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टेलीग्राफ की लीड हेडिंग- ‘प्रधानमंत्री जी, पीएम केयर्स का नाम हू केयर्स कर दीजिए’

जब मजदूरों से किराया ही नहीं 50 रुपए अतिरिक्त लिया जा रहा है तो क्या पीएम केयर्स, हू केयर्स (किसे परवाह है) में बदल गया है? आप जानते हैं कि कोरोना पीड़ितों की सेवा के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पुराने प्रधानमंत्री राहत कोष के मुकाबले एक नया लगभग समानांतर पीएम केयर्स फंड बनाया है और इसमें लगभग जबरन, दबाव डाल कर और आयकर नियमों में छूट तथा सीएसआर नियमों में ढिलाई देकर धन बटोरा जा रहा है। वसूली हो रही है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में प्रधानमंत्री राहत कोष में 3800 करोड़ रुपए पड़े हुए थे। इसके बावजूद गरीब, लाचार, मंदी के शिकार, 40 दिन बंद रहे लोगों से किराया वसूला जाना चाहिए? वह भी तब जब कोरोना संक्रमित देशों से लाखों लोगों को विमानों में ढो-ढो कर लाया जा चुका है।

मैं नहीं जानता उनसे पैसे लिए गए कि नहीं पर कोरोना लाने के लिए पैसे लिए गए इसका मतलब यह नहीं है कि 40 दिन जबरन बंद रखे गए मजदूर से भी पैसे लिए जाएं पीएम केयर्स के बावजूद। अगर उनसे नहीं लिए गए थे तो इनसे लेने का कोई मतलब वैसे भी नहीं है। पर देश में यह हो रहा है और तब हो रहा है जब मजदूर कंक्रीट मिक्सर में चलने को मजबूर हैं और पीएम केयर्स में अरबों रुपए जमा हो चुके हैं। उसका कोई हिसाब नहीं है।

अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ ने आज अपनी लीड खबर इसी को बनाई है। शीर्षक है, धन का रहस्य और प्रवासियों का दुख। अखबार ने लिखा है कि कर्नाटक की भाजपा सरकार ने दूने बस किराए की घोषणा की। इसमें बस के खाली लौटने का खर्च भी जोड़ दिया गया। हालांकि शोर मचने पर इसे वापस ले लिया।

अखबार ने लिखा है कि सत्ता की भिन्न शाखाओं की आर्थिक बुद्धिमानी के इस दुर्लभ प्रदर्शन से यह सवाल खड़ा होता है कि मशहूर पीएम केयर्स फंड का क्या हुआ? अखबार ने लिखा है कि पूछने पर प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी ने फोन पर कहा कि कोई सूचना नहीं है। अखबार के अनुसार पीएम केयर्स के वेबसाइट पर धन के बारे में कोई सूचना है।

दिलचस्प है कि जब किराया नहीं लिया जाना चाहिए तब मजदूरों से 50 रुपए अतिरिक्त वसूलने वाले रेलवे ने पीएम केयर्स में 151 करोड़ रुपए दिए हैं। अखबार ने अखिलेश यादव के ट्वीट का भी जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है, अब तो भाजपा के आहत समर्थक भी ये सोच रहे हैं कि अगर समाज के सबसे ग़रीब तबके से भी घर भेजने के लिए सरकार को पैसे लेने थे तो PM Cares Fund में जो खरबों रुपया तमाम दबाव व भावनात्मक अपील करके डलवाया गया है उसका क्या होगा? अब तो आरोग्य सेतु एप से भी इस फंड में रुपए वसूलने की ख़बर है।

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