प्रणय रॉय-रवीश कुमार भी ‘रजनीगंधा’ खाकर चुप हैं!

Yashwant Singh : दल्ले-धंधेबाज चैनलों की तो छोड़िए, ndtv भी नहीं चलाएगा ये जनहित की बहुत बड़ी और ज़रूरी खबर, क्योंकि प्रणय रॉय-रवीश कुमार को भी रजनीगंधा पसंद है, भरपेट विज्ञापन जो देता है! कोई नहीं, भड़ास है न! खबर पढ़ने के लिए इस भड़ासी लिंक पर क्लिक करें- Saade Paan Masale mei bhi jahar …

काले धन के खेल में गले तक डूबे NDTV के मालिकों के खिलाफ CBI ने दर्ज किया नया केस, देखें FIR

प्रणय रॉय और राधिका रॉय समेत एनडीटीवी के सारे मालिकों व कई अनजान लोगों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज किया है. इस एफआईआर में एनडीटीवी के मालिकों पर काले धन के खेल में गले तक डूबे होने का आरोप है. इन लोगों ने दर्जनों फर्म/कंपनियां बनाकर अरबों रुपये का संदिग्ध लेन-देन किया. …

NDTV के मालिकों प्रणय रॉय और राधिका रॉय के देश छोड़ने पर रोक लगी

एनडीटीवी समूह के प्रति मोदी सरकार की तिरछी नजर के प्रमाण गाहे बगाहे सामने आ ही जाते हैं. नई खबर ये है कि प्रणय रॉय और राधिका रॉय को मुंबई एयरपोर्ट पर रोक लिया गया है. दोनों मुंबई से नैरोबी के लिए उड़ान भरने वाले थे. प्रणय एवं राधिका सीबीआई एवं प्रवर्तन निदेशलाय की जांच …

पत्रकार से पॉवर ब्रोकर बने डॉ प्रणय रॉय का पाखंड और एनडीटीवी का पतन – भाग (5)

पार्ट चार से आगे…. ऐसे में आप यह सोच रहे होंगे कि “प्रचार के औजार” में और शुद्ध तौर पर मीडिया संस्थान में क्या अंतर होता है? इसे समझने के लिए आपको आजतक और एनडीटीवी के बीच के अंतर को समझना होगा. आजतक शुद्ध तौर पर मीडिया संस्थान है. इसलिए वह अपने पत्रकारीय धर्म और …

पत्रकार से पॉवर ब्रोकर बने डॉ प्रणय रॉय का पाखंड और एनडीटीवी का पतन – भाग (4)

नियम अद्भुत होते हैं. नियमों को तोड़ना सरल नहीं होता. उनके विरुद्ध किसी काम के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए गुरुत्वाकर्षण बल को ही लीजिए. पृथ्वी की सीमा में आसमान से कोई चीज धरती पर ही गिरेगी. आइजक न्यूटन ने इसका एक फॉर्मूला भी बताया है. उस फॉर्मूले पर चर्चा …

प्रवर्तन निदेशालय ने हजारों करोड़ के घोटाले में फंसे एनडीटीवी को भेजा नोटिस

आगरा में शिक्षामित्रों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में हजारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष शिक्षामित्रों ने भाग लिया। शिक्षामित्रों के प्रदर्शन देखकर पुलिस और प्रशासन के होश उड़े हुए हैं. शिक्षामित्रों ने डायट से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक अर्धनग्न होकर पैदल मार्च किया। इन शिक्षामित्रों की मांग है कि उन्हें पूर्ण शिक्षक का दर्जा दिया जाए। उन्हें सरकार द्वारा 10000 का मानदेय स्वीकार नहीं है।

राफेल विमान सौदों पर हुई रिपोर्टिंग से नाराज अनिल अंबानी ने एनडीटीवी पर दस हजार करोड़ का मुकदमा ठोका

अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने एनडीटीवी पर 10 हजार करोड़ रुपये का मुकदमा ठोका है। राफेल विमान सौदों को लेकर एनडीटीवी की रिपोर्टिंग को लेकर यह मुकदमा अहमदाबाद की अदालत में किया गया है। इस मामले पर सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।

पत्रकार से पॉवर ब्रोकर बने डॉ प्रणय रॉय का पाखंड और एनडीटीवी का पतन – भाग (3)

पार्ट 2 से आगे… राधिका रॉय और चैनल के मालिकों का तरीका जितना ओछा था, दिबांग का जवाब उतना ही संतुलित था. उन्होंने शब्दों का चयन बहुत सोच-समझ कर किया था. मालिकों के मान के साथ अपने सम्मान की रक्षा भी की थी. जब संस्थान के मालिक ओछेपन पर उतर आएं तो फिर संपादक/पत्रकारों के …

पत्रकार से पॉवर ब्रोकर बने डॉ प्रणय रॉय का पाखंड और एनडीटीवी का पतन – भाग (2)

Samarendra Singh पार्ट वन से आगे…. दिबांग का कहना था कि खेल जाओ और इस आदेश के साथ ही पूरी टीम हरकत में आ गई. फिर क्या था हमने इस खबर के अलग-अलग पहलुओं को एक धागे में पिरो कर बुलेटिन तैयार कर दिया. ब्रेकिंग न्यूज की पट्टियां तैयार कर दी गईं और रिपोर्टर को …

पत्रकार से पॉवर ब्रोकर बने डॉ प्रणय रॉय का पाखंड और एनडीटीवी का पतन – भाग (1)

Samarendra Singh “अगर कोई “खबर” से हट कर “कुछ करना” चाहता है तो उसके लिए बाहर जाने के रास्ते खुले हुए हैं” – डॉ प्रणय रॉय की यह बात आज भी कानों में गूंजती है. ऐसे लगता है कि जैसे यह घटना कल हुई हो. लेकिन यह घटना अगस्त 2007 की है. उस दिन अचानक …

NDTV किसानों से मुंह मोड़कर पनामा चोर अमिताभ बच्चन और पीएम मोदी की चमचागिरी करता रहा!

Arun Maheshwari : मुंबई के सन ऐंड सैंड होटल के समुद्र तट पर दो अक्टूबर को सारा दिन ढेर सारे वीआईपी स्वच्छ भारत में अपने करोड़ों रुपये का योगदान करते रहे। इनकी अमूल्य बातों की अमृतधारा भारतवासियों के चित्त को निर्मल करते हुए देश के सभी शहरों, गांवों के गली-कूचों को स्वत: स्वच्छ करती जा …

मौजूदा सरकार के इशारे पर वीडियोकॉन D2h ने एनडीटीवी का बॉयकाट कर दिया!

Girish Malviya : मौजूदा सरकार अपनी आलोचना करने वाले न्यूज़ चैनल NDTV के खिलाफ इतने घटिया हथकंडे अपनाएगी ऐसा कभी सोचा नही जा सकता था. आज सुबह वीडियोकॉन D2h पर अचानक NDTV न्यूज़ का चैनल न. 305 बन्द हो गया. स्क्रीन पर लिखा आ रहा था कि हम आपको यह चैनल नहीं दिखा सकते. अब …

जब PM मनमोहन के डांटने पर NDTV के मालिक प्रणय रॉय ने ‘बुरे मंत्रियों की सूची’ वाली खबर गिरा दी थी!

Samarendra Singh PMO का दखल और क्रांतिकारी पत्रकारिता…. इन दिनों टीवी के दो बड़े पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी और रवीश कुमार अक्सर ये कहते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से चैनल के मालिकों और संपादकों के पास फोन आता है और अघोषित सेंसरशिप लगी हुई है. सेंसरशिप बड़ी बात है. जिस हिसाब से …

लो जी, 15 सितंबर से एनडीटीवी और रवीश कुमार भी निपट जाएंगे…

मोदी सरकार के राज में सत्ता विरोधी सुर रखने वाले न्यूज चैनलों / पत्रकारों को एक-एक कर निपटाया जा रहा है. एबीपी न्यूज से पुण्य प्रसून बाजपेयी को हटाया गया ताकि वह मास्टर स्ट्रोक जैसा जनपक्षधर शो न कर सकें. इसके पहले उनके शो के वक्त प्रसारण में लगातार व्यवधान पैदा किया गया जिससे जनता …

हृदयेश जोशी एनडीटीवी से गए, सुनें रवीश ने फेयरवेल पार्टी में क्या कहा (देखें वीडियो)

Ravish Shukla : हृदयेश जोशी एक संजीदा, तेजतर्रार और पढ़ने-लिखने वाले साथी हैं। एनडीटीवी में रहते हुए हमने उनसे बहुत कुछ सीखने की कोशिश की है। आज उन्होंने एनडीटीवी को अलविदा कह दिया। वो एक ऐसे रिपोर्टर हैं जिनके बैग में हमेशा किताबें रहती है। सामान्यतया वो हम जैसे रिपोर्टरों की तरह बकैती और फंला …

अय्याशी जारी रखने के लिए एनडीटीवी के तीन सौ कर्मियों की ले ली गई बलि, देखें वीडियो (पार्ट-3)

आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव से भड़ास संपादक यशवंत सिंह की बातचीत का यह तीसरा और आखिरी पार्ट है. इस वीडियो में एसके श्रीवास्तव ने साफ कहा कि प्रणय राय की अय्याशी की भेंट चढ़ गए तीन सौ एनडीटीवी कर्मी. अगर प्रणय राय अपनी लाइफस्टाइल पर खर्च कम करते व एनडीटीवी से पैसे चुराकर महंगी देश-विदेश में अरबों-खरबों की संपत्ति न बनाते तो एनडीटीवी समूह संकट में नहीं जाता. इस प्रकार तीन सौ कर्मियों की छंटनी भी नहीं की जाती.

समय बीतने के साथ एनडीटीवी की मानहानि की कीमत कम होती गई और अब शून्य हो चुकी है… देखें इंटरव्यू भाग-दो

चर्चित आईआरएस अधिकारी एसके श्रीवास्तव को एनडीटीवी के आर्थिक घपलों को पकड़ने के कारण बहुत प्रताड़ित किया गया. इस अफसर के पास एनडीटीवी की पूरी कुंडली है. भड़ास से बातचीत में एसके श्रीवास्तव ने खुलासा किया था कि मनमोहन राज में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने NDTV पर छापा डालने जा रहे इनकम टैक्स अफसरों को रोक दिया था.

प्रणय राय की काली कमाई की पोल खोल दी इस IRS अधिकारी ने, देखें वीडियो

प्रणय राय अपना अफ्रीका वाला फार्म हाउस गिरवी रख देते तो सैकड़ों कर्मचारियों की नौकरी बच जाती… 

Yashwant Singh :  आपको मालूम है, प्रणय राय ने काली कमाई से अफ्रीका में सैकड़ों एकड़ का फार्म हाउस खरीद रखा है जिसमें ऐय्याशी के सारे साजो-सामान उपलब्ध है. प्रणय राय ने गोवा में समुद्र किनारे बंगला खरीद रखा है. दिल्ली और देहरादून में बंगले खरीद रखे हैं. एक हेलीकाप्टर भी खरीदा हुआ है. अगर वो सिर्फ अफ्रीका का अपना सैकड़ों एकड़ वाला रैंच या गोवा का सी-बीच वाला बंगला गिरवी रख दें तो सैकड़ों करोड़ रुपया मिल जाएगा. इस पैसे से वह एनडीटीवी की माली हालत ठीक कर सकते थे. सैकड़ों कर्मियों का ‘कत्ल’ करने से बच सकते थे.

