभी मृत्यु हुई. पहली मौत डा साकल्ले की हुई थी. अजीब देश और व्यवस्थाएं है जिस प्रदेश के लोग एक के बाद एक मर रहे हो वहाँ समूची न्यायपालिका, सुप्रीम कोर्ट, मानव अधिकार आयोग और प्रणव मुखर्जी जैसे विद्वान् राष्ट्रपति की चुप्पी आश्चर्यजनक नही लगती? और ऊपर से 45 मौतों के बाद मुख्यमंत्री बने रहना कैसे किसी लोकतांत्रिक पद पर बैठे सूबे के सरदार को अच्छा लगता है. मोदी इसलिए चुप है कि वे कांग्रेस द्वारा उठाये मुद्दे के बाद शिवराज को बर्खास्त नही कर रहें क्योकि इससे उनकी साख और अमित शाह की चौकड़ी की किरकिरी हो जायेगी, बिहार चुनावों के मद्देनजर वे इन हत्याओं को बर्दाश्त कर रहे है और मन मोहन से ज्यादा मजबूर है इस समय !!! वसुंधरा, शिवराज और रमनसिंह के दबाव में दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्त्र का 56 इंची सीने वाला प्रधानमन्त्री !!! मप्र में भाजपा के बाकी लोगों का जमीर मर गया है, और संघ चुप इसलिए कि सुरेश सोनी जी का नाम भी शामिल ही था, लिहाजा सबसे भली चुप. कैसा देश है, सारा सच सामने है पर कोई कार्यवाही नही. अभी भी आपमें देश भक्ति शेष है? कहाँ है भक्त?

पत्रकार द्वय कृष्ण कांत और संदीप नाईक के फेसबुक वॉल से.

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