लखनऊ। सहारा मीडिया के कभी हेड रहे और बाद में सहारा इंडिया परिवार के सहायक निदेशक सुधीर कुमार श्रीवास्तव, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सतीश कुमार सिंह और एके श्रीवास्तव को कल यहां सहारा इंडिया टावर में एक सादे समारोह में विदाई दी गई। ये लोग रिटायरमेंट के बाद भी कंपनी को सेवा देने में जुटे हुए थे।
सहारा के कर्मचारी बताते हैं कि यह तीनों वरिष्ठ अधिकारी जहां भी जिस भी डिवीजन में तैनात रहे, ख़ुद का सिक्का चलाते रहे। इन सभी अधिकारियों की माली हैसियत ठीकठाक है। सहारा मीडिया के पूर्व में जीएम और हेड रहे सुधीर कुमार श्रीवास्तव की किसी जमाने में राष्ट्रीय सहारा अखबार में तूती बोलती थी। सहारा ग्रुप में किसी भी शहर में कहीं पर दौरा होने पर स्पेशल पुलिस फोर्स की व्यवस्था होती थी और परिवार में किसी का बर्थडे हो तो तत्कालीन यूपी राज्यपाल मोतीलाल बोरा को स्पेशल गेस्ट के रूप में बुलाया जाता था।
सुधीर कुमार श्रीवास्तव अपने बेटे के बर्थडे में कई बार तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा और कई अन्य को विशेष रूप से बुलवाते थे। इसी क्रम में एक रोचक प्रसंग आता है कि एक बार सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने अपने बेटे के बर्थडे के लिए एक होटल में विशेष आयोजन किया। इस बर्थडे कार्यक्रम में उन्होंने जहां राज्यपाल मोतीलाल बोरा को बुलाया, वहीं सहारा के चेयरमैन सुब्रत राय सहारा और सहारा के फाइनेंस के हेड ओपी श्रीवास्तव को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया। कार्यक्रम पूरे ताम-झाम के साथ शुरू हुआ। राज्यपाल मोतीलाल बोरा आए तो पूरे कार्यक्रम में सहारा मीडिया के हेड रहे सुधीर श्रीवास्तव राज्यपाल के साथ ही लगे रहे। सुधीर कुमार श्रीवास्तव उस समय यह भूल गए कि वर्तमान में उनके पास कंपनी के चेयरमैन सुब्रत राय भी उपस्थित हैं। सुब्रत राय को ऐसा महसूस हुआ कि सुधीर कुमार श्रीवास्तव उन्हें कम महत्व दे रहे हैं। कार्यक्रम समाप्त हुआ और उसके अगले दिन ही सुब्रत राय ने सहारा मीडिया के हेड सुधीर श्रीवास्तव को हटाकर स्वतंत्र मिश्रा को सहारा मीडिया का नया महाप्रबंधक बना दिया।
नया पौधा लगाकर उसे जमीन में जड़ पकड़ने देने से पहले ही हटाकर किनारे लगाने में माहिर सुब्रत राय के इस नए प्रयोग से कंपनी में हर कोई दंग रह गया। इसके बाद सुधीर श्रीवास्तव सुब्रत राय के भाई जयब्रत राय के इशारे पर काम करते रहे। जिसके कारण ओपी श्रीवास्तव और जयब्रत राय के आपसी द्वंद में सुधीर श्रीवास्तव फंसे रहे और कंपनी से भारी भरकम सेलरी और सारी सुख सुविधा लेते रहे।
कंपनी के दूसरे वरिष्ठ सतीश कुमार सिंह कंपनी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर रहे। 70 वर्षीय सतीश कुमार सिंह को अभी हाल के वर्षों तक करीब 14 से 15 लख रुपए प्रति माह की सेलरी व अन्य सुख सुविधाएं मिलती थीं। सुब्रत राय के मरने के बाद सतीश कुमार सिंह की सेलरी घटा कर ₹2 लाख प्रति माह और अन्य सुविधाएं कर दी गई थी। अब इन्हें पूर्ण रूप से घर बैठने के निर्देश दे दिए गए हैं।
कुछ ऐसा ही हाल सहारा इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एके श्रीवास्तव का भी है। एके श्रीवास्तव भी सुब्रत राय के जीवित रहने तक करीब 15 लाख सैलरी व अन्य सुख सुविधा पाते रहे। सुब्रत राय के मरने के बाद उनकी सेलरी भी घटाकर करीब दो लाख रुपए प्रति माह और अन्य सुख सुविधा कर दी गई थी।
75 वर्ष के करीब पहुंच चुके एके श्रीवास्तव की विशेषता यह रही कि जब वह बड़ी और महंगी गाड़ी से ऑफिस पहुंचते थे, तब ड्राइवर द्वारा गाड़ी का गेट खोलने के बाद भी वह तब तक गाड़ी से नीचे नहीं उतरते थे, जब तक की वहां आस-पास खड़े दो दर्जन से ज्यादा लोग गाड़ी के पास आकर उनका पैर नहीं छू लेते थे।
शुक्रवार को जब सहारा इंडिया टावर से इनको विदाई दी गई तो वहां उपस्थित सैकड़ो कर्मचारियों ने इन्हें गुड बाय कहा। यहां बताना जरूरी है कि सहारा में इस तरह से 70 साल के तमाम अधिकारी अभी भी बैठे हुए हैं।


