‘प्रयुक्ति’ अखबार का मालिक संम्पथ अपने कर्मियों और प्रिंटर का 60 लाख रुपये हजम कर गया!

Mukund Mitr 

सम्पथ कुमार सूरप्पगारि के झूठ दर झूठ… सम्पथ कुमार सूरप्पगारि याद आया कुछ… अपना कथन याद करो। नीयत में कचरा में है तो झोले में पत्थर। कर्मचारियों और प्रिंटर्स का मोटा पैसा करीब 60 लाख रुपये हजम कर गए हो। अनगिनत चेक बाउंस हो गए हैं। गरीब चपरासियों को खून के आंसू रुलाये हैं।

बाप की उम्र के लोगों को कई कई घंटे पैसे के लिए घंटों इंतजार कराया है और खुद केबिन में बैठकर फोन से चिपके रहे हो। और कहने को तो मुझे भी अपने चाचा और पिता की उम्र का कहकर इमोशनल ब्लैक मेल करते रहे हो।

अशोक प्रियदर्शी को भी अपने पिता समान कहते रहे हो। मगर नीयत में कचरा रहा है। नतीजा तुम्हारे सामने है। थाना कचहरी सब भुगत रहे हो। यह बात नीयत की ही है। 1300 रुपये लेकर घर से लेकर आये और आज करोड़ों से खेले। महज 6-7 सात साल में।

अब तो बता दो। किसका खजाना हाथ लग गया। तुमने भरी महफ़िल में शुक्रिया अदा कर कहा था कि आप लोगों की मेहनत से एक विदेशी निवेशक मिल गया है और वह कई करोड़ रुपये लगाने को तैयार हो गया है। यह कितना सच है खुद ही जानो। हम सबों ने कई रातें काली कर लिखा पढ़ा छापा और काम किया था। उसका ये सिला दिया। लिख दिया ताकि सनद रहे।

प्रयुक्ति का मालिक संपथ

आप इंटरनेट पर google लिखिए। इसके बाद prayukti को सर्च करें। रिजल्ट दिखेंगे। सबसे पहले epaper.prayukti.net दिखेगा। सम्पथ का झूठ आपको नज़र नहीं आएगा। मैं आपको बताता हूँ प्रयुक्ति अख़बार सिर्फ और सिर्फ दिल्ली से छपता रहा है। 18 सितम्बर 2018 से यह नहीं छप रहा। मगर ई पेपर में इसके दिल्ली, यू पी, हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई संस्करण दिखाये गए हैं।

अगर आप सभी के ई पेपर देखेंगे तो सब में एक ही अख़बार दिखेगा। तो यह रहा सम्पथ का पहला सोशल झूठ। अब इसका सबसे बड़ा झूठ देखिये। यह विकिपीडिया में है। प्रयुक्ति का मुख्यालय दिल्ली और हैदराबाद दिखाया गया है। मुझे आज तक हैदराबाद मुख्यालय की कोई जानकारी नहीं है। विकिपीडिया में प्रकाशन स्थल में लिखा है-यह समाचार पत्र उत्तर भारत और दक्षिण भारत से प्रकाशित होता है।

प्रयुक्ति के 2 संस्करण दिल्ली में, हैदराबाद में 1 संस्करण, उत्तर प्रदेश में एक संस्करण, हरियाणा में दो संस्करण और तेलंगाना में 10 संस्करण हैं। यह जानकारी सरासर झूठ है। प्रयुक्ति सिर्फ दिल्ली से छपता रहा है। और इसका सिर्फ 1 संस्करण ही रहा है। तो दोस्तो देखा आपने इसका फरेब।

प्रयुक्ति अखबार के संपादक रहे मुकुंद मित्र की एफबी वॉल से.

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One comment on “‘प्रयुक्ति’ अखबार का मालिक संम्पथ अपने कर्मियों और प्रिंटर का 60 लाख रुपये हजम कर गया!”

  • Pawan kripa shanker bhargav says:

    इसने मेरी भी सैलेरी नहीं दी थी ,यह फ्रॉड आदमी है सभी संभल कर रहे

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