एनडीटीवी बैन के खिलाफ रवीश के इस ऐतिहासिक प्राइम टाइम को न देख पाएं हों तो अब जरूर देख लें

Om Thanvi : आज रवीश का प्राइम टाइम ‘सवाल पर सवाल है’ ऐतिहासिक था। उस रोज़ की तरह, जब उन्होंने स्क्रीन को स्वेछा से काला किया था, अभिव्यक्ति के संसार में पसरे अंधेरे को बयान करने के लिए। आज उन्होंने हवा में व्याप्त ज़हर के बहाने अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हो रहे प्रहार को दो मूकाभिनय के कलाकारों से ‘सम्वाद’ के ज़रिए चित्रित किया। बहुत मार्मिक ढंग से।

उन्होंने सरकार की तंगदिली को बेनक़ाब किया, सबसे भरोसेमंद चैनल को पठानकोट के नाम पर दी जा रही सज़ा और इस तरह की बदनामी की कुचेष्टा का जवाब दिया। मुझे लगा वे भावुक हो जाएँगे। पर भावना और दर्द पर क़ाबू रखते हुए वे मज़े वाले मूड में आ गए। ओछे शासन को हँसते-खेलते धो डाला। मुझे अब सरकार पर तरस आने लगा है। वह जूते भी खाती है और प्याज़ भी, पर विवेक से काम नहीं लेती। प्राइम टाइम न देख पाएं हो तो इस लिंक पर क्लिक करें : 

http://www.ndtv.com/video/shows/prime-time/prime-time-when-we-will-not-ask-the-questions-so-what-would-we-do-437481 

एक रोज़ पहले ही रामनाथ गोयनका एवार्ड देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हम इमरजेंसी की मीमांसा करते रहें, ताकि देश में कोई ऐसा नेता सामने न आए जो इमरजेंसी जैसा पाप करने की इच्छा भी मन में ला सके। और भोपाल की संदिग्ध मुठभेड़, दिल्ली में मुख्यमंत्री- उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस उपाध्यक्ष की बार-बार होने वाली हिरासतकारी को भूल जाइए, ताज़ा बुरी ख़बर यह है कि एनडीटीवी-इंडिया पर भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक रोज़ का प्रतिबंध घोषित किया है। मंत्रालय के आदेश के अनुसार उसकी एक उच्चस्तरीय समिति ने पठानकाट हमले के दौरान उक्त चैनल की रिपोर्टिंग को देश की सुरक्षा के लिए ख़तरे वाली क़रार दिया है। इसलिए सज़ा में चैनल को 9 नवम्बर को एक बजे से अगले रोज़ एक बजे तक चैनल का परदा सूना रखना होगा। क्या अघोषित इमरजेंसी की पदचाप और मुखर नहीं हो रही? 

मुझे आशंका है कि आने वाले दौर में यह और तल्ख़ होगी अगर इसका एकजुट और विरोध न किया गया। देश की सुरक्षा ख़तरे में डालने के संगीन आरोप में किसी समाचार माध्यम पर ऐसा प्रतिबंध देश में पहले कभी नहीं लगाया गया है। इसलिए मेरा सुझाव है कि 9 नवम्बर को, जब एनडीटीवी-इंडिया का परदा सरकारी आदेश में निष्क्रिय हो, देश के हर स्वतंत्रचेता चैनल और अख़बार को अपना परदा/पन्ना विरोध में काला छोड़ देना चाहिए। एडिटर्स गिल्ड, प्रेस क्लब आदि संस्थाओं को उस रोज़ प्रतिरोध के आयोजन करने चाहिए – अगर अपना लोकतंत्र हमें बचा के रखना हो। वरना शासन का शिकंजा एनडीटीवी की जगह आगे अभिव्यक्ति के किसी और माध्यम पर होगा।

Sanjaya Kumar Singh : रवीश का प्राइम टाइम कल देर रात फोन पर देखना पड़ा। इतनी चर्चा थी कि बिना देखे नीन्द नहीं आई। कंप्यूटर बंद कर चुका था और नीन्द लग भी रही थी। सोचा देखते हैं नीन्द जीतती या प्राइम टाइम। कहने की जरूरत नहीं है कि प्राइम टाइम देखकर सुकून की नीन्द आई। एक बजे सोया सुबह साढ़े सात बजे नीन्द खुली। मीडिया को प्रेस्टीट्यूट कहने वाले ना वेश्यावृत्ति ना रोक सकते हैं ना स्वीकार कर सकते हैं ना खुद पर नियंत्रण रख सकते हैं। लेकिन मीडिया पर प्रतिबंध लगाएंगे। मैं तो कहूंगा, कोशिश कर लीजिए। ओम थानवी से 100 प्रतिशत सहमत।

Satyanand Nirupam : ‘सवाल पर सवाल है’- का पुनः प्रसारण आज दिन में सुबह नौ बजे, दोपहर दो बजे और रात को नौ बजे होने वाला है।  सुबह दोपहर शाम- तीन खुराक प्राइम टाइम विथ Ravish Kumar! #ndtvइंडिया पर। आज तो बागों में बहार ही बहार है!!!

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी, संजय कुमार सिंह और सत्यानंद निरुपम की एफबी वॉल से. 

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Comments on “एनडीटीवी बैन के खिलाफ रवीश के इस ऐतिहासिक प्राइम टाइम को न देख पाएं हों तो अब जरूर देख लें

  • Om Thanvi ji, Sanjay ji, Nirupam ji, DUJ, Katju sahab aur na janey kitney… iss ek din ke ban par itna kyon Ro-dho rahey… Inka rona dekh ker to aisa lagta hai, ki iss desh mein ab “Rashtriyata” ka paimana badal gaya hai aur desh ke khilaf bolney, aisi sthiti paida kerney, taki desh ki janta ko gumrah kiya jaa sakey, uska daur chal padaa hai… Main aap sabon ke samaksh kuchh batein rakhna chata hoon, dhyan se padhein aur fir apney dil ki aawaz ki suney. Yadi thodi si bhi Desh ke liye (kuchh gaddar partiyon ke liye nahin) kuchh bachaa ho, to sochein aur tab NDTV ke Paksh me apni aawaz buland karein….
    Prannoy Roy aur Swayamsiddh Kumar Sahab se kuchh sawaal…
    Ek din ke Ban se hi “Asahishnu ho gaye….
    Tumney Ishrat ko Defend kiya…
    Tumney Batla ko Defend kiya…
    Tumney Chara Chor ko Defend kiya…
    Tumney JNU ko Defend kiya….
    Tumney “Akhlaak” ko Defend kiya….
    Tumney “Sena par Prashn” kiya…
    Itna sab par bhi humlog aur Sangheeya Sarkar chup rahi, par ab, jab….
    “Rashtriya Suraksha aur Desh ki Samprabhuta ka prashn hai, Chup rahna bhi to ‘Namardgi’ hi hogi na…. Isliye ekdiwasiya Ban ke karan kya hoga? Tumhara Wichar wa Abhivyakti ke naam par “Randi-Rona” badh jayega, kintu ussey hame kuch nahin karna… Haan, iss mulq (desh) ki janta ne sarkar ko chuna hai, uskey dwara liye gaye nirnay se hum sahmat hain, kyonki iss desh par hamara bhi utna hi adhikar hai, jitna tumsab samajhte ho… Apney neech Wichar ko poorey desh par thopney ki koshish na karo… Apney masley ko wichar wa abhivyakti se jodkar “randi-rona” machaney ke bajai apney “PURANEY EPISODE HI DEKH LO” aur Ek din ka kuchh “Poonya Kaam” hi kar lo….
    Jai Bharat

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