यशवंत सिंह-
नीचे पुत्र आयुष का ये लेटेस्ट आर्टकिल है। दर्शन और मनोविज्ञान से पीजी कर चुके आयुष का पैशन आईटी फ़ील्ड है और कॉस्मोक्विक नामक एक हायरिंग कंपनी / स्टार्टअप के फाउंडर हैं। उनका मूल लिखा अंग्रेज़ी में है लेकिन मैंने एआई से हिंदी में करके पढ़ने समझने की कोशिश की। कुछ प्वाइंट्स दे रहा और फिर लास्ट में मूल अंग्रेजी आर्टकिल का लिंक देखें!

-धर्म जीवन के सबसे गहरे सवालों के उत्तर देता है, और शायद यही उसका ख़तरा है।
-सृजन के केवल कुछ ही रूप स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं। वान गॉग की पेंटिंग्स, आइंस्टीन की खोजें—ये मानवीय सृजनात्मकता की दुर्लभ अभिव्यक्तियाँ हैं।
-अज्ञात में टिके रहने की क्षमता, आराम की पूर्णता का विरोध.. ये उपजाऊ भूमि है जहाँ से वास्तविक सृजनात्मकता जन्म लेती है!
-कला वहीं से शुरू होती है जहाँ भाषा असफल हो जाती है।
-जब कोई सत्य खोजा नहीं जाता बल्कि विरासत में मिल जाता है, तो मन भटकना बंद कर देता है।
-नाचता हुआ तारा जन्म देने के लिए मनुष्य के भीतर अराजकता शेष होनी चाहिए।
-धर्म उन सभी सवालों के लिए एक पूर्व-निर्मित पैकेज प्रदान करता है जिन्हें हम कभी पूछेंगे: टाइम , मकसद, मृत्यु… आदि!
-दुनिया हमें तब विस्मित करना बंद कर देती है जब हमें पहले ही बता दिया गया होता है कि हर सवाल का जवाब क्या है।
-निश्चितता अन्वेषण की आवश्यकता को कम कर देती है। सृजनात्मकता के लिए संज्ञानात्मक खुलापन चाहिए—ऐसा मन जो कई संभावनाओं पर विचार कर सके, जो विरोधाभासों को जल्दबाज़ी में समेटे बिना थाम सके।
-निश्चितता में विश्राम करता मन खेलना खोजना छोड़ चुका मन होता है। उसने न जानने के सृजनशील तनाव को जान लेने के आराम से बदल दिया है।
-रचना करने वाले मन को कभी-कभी न जानने की स्वीकृति देनी ही पड़ती है।
Religion begins to interpret life before it is even lived. The world arrives already annotated. Death is no longer an abyss of mystery but a explained passage. Love is no longer strange and trembling but categorized within moral instruction. Suffering is no longer absurd and provocative but justified within a cosmic plan. Existence, which might have appeared as raw wonder, becomes a pre-deciphered script. One does not encounter reality as a poem to be felt, but as a textbook to be read. Experience becomes less a revelation and more a repetition of inherited meanings, and the freshness of awe slowly gives way to the dullness of familiarity.
बहुत अच्छे बिंदु उठाए हैं लेकिन संसार की कुछ सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों का संबंध धर्म से रहा है, जिनके उदाहरण यूरोपीय चित्रकला और मूर्तिकला से दिए जा सकते हैं। भारत की मूर्तिकला और भित्तिकला, तिब्बत की थांका कला धार्मिक ही है और इसका स्वरूप मुख्यतः शैव और बौद्ध रहा है। धर्म में बेचैनियां और अनिश्चितताएं भी जगह पाती रही हैं। निश्चितता कला की उड़ान को कम कर सकती है, लेकिन पूर्ण अनिश्चितता तो कला का क्राफ्ट ही नहीं बनने देती। इसीलिए धर्म में रहकर उससे बाहर झांक सकने वाले कलाकार मेरे ख्याल से सबसे यादगार रचते हैं।आनंदवर्धन और अभिनवगुप्त का अध्ययन या उनसे सामान्य परिचय आयुष की प्रस्थापनाओं को कुछ नए आयाम दे सकता है। -चन्द्रभूषण (वरिष्ठ पत्रकार)


