अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा दिए गए बयान के बाद भारत की राजनीति और कारोबारी जगत में हलचल तेज हो गई है। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि प्रधानमंत्री Narendra Modi उन्हें खुश करने के लिए रूस से तेल की खरीद लगातार कम कर रहे हैं। इस बयान के ठीक अगले दिन देश की सबसे बड़ी निजी कंपनी Reliance Industries Limited ने एक आधिकारिक बयान जारी कर रूसी तेल को लेकर चल रही अटकलों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की एक रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल के ज़रिये कहा कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसी Bloomberg की वह रिपोर्ट पूरी तरह झूठी है, जिसमें दावा किया गया था कि रूसी तेल से लदे तीन जहाज़ रिलायंस के जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं। कंपनी के अनुसार, जामनगर रिफाइनरी को पिछले करीब तीन हफ्तों से किसी भी तरह का रूसी कच्चा तेल नहीं मिला है और जनवरी महीने में किसी भी रूसी तेल की डिलीवरी की कोई उम्मीद भी नहीं है।
रिलायंस ने अपने बयान में यह भी कहा कि कंपनी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जनवरी में रूसी तेल की कोई खरीद नहीं की जा रही है, इसके बावजूद इस तरह की रिपोर्ट प्रकाशित करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है बल्कि कंपनी की छवि को नुकसान पहुँचाने वाला भी है। कंपनी ने इसे निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
इस पूरे घटनाक्रम का असर शेयर बाजार पर भी साफ़ दिखाई दिया। रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयर में आज काफ़ी गिरावट देखने को मिली। बाजार जानकारों का मानना है कि ट्रंप के बयान, रूस-तेल को लेकर भू-राजनीतिक संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के कारण निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी, जिसका सीधा असर शेयर की कीमत पर पड़ा।
कुल मिलाकर, ट्रंप के बयान से शुरू हुआ यह मामला अब भारत-अमेरिका रिश्तों, रूस से ऊर्जा व्यापार और देश के सबसे बड़े कॉरपोरेट समूह की वैश्विक छवि तक जा पहुँचा है, जिस पर आने वाले दिनों में राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर और बहस तेज़ होने की संभावना है।