एनडीटीवी में अभिव्यक्ति की आज़ादी हमेशा से एकतरफा ही थी

Abhiranjan Kumar : एनडीटीवी एक भला चैनल था। अन्य चैनलों में बकवास बहुत चलता था, लेकिन एनडीटीवी पर सिर्फ़ ख़बरें चलती थीं। हालांकि इसके साथ ही वहां एक बड़ी बुराई भी थी कि अक्सर ख़बरों में मिलावट कर दी जाती थी। सांप्रदायिक तत्व वहां काफी पहले से और ठीक-ठाक मात्रा में मौजूद थे। मुझे याद आती है एक पुरानी स्टोरी, जिसके मुताबिक किसी ट्रेन की मिलिट्री बोगी में घुसने पर एक युवक की पिटाई कर दी गई थी। चैनल पर यह रिपोर्ट बड़े ताम-झाम से चली। संयोग से उस युवक का नाम था शफ़कत और वह कश्मीरी था। फिर क्या था, चैनल के प्रबुद्ध विचारकों को मसाला मिल गया। स्क्रिप्ट की पहली लाइन ही यह लिखी गई- “एक तो मुसलमान, ऊपर से कश्मीरी। शायद शफ़कत का यही गुनाह था।”

एनडीटीवी में भयंकर छंटनी पर प्रेस क्लब आफ इंडिया ने लिखा प्रणय रॉय को पत्र

To

Dr. Prannoy Roy,
Founder-Chairperson, NDTV
NEW DELHI

Dear Dr. Roy,

Warm Greetings from the Press Club of India.

As this year comes to an end, there are disturbing reports emanating from the NDTV which refer to massive reduction and lay-offs of employees connected with the news operations of your organisation.

एनडीटीवी के बुरे दिन : इनकम टैक्स विभाग ने चैनल के शेयर जब्त कर लिए

कभी कांग्रेस के यार रहे एनडीटीवी और प्रणय राय के दिन इन दिनों भाजपा राज में बुरे चल रहे हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन केंद्र सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे पी. चिदंबरम व एनडीटीवी के मालिक प्रणय राय की मिलीभगत से ईमानदार इनकम टैक्स अधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव को प्रताड़ित करते हुए पागलखाने तक भिजवा देने का पाप अब असर दिखाने लगा है. इनकम टैक्स विभाग ने एनडीटीवी के शेयर जब्त कर लिए हैं.

अंग्रेजी वाले श्रीनिवासन जैन अब हिंदी में ‘रियल्टी चेक’ कर रहे हैं!

कानाफूसी है कि हिंदी मीडिया के धुर विरोधी अंग्रेजी चैनल एनडीटीवी 24×7 के इंग्लिश एंकर श्रीनिवासन जैन को अब हिंदी चैनल एनडीटीवी इंडिया पर जाने किस मजबूरी में हिंदी में ही रियल्टी चेक करना पड़ रहा है. बेचारे हिंग्लिश बोल रहे हैं. आखिर पापी पेट का सवाल जो ठहरा. ज्ञात हो कि श्रीनिवासन जैन ने अमित शाह के बेटे जय शाह पर एक स्टोरी लिखी थी जिसे बाद में एनडीटीवी प्रबंधन ने एनडीटीवी की वेबसाइट से हटवा दिया.

बरखा दत्त ने एनडीटीवी और प्रणय राय की पोल खोलते हुए फेसबुक पर जो कुछ लिखा है, उसे हू-ब-हू पढ़ें…

I certainly don’t see NDTV as either victim or crusader…

Barkha Dutt : For the last few days I have observed with cynical amusement a public debate around NDTV taking down a story related to Amit Shah. I am not getting into the specifics of the story here and whether the story was right or wrong but I did point out when I first heard the controversy that the axing of stories at NDTV is hardly new and those seeking the higher moral ground today remained absolutely silent when some of us fought with the owners and management over these issues.

एनडीटीवी ने अपने मैनेजिंग एडिटर श्रीनिवासन जैन की अमित शाह के बेटे पर की गई स्टोरी को हटा दिया!

एनडीटीवी और प्रणय राय की असलियत सामने आती जा रही है. ताजा मामला है अपने ही मैनेजिंग एडिटर श्रीनिवासन जैन की स्टोरी को हटा देना. एनडीटीवी के मैनेजिंग एटिडटर श्रीनिवासन जैन ने ट्विटर और फेसबुक पर लिखित में आरोप लगा है कि उनने और मानस प्रताप सिंह ने अमित शाह के बेटे जय शाह पर जो स्टोरी की थी, उसे एनडीटीवी ने अपनी वेबसाइट से हटा दिया है. श्रीनिवासन जैन ने अपने पोस्ट में लिखा है कि एनडीटीवी मैनेजमेंट ने उनसे कहा है कि वो रिपोर्ट ‘कानूनी जाँच’ के लिए हटायी गयी है. श्रीनिवासन जैन ने आगे कहा है कि वो इस मामले को ‘दुखद अपवाद’ मानकर अभी एनडीटीवी के संग काम जारी रखेंगे।

एनडीटीवी में खबरें रोकने का विरोध किया तो उसकी कीमत मुझे नौकरी गंवा कर चुकानी पड़ी : बरखा दत्त

(…पार्ट एक से आगे…)

एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर श्रीनिवासन जैन की स्टोरी हटाने के बाद एनडीटीवी से हटाई गईं बरखा दत्त ने सोशल मीडिया पर एनडीटीवी और प्रणय राय की पोल खोल दी. बरखा दत्त ने सर्जिकल स्ट्राइक के दिनों में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के इंटरव्यू के रोके जाने के प्रकरण पर भी खुलासा किया. बरखा के मुताबिक इंटरव्यू में चिदंबरम ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा था. चैनल प्रबंधन ने उस इंटरव्यू को ऑनएयर होने से रोक दिया. इंटरव्यू रोकने के बाद प्रबंधन ने एक इंटरनल मेल जारी किया जिसमें चैनल में काम कर रहे सभी पत्रकारों को हिदायत दी गई कि किसी नेता को जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम ना दें.

बरखा दत्त ने खोली पोल- ‘एनडीटीवी और प्रणय राय न तो क्रांतिकारी हैं, न ही सरकार विरोधी!’

बरखा दत्त सोशल मीडिया पर लगातार धमाके कर रही हैं. उनके निशाने पर हैं एनडीटीवी चैनल के मालिक प्रणय राय. बरखा ने साफ कहा- ”प्रणय राय सरकार विरोधी होने का महज नौटंकी करता है, दिखावा करता है. सच्चाई ये है कि एनडीटीवी के मालिक लगातार बीजेपी के आगे झुकते रहे और खबरें रोकते रहे. एक बात तो सच है कि ना तो एनडीटीवी विक्टिम है और ना ही क्रांतिकारी. चुनाव के बाद से लगातार प्रणय रॉय बीजेपी से मदद ही मांगते रहे. विरोध की कीमत मुझे नौकरी गंवा कर चुकानी पड़ी.”

क्या एनडीटीवी पर नियंत्रण के लिए कॉरपोरेट तख्तापलट की कोशिश की जा रही है?

Sanjaya Kumar Singh : क्या एनडीटीवी पर नियंत्रण के लिए क्या कॉरपोरेट तख्ता पलट की कोशिश की जा रही है? शुक्रवार की सुबह एनडीटीवी के बिक जाने की खबर पढ़कर मुझे याद आया कि प्रणय राय को अगर कंपनी बेचनी ही होती तो वे आईसीआईसीआई बैंक के 48 करोड़ रुपए के लिए पड़े सीबीआई के छापे के बाद प्रेस कांफ्रेंस क्यों करते। क्यों कहते कि झुकेंगे नहीं। मुझे इंडियन एक्सप्रेस की खबर पर यकीन नहीं हुआ।

नए एनडीटीवी में भी यही