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सैल्यूट सत्येन्द्र मुरली

अरनब, सुधीर और रजत जैसे अपना जमीर और अरबों-खरबो का झूठ बेचकर भी जो नाम नही कमा सके उससे ज्यादा नाम तुमने अपनी हिम्मत से एक सच बयाँ करके कमा लिया। इतने बड़े नाम वाले पत्रकार…इतने बड़े नाम वाले मीडिया समूह… इतनी बड़ी बोली मे बिकने वाले न्यूज चैनल.. इतने बड़े वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इतना बड़ा झूठ कैसे दिखाते! अगर आप जैसे सच्चे और हिम्मत वाले ये हिम्मत न करते..ये सच बयाँ न करते तो झूठ के महल के नीचे दबा रहता सच का अमृत।

अरनब, सुधीर और रजत जैसे अपना जमीर और अरबों-खरबो का झूठ बेचकर भी जो नाम नही कमा सके उससे ज्यादा नाम तुमने अपनी हिम्मत से एक सच बयाँ करके कमा लिया। इतने बड़े नाम वाले पत्रकार…इतने बड़े नाम वाले मीडिया समूह… इतनी बड़ी बोली मे बिकने वाले न्यूज चैनल.. इतने बड़े वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इतना बड़ा झूठ कैसे दिखाते! अगर आप जैसे सच्चे और हिम्मत वाले ये हिम्मत न करते..ये सच बयाँ न करते तो झूठ के महल के नीचे दबा रहता सच का अमृत।

हर दौर हर जमाने में सरकारी भोंपू कहे जाने वाले दूरदर्शन का सरकारी दबाव में काम करना कोई नयी बात नहीं है। लेकिन नाम का असर कभी न कभी काम जरूर करता है। नरेंद्र मोदी के झूठ का सच बयाँ करने में सत्येन्द्र मुरली ने ना सिर्फ अपने नाम का असर दिखाया है बल्कि दूरदर्शन कर्मी होने के नाते उन्होने दूरदर्शन के लोगो ‘सत्मय जयते’ की लाज रख ली।

आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दूरदर्शन पर लाइव सन्देश चला कि आज के बाद पाँच सौ और एक हजार ने नोट चलन से बाहर हो जायेंगे।दरअसल नोटबंदी की घोषणा वाला ये संदेश सजीव नही बल्कि रिकार्डेड था। दूरदर्शन में कार्यरत पत्रकार सत्येंद्र मुरली ने पत्रकारों को पूरे विश्वास और सुबूतो के साथ बताया कि आठ नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दूरदर्शन पर नोटबंदी की जो घोषणा की थी वो सीधा प्रसारण नही था बल्कि इसे पहले ही रिकॉर्ड करके भेज जा चुका था। देश मे खलबली मचा देने वाली प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी की घोषणा वाली ये खबर देशभर के चैनलों ने दूरदर्शन लाइव के साथ चलायी थी।

दूरदर्शन मे बतौर पत्रकार काम करने वाले सत्येन्द्र मुरली ने बाकायदा नई दिल्ली स्थिति प्रेस क्लब आफ इन्डिया मे देश की मीडिया के सामने प्रधानमंत्री के झूठ की सच्चाई का खुलासा किया। उन्होने एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की जिसका मौजू था-  मैं बतौर दूरदर्शन समाचार में कार्यरत पत्रकार सत्येन्द्र मुरली जिम्मेदारीपूर्वक दावा कर रहा हूं कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश लाइव नहीं था, बल्कि पहले से रिकॉर्डेड और एडिट किया हुआ था दरअसल मोदी सरकार के फरेब के पीछे की सच्चाई ये है कि आठ नवम्बर शाम 6 बजे रिजर्व बैंक आप इन्डिया से प्रस्ताव मँगवा लेने के बाद महज दुनियाँ को दिखाने के लिये कैबिनेट की बैठक का दिखावा किया गया।

अस्ल बात ये है कि आरबीआई का प्रस्ताव और शाम सात बजे कैबिनेट की बैठक से कई दिनों पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिये राष्ट्र के नाम संदेश तैयार किया जा चुका था।

नवेद शिकोह
[email protected]
8090180256

मूल खबर….

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