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सुख-दुख

‘संचार साथी’ कभी एक साधारण ऐप था, सरकार ने इसे अब जासूस बना दिया है!

पुनीत शर्मा-

आपका अगला फोन भारत में एक सरकारी ऐप के साथ आएगा जिसे आप न हटा सकते हैं, न छिपा सकते हैं, न मना कर सकते हैं। अगर यह बात आपको चिंता में नहीं डालती, तो डालनी चाहिए।

टेलीकॉम विभाग ने सभी मोबाइल निर्माता और आयातकों को आदेश दिया है कि हर हैंडसेट में अनिवार्य रूप से सरकार का संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए।

सिर्फ नए फोन नहीं। जो फोन पहले से बाजार में हैं, उन पर भी यह ऐप सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए जबरन भेजा जा सकता है।

संचार साथी कभी एक साधारण ऐप था। चोरी हुए फोन की शिकायत, IMEI चेक और ब्लॉक करने का विकल्प देता था। लेकिन अब सरकार ने इसे आपकी निगरानी का जासूस बना दिया है। अब यह ऐप आपके फोन में होगा ही, चाहे आप चाहें या न चाहें।

भारत में पहले ही डिजिटल निगरानी के लिए कई चीज़ें मौजूद हैं। आधार, KYC, सरकारी सर्विलिएन्स कर अन्य तरीके मगर सरकार अब आपकी हर बात सुनना और पढ़ना चाहती है। आपके मोबाइल के भीतर की हर चीज़ को नियमित खंगालना चाहती है।

सरकार का डॉयरेक्शन साफ़ कहता है कि ये ऐप फ़ोन चालू करते ही पूरी तरह चालू होना चाहिए। इसे ना आपके द्वारा हटाया जा सकता है और ना ही इसकी आपके मोबाइल में पहुँच को सीमित किया जा सकता हौ।

मतलब न अनइंस्टॉल, न डिसेबल, न कोई और विकल्प

ये सारा काम IMEI फ्रॉड और साइबर खतरे की आड़ में किया जा रहा है। आज एक ऐप अनिवार्य है, कल दूसरा भी जोड़ दिया जाएगा। रास्ता खुल गया है।

मोबाइल निर्माता कंपनियों को चेतावनी दी गई है कि आदेश न मानने पर टेलीकॉम के नए कानूनों के तहत कार्रवाई होगी। उद्योग के पास सवाल पूछने की गुंजाइश नहीं है और उपभोक्ता के पास सहमति देने या न देने का अधिकार ही खत्म हो गया है।

और सबसे खतरनाक बात यह नहीं है। सबसे खतरनाक बात यह है कि आपको अब तक इस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। कोई चैनल इस पर चीख-चीख के बात नहीं कर रहा।

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