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जागरण ग्रुप के नई दुनिया अखबार से होगी दो लाख तीस हजार रुपये की वसूली, देखें आदेश की कॉपी

जानेमाने रंगकर्मी एवं साहित्यकार नीलाभ अश्क चुपचाप अपने घर से लापता हो गए हैं। अपने साथ वह घर के ढेर सारे जरूरी सामान लैपटॉप, कंप्यूटर, फोन सेट आदि भी उठा ले गए हैं। उनके जानने वालों का कहना है कि वह अपनी भूमिका द्विवेदी से डर कर कहीं जा छिपे हैं। उन्हें अपनी जान जाने का अंदेशा रहा है। उनकी पत्नी का शुरू से ही उनकी धन-संपत्ति पर निगाह रही है। बाकी सब सरोकार तो एक दिखावा भर रहा है। गुमशुदगी के संबंध में पुलिस को भी अवगत करा दिया गया है। पुलिस मामले की छानबीन के साथ ही नीलाभ अश्क को ढूंढने में भी जुट गई है। 

श्रम न्यायालय ने जारी किया आदेश, पत्रकारों में खुशी लेकिन मालिकों में मायूसी… जागरण ग्रुप के नई दुनिया अखबार के इंदौर आफिस में प्लांट पर कार्य करने वाले मनोहर यादव ने बकाया वेतन की राशि के लिए श्रम न्यायालय की शरण ली थी। इसी कारण नई दुनिया प्रबंधन ने उन्हें दो वर्ष पूर्व अवैध तरीके से रिटायर कर दिया था। इस दौरान मनोहर की मृत्यु हो गई तथा न्यायालय में केस विचाराधीन था।

पत्नी शकुन्तला यादव ने केस लड़ा और इसमें उन्हें विजय मिली। कोर्ट ने पिछले बकाया वेतन 30-5-15 से 24-1-2017 के बकाया वेतन की राशि 2, 30,000 देने के लिए श्रमायुक्त कार्यालय को निर्देशित किया, जिस पर श्रमायुक्त व्दारा वसूली प्रमाण पत्र जारी कर कलेक्टर को  शकुन्तला यादव को राशि दिलाने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि श्रम न्यायालय इंदौर में प्रकरण क्रमांक 102 / 2018/ आयडी में दिए आदेश 31.1.2018 के अनुसार उनके स्वत्वों की रकम रुपए 2, 30,000 प्रबंधक नई दुनिया समाचार पत्र, जागरण प्रकाशन लि. की इकाई इंदौर से प्राप्त करने की पात्र हैं।

प्रबंधक नई दुनिया समाचार पत्र, जागरण प्रकाशन लि. की इकाई इंदौर  ने उक्त रकम रुपए  2, 30,000 का भुगतान श्रीमती शकुन्तला यादव पत्नी स्व. श्री मनोहर यादव इंदौर को नहीं किया। इस संबंध में उन्हें कारण बताओ सूचना पत्र दिनांक 10.5.2018 (पंजीकृत डाक) द्वारा प्रेषित किया गया था, जो कि अनावेदक पक्ष द्वारा प्राप्त करने के उपरान्त भी कोई उत्तर नहीं दिया गया और ना ही परिपालन किया गया।

अतः आदेश जारी कर उक्त राशि वसूली के लिए कलेक्टर को निर्देश दिए हैं। जून में ऐसे ही करीब 7 निर्णय कर्मचारियों के पक्ष में हुए हैं और वसूली के लिए आदेश जारी हुए, लेकिन इस संबंध में श्रमायुक्त कार्यालय जानकारी देने से इनकार कर रहा है।

वसूली के आदेश जारी होने से पत्रकार और श्रमजीवी पत्रकारों में खुशी की लहर है। लाखों रुपए वकीलों की झोली में डालने के बावजूद अखबार प्रबंधन को कर्मचारियों को उसके हक की रकम देना पड़ रहा, इसके बावजूद अखबार मालिकों को अकल नहीं आ रही है।

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