Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

टीवी

एनडीटीवी ने अपने मैनेजिंग एडिटर श्रीनिवासन जैन की अमित शाह के बेटे पर की गई स्टोरी को हटा दिया!

एनडीटीवी और प्रणय राय की असलियत सामने आती जा रही है. ताजा मामला है अपने ही मैनेजिंग एडिटर श्रीनिवासन जैन की स्टोरी को हटा देना. एनडीटीवी के मैनेजिंग एटिडटर श्रीनिवासन जैन ने ट्विटर और फेसबुक पर लिखित में आरोप लगा है कि उनने और मानस प्रताप सिंह ने अमित शाह के बेटे जय शाह पर जो स्टोरी की थी, उसे एनडीटीवी ने अपनी वेबसाइट से हटा दिया है. श्रीनिवासन जैन ने अपने पोस्ट में लिखा है कि एनडीटीवी मैनेजमेंट ने उनसे कहा है कि वो रिपोर्ट ‘कानूनी जाँच’ के लिए हटायी गयी है. श्रीनिवासन जैन ने आगे कहा है कि वो इस मामले को ‘दुखद अपवाद’ मानकर अभी एनडीटीवी के संग काम जारी रखेंगे।

एनडीटीवी और प्रणय राय की असलियत सामने आती जा रही है. ताजा मामला है अपने ही मैनेजिंग एडिटर श्रीनिवासन जैन की स्टोरी को हटा देना. एनडीटीवी के मैनेजिंग एटिडटर श्रीनिवासन जैन ने ट्विटर और फेसबुक पर लिखित में आरोप लगा है कि उनने और मानस प्रताप सिंह ने अमित शाह के बेटे जय शाह पर जो स्टोरी की थी, उसे एनडीटीवी ने अपनी वेबसाइट से हटा दिया है. श्रीनिवासन जैन ने अपने पोस्ट में लिखा है कि एनडीटीवी मैनेजमेंट ने उनसे कहा है कि वो रिपोर्ट ‘कानूनी जाँच’ के लिए हटायी गयी है. श्रीनिवासन जैन ने आगे कहा है कि वो इस मामले को ‘दुखद अपवाद’ मानकर अभी एनडीटीवी के संग काम जारी रखेंगे।

एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर श्रीनिवासन जैन ने अमित शाह के बेटे जय शाह की कंपनी को दिए लोन पर एक स्टोरी की जिसे बाद में एनडीटीवी ने हटा दिया. तब श्रीनिवासन जैन ने लिखा- ‘एनडीटीवी के वकीलों ने कहा कि स्टोरी को कानूनी वजह से हटाना पड़ेगा. ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि रिपोर्ट पूरी तरह सार्वजनिक रूप से मौजूद तथ्यों पर आधारित है. इसमें किसी तरह का निराधार या अवांछित आरोप नहीं लगाया गया है. ऐसे हालत में पत्रकारों के लिए काम करना काफी मुश्किल है. अभी मैं इसे एक परेशानी भर मान रहा हूं. मैं फिलहाल एनडीटीवी पर पत्रकारिता जारी रखूँगा. ये बातें एनडीटीवी को भी बता दी है.’

उधर, श्रीनिवासन जैन की खबर हटाने को लेकर बरखा दत्त ने भी एनडीटीवी पर हमला किया है और कहा है कि एनडीटीवी में खबर हटाने का ऐसा धंधा होता रहा है. बरखा का कहना है कि उन्हें एनडीटीवी के अंदर खबरों को दबाने के खिलाफ बोलने के लिए सजा दी गयी. बरखा ने दावा किया कि वो बीजेपी और कांग्रेस दोनों से जुड़ी स्टोरियों के लिए मैनेजमेंट से लड़ी थीं. बरखा ने आरोप लगाया कि जहाँ एक तरफ एनडीटीवी अभिव्यक्ति की आजादी की बात करता है तो दूसरी तरफ वो बीजेपी से मदद भी मांगता है. बरखा ने कहा है कि उन्होंने खबरों को दबाने का विरोध किया और उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ी.

पूरे प्रकरण को समझने के लिए इन्हें भी पढ़ें…

xxx

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन