
जेपी सिंह-
ईडी द्वारा कुर्क सहारा समूह की एम्बी वैली सिटी के पास स्थित 707 एकड़ जमीन की 1460 करोड़ रुपये है कीमत
प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने लोनावाला के एंबी वैली सिटी और उसके आसपास की 707 एकड़ जमीन को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इसकी अनुमानित कीमत 1460 करोड़ रुपये की है।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को कहा कि उसने सहारा समूह के खिलाफ धनशोधन मामले की जांच के तहत महाराष्ट्र के लोनावाला में 707 एकड़ भूमि में फैली ‘एंबी वैली सिटी’ को कुर्क कर लिया है। जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि यह भूमि सहारा समूह की संस्थाओं से प्राप्त धनराशि से ‘बेनामी’ खरीदी गई थी। एजेंसी ने कहा कि कुर्क की गयी जमीन की बाजार में अनुमानित कीमत 1460 करोड़ रुपये है।

ईडी ने यह कार्रवाई पीएमएलए के तहत की है। ईडी की जांच में सामने आया है कि यह ज़मीन बेनामी नामों पर खरीदी गई थी और इसके लिए जो पैसे इस्तेमाल किए गए,जो सहारा समूह की विभिन्न कंपनियों से गबन करके निकाले गए थे।
ईडी ने इस मामले की जांच तीन अलग-अलग एफआईआर के आधार पर शुरू की थी, जो ओडिशा, बिहार और राजस्थान पुलिस द्वारा धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में दर्ज की गई थीं। अब तक 500 से ज़्यादा एफआईआर सहारा समूह और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज हो चुकी हैं। इनमें से 300 से अधिक मामले पीएमएलए के तहत दर्ज अपराधों से जुड़े हैं।
जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा समूह ने हजारों निवेशकों को गुमराह कर एक बड़ी पोन्ज़ी स्कीम चलाई। इन स्कीम्स के ज़रिए निवेशकों से भारी रकम जमा की गई और वादा किया गया था ऊंचे रिटर्न्स का, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया गया। बल्कि उन्हें जबरन दोबारा निवेश करने के लिए मजबूर किया गया।
ईडी का कहना है कि सहारा समूह ने जमाकर्ताओं की रकम को निजी खर्चों, बेनामी संपत्तियों और आलीशान जीवनशैली में खर्च किया। यह भी सामने आया है कि कई संपत्तियां नकद में बेची गईं और उन पैसों का कोई हिसाब-किताब नहीं रखा गया। अब तक की कार्रवाई में 2.98 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की जा चुकी है और कई एजेंट्स, कर्मचारियों और निवेशकों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं।
सूत्रों के अनुसार, ईडी की नजर अब सहारा समूह की अन्य संपत्तियों पर भी है जो देशभर में फैली हुई हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि इस मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जड़ें और भी गहरी हैं और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं।
पुणे जिले में सह्याद्रि पर्वतीय क्षेत्र में बसे इस आवासीय शहर को इसके निर्माताओं ने एक समय ‘‘भारत का पहला नियोजित पहाड़ी शहर’’ करार दिया था, जिसमें लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली जीवनशैली का अनुभव देने के लिए बड़े गोल्फ कोर्स, झीलें, विला, लकड़ी के बने छोटे घर या झोपडियां हैं।‘एंबी वैली सिटी’ मुंबई से लगभग 110 किमी और पुणे से लगभग 90 किमी दूर स्थित है।
ईडी ने एक बयान में कहा कि उसके कोलकाता कार्यालय द्वारा धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ‘एंबी वैली सिटी’ को कुर्क करने के लिए एक अनंतिम आदेश जारी किया गया है।इसमें कहा गया कि यह भूमि सहारा समूह की कंपनियों से प्राप्त धनराशि से ‘‘बेनामी’’ नामों से खरीदी गई थी।ईडी ने कहा कि सहारा इंडिया और उसकी समूह की कंपनियों के खिलाफ धनशोधन मामले की जांच के तहत लोनावाला (पुणे जिला) स्थित ‘एंबी वैली सिटी’ और उसके आसपास की कुल 707 एकड़ जमीन को कुर्क कर लिया गया है, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य 1460 करोड़ रुपये है।
ईडी ने विभिन्न राज्यों के पुलिस विभागों में दर्ज 500 से अधिक प्राथमिकियों के बाद धनशोधन का मामला दर्ज किया था।ईडी ने ओडिशा, बिहार और राजस्थान पुलिस द्वारा ‘हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड’ (एचआईसीसीएसएल) और अन्य के खिलाफ दर्ज तीन प्राथमिकियों के अलावा, सहारा समूह की कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज 500 से अधिक शिकायतों का विश्लेषण किया।ईडी ने कहा कि इनमें से 300 से अधिक प्राथमिकी पीएमएलए के तहत अपराधों के लिए दर्ज की गई थीं।
ईडी ने कहा कि सहारा समूह विभिन्न संस्थाओं जैसे ‘एचआईसीसीएसएल’, ‘सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड’ (एससीसीएसएल), ‘सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी’ (एसयूएमसीएस), ‘स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड’ (एसएमसीएसएल), ‘सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (एसआईसीसीएल), ‘सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (एसआईआरईसीएल), ‘सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (एसएचआईसीएल) और अन्य कंपनियों के जरिए पोंजी योजना चला रहा था।
ईडी ने कहा, ‘‘समूह ने निवेशकर्ताओं और एजेंट को क्रमश: पैसा जमा करने पर अधिक मुनाफा मिलने और ‘कमीशन’ का लालच देकर धोखा दिया। समूह ने जमाकर्ताओं की किसी भी जानकारी या नियंत्रण के बिना गैर-विनियमित तरीके से एकत्र धन का उपयोग किया।’’ईडी ने कहा, ‘‘समूह ने निवेशकर्ताओं और एजेंट को कोई भी राशि नहीं दी। इसके बजाय जमाकर्ताओं को उनकी परिपक्व हो चुकी राशि को पुनः जमा करने के लिए मजबूर किया तथा जमाराशि को एक योजना से दूसरी योजना तथा अन्य संस्था में स्थानांतरित कर दिया।’’
गैर-भुगतान को छिपाने के लिए, समूह ने बही खाता में हेराफेरी की, ताकि एक योजना में पुनर्भुगतान दिखाया जा सके, तथा पुनर्निवेश को किसी अन्य योजना में नए निवेश के रूप में दर्शाया जा सके।एजेंसी ने कहा कि समूह ने पोंजी योजना को जारी रखने के लिए परिपक्व हो चुकी राशि न चुकाए जाने के बावजूद इसमें नयी जमाएं स्वीकार करना जारी रखा।ईडी ने इस मामले में विभिन्न व्यक्तियों के बयान दर्ज किए हैं, जिसमें सहारा समूह के जमाकर्ता, एजेंट, कर्मचारी तथा अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल हैं।
इससे पहले मामले में की गई तलाशी के दौरान 2.09 करोड़ रुपये की ‘‘अस्पष्टीकृत’’ नकदी जब्त की गई थी।


