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मध्य प्रदेश

रीवा के वरिष्ठ पत्रकार पर छेड़छाड़ का आरोप!

पत्रकार पर लड़की ने लगाए प्रताड़ना के आरोप, बयान में बताई दर्द की दास्तान

रीवा के 45 वर्षीय पत्रकार पर युवती के साथ छेड़खानी और बदसलूकी का आरोप लगा है। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसके बाद पीड़िता मामले की शिकायत लेकर थाने पहुंची।

घटना के संबंध में पीड़िता ने बताया कि मैं मूल रूप से सीधी जिले की रहने वाली हूं। मैं रीवा में रहकर एक प्राइवेट नौकरी करती थी। जहां समान थाना क्षेत्र के एक मकान में किराए से रहती थी। मकान मालिक अनिरुद्ध तिवारी को मैं भाई की तरह सम्मान देती थी और उन्हें भैया कह कर ही संबोधित करती थी। अनिरुद्ध तिवारी के मकान पर ही एक उमेश तिवारी गुड्डू नाम का व्यक्ति भी रहता है, जो अक्सर खुद को वरिष्ठ पत्रकार बताता है। कुछ दिन तक सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था लेकिन धीरे-धीरे इन दोनों की हरकतें बदलने लगी।

विशेषकर उमेश तिवारी के लिए आते जाते समय मुझे गंदी नजर से देखना, जानबूझकर मुझसे टकरा जाना, सामने आने पर रास्ता रोक कर खड़े हो जाना, अश्लील तरह के इशारे करना,आंख मारना, सीटी बजाना, डबल मीनिंग बातें करना, गंदी गंदी टिप्पणियां करना रोज का काम हो गया था। लेकिन मानसिक रूप से परेशान होने के बाद भी मैं लगातार इग्नोर करती रही। घुट घुट कर जीती रही, डरी और सहमी हुई। कई बार विरोध करने की कोशिश भी की लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

हद तो तब हो गई, जब मुझे इस कदर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू किया जब हम कई बार घर के भीतर होते और वह गेट पर ताला बंद करके बाहर से चले जाता। बातचीत करने पर यह कहा जाता कि आप उमेश तिवारी गुड्डू से बात क्यों नहीं करती। मैंने स्पष्ट किया कि उनकी हरकतों को देखकर मैं उनसे बात नहीं करना चाहती तो कहा गया कि आपको उनसे बातचीत करनी ही पड़ेगी। नहीं तो इसी तरह से आपको परेशान होना पड़ेगा। कई बार मुझे परेशान करने के लिए गेट में दिन दहाड़े ताला बंद कर दिया गया ताकि मैं परेशान होकर उमेश तिवारी को फोन लगाऊं। जब मैंने विरोध करना चाहा मुझे धमकाने लगा और हथियार होने की बात बताने लगा। मुझसे कहने लगा कि ठिकाने लगा दी जाओगी। मैं एक अच्छे घर से ताल्लुक रखती हूं। मैं किसी पर फर्जी ब्लेम नहीं लगा सकती हूं। लेकिन जब थाने गई तो उसकी धौंस वहां देखने को मिली।

समान थाने में बड़ी मुश्किल से आवेदन लिया गया लेकिन फिर कथन ही दर्ज नहीं किए गए। मैं 2 घंटे तक थाने में न्याय पाने के लिए बैठी रही। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बाद में एक आरक्षक आंचल आकर कहने लगी कि आप समझौता कर लो, अच्छे घर की हो, बदनामी होगी। कार्रवाई करने की जगह समझौते का दबाव बनाया गया। लेकिन मुझे न्याय नहीं मिल पाया। मैं बहुत तनाव में हूं। डर की वजह से वहां से कमरा तक बदलना पड़ा। समझ नहीं आ रहा क्या करूं। उसे एक थाना प्रभारी का सहयोग मिल रहा है। जो अलग थाने में पदस्थ होते हुए भी पूरे मामले में लीपा पोती करने की कोशिश कर रहा है। मुझे जिले के एसपी पर भरोसा है कि वह मुझे जरूर न्याय दिलाएंगे। इसलिए मैं एसपी सहित मुख्यमंत्री मोहन यादव से गुहार लगाना चाहती हूं कि मुझे न्याय दिलाने का कष्ट करें।

पुलिस के मुताबिक मामले की पड़ताल लगातार जारी है। आगे आने वाले अग्रिम तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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