समाजवादी राज का सच : मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट नवीन सचिवालय भवन में उडाई जा रही है श्रम कानूनों की धज्जियां

निर्माण मजदूरों की जिदंगी लगी है दांव पर निर्माण मजदूर मोर्चा की जांच टीम की रिपोर्ट

लखनऊ :  ‘अरे साहब आप डाक्टर की बात करते है यहां तो हालत यह है कि यदि कोई मजदूर मर जाए तो लाश का भी पता न चले ठेकेदार उसे अपना मजदूर मानने से ही इंकार कर दे‘ यह बातें शटरिंग का काम करने वाले बाराबंकी के एक निर्माण मजदूर ने आज उ0 प्र0 निर्माण मजदूर मोर्चा की जांच टीम से कहीं। जांच टीम उ0 प्र0 के मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट और विधानसभा के ठीक सामने बन रहे नवीन सचिवालय भवन में निर्माण मजदूरों की कार्यस्थितियों की जांच करने के लिए वहां गयी थी। इस टीम में यू0 पी0 वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर, निर्माण मजदूर मोर्चा के जिलाध्यक्ष बाबूराम कुशवाहा, जिला उपाध्यक्ष राम सुदंर निषाद और केश चंद मिश्रा शामिल थे। जांच टीम ने देखा कि उ0 प्र0 निर्माण निगम द्वारा बनवाए जा रहे नवीन सचिवालय में भवन व अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम 1996, उ0 प्र0 भवन एवं सन्निर्माण (नियोजन तथा सेवा शर्त विनियमन) नियम 2009 के प्रावधानों की खुलेआम धज्जियां उडाई जा रही है।

जांच टीम ने देखा इस निर्माणाधीन भवन में मिर्जापुर की अहरौरा धाटी से आए उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिन पत्थरों को पूर्ववर्ती मायावती की सरकार ने पार्को और स्मारकों में लगवाया था। इन पत्थरों की कटिंग, उन पर नक्काशी करने और उन्हें लगाने का काम राजस्थान के मजदूर कर रहे थे। इन पत्थरों की कटिंग और नक्काशी के काम में भारी धूल उड़ रही थी पर किसी भी मजदूर के पास मास्क नहीं था। पूछने पर राजस्थान के धौलपुर के रहने वाले मजदूरों ने जांच टीम को बताया कि गुड़ और मास्क नहीं दिया जाता। इस धूल के कारण कई मजदूरों के फेफड़े छलनी हो जाते है और उन्हें टीबी जैसी बीमारियां हो जाती है। टाइल्स और पत्थर कटिंग का काम करने वाले मजदूरों के लिए तीरपाल का शेड़ तक नहीं लगवाने के कारण मजदूरों को इस भीषण गर्मी में धूप में काम करना पड़ रहा था। उ0 प्र0 भवन एवं सन्निर्माण नियम 2009 की धारा 148, 149, 150 के अनुसार नियोक्ता की यह जिम्मेदारी है कि वह मजदूरों को सेफ्टी बेल्ट उपलब्ध कराए। उसे इस बात को सुनिश्चित करना होगा कि राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने वाले जाल सही ढंग से लगे हो। इतना ही नहीं सेफ्टी बेल्ट और जाल का सही उपयोग कराने के लिए लगातार निरीक्षण करने का भी नियम है। लेकिन जांच टीम ने पाया कि सबसे ऊपरी मंजिल पर काम कर रहे मजदूरों ने सेफ्टी बेल्ट नहीं लगाया हुआ था और बेहद अव्यवस्थित और फटे हुए जाल लगे हुए थे। जबकि दो माह पूर्व इसी बिल्डिंग में दो मजदूरों की गिरकर मौत हो चुकी है।

एसी की फीटिंग का काम कर रहे रायबरेली के मजदूरों ने जांच टीम को बताया कि उन्हें न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलती है। यह शिकायत तो शटरिंग से लेकर हर जगह काम करने वाले मजदूरों ने की। इस निर्माणाधीन भवन में मजदूरों से 12 घण्टे काम कराया जा रहा है जिसमें 8 घण्टे काम के 250 रूपए और शेष चार घण्टें काम का सिंगल ओवरटाइम के हिसाब से 125 रूपया ही मिलता है। जबकि उ0 प्र0 में अकुशल मजदूर की न्यूनतम मजदूरी 273 रू0, अद्र्वकुशल मजदूर की 300 रू0 और कुशल मजदूर की 336 रू0 है और उ0 प्र0 भवन एवं सन्निर्माण नियम 2009 की धारा 39 के तहत यदि मजदूर आठ घण्टे से ज्यादा काम करता है तो उसे मिल रही मजदूरी के दुगने की दर से भुगतान करना होगा। बोनस, ईपीएफ, वेतन किताब, रोजगार कार्ड तो किसी भी मजदूर को नहीं मिलता है। यहां तक कि टीम ने पाया कि कई मजदूरों का अभी भी कर्मकार कल्याण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।

उ0 प्र0 भवन एवं सन्निर्माण नियम 2009 की धारा 46 में मजदूरों की जानकारी के लिए इस नियम के तहत प्राप्त कल्याणकारी योजनाओं को हिन्दी में बोर्ड पर लिखकर निर्माणाधीन स्थल पर लगाने की व्यवस्था दी गयी है पर इस निर्माणाधीन भवन में कहीं भी बोर्ड नहीं लगा था। मजदूरों के लिए कानून और नियम के तहत बने कोई भी कल्याणकारी प्रावधान यहां लागू नहीं है। जांच टीम ने पाया कि मजदूरों के लिए साफ पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। मजदूरों ने बताया कि पानी के कुछ पाइप लगे है पर उनमें भी कभी-कभी तीन-तीन दिन तक पानी नहीं आता। वहां बने हुए शौचालय खराब पड़े हुए थे। प्राथमिक स्वास्थ सुविधा की कोई व्यवस्था नहीं थी। जबकि कानून के अनुसार ऐसे निर्माणस्थल पर बकायदा ऐम्बुलेंस और डाक्टरों की व्यवस्था रहनी चाहिए। मजदूरों के स्वास्थ्य के नियमित परीक्षण के बारें में पूछने पर मजदूरों ने बताया कि ऐसा कोई परीक्षण नहीं कराया जाता। कुछ मजदूरों के लिए जो अस्थायी आवास की व्यवस्था की गयी है उनकी हालत बेहद खराब है। श्रम विभाग ने घोषणा की थी कि यहां काम करने वाले मजदूरों को 10 रू0 में खाना उपलब्ध कराया जायेगा इसके बारें में मजदूरों ने बताया कि तीन दिन सस्ता खाना आया था पर अब नहीं आता।

एक तरफ अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर सरकार यह बताने में लगी है कि वह निर्माण मजदूरों के लिए बड़ी योजनाएं चला रही है वहीं उसके नाक के नीचे ठीक विधानसभा के सामने मजदूरों की जिदंगी दांव पर लगाकर काम कराया जा रहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर उ0 प्र0 निर्माण मजदूर मोर्चा उ0 प्र0 शासन को पत्रक देकर इस निर्माणाधीन भवन में कार्यरत निर्माण मजदूरों के कानूनी अधिकार को सुनिश्चित करने को कहेगा।

दिनकर कपूर
dinkar kapoor
प्रदेश अध्यक्ष
यू पी वर्कर्स फ्रंट  
dinkarjsm786@rediffmail.com

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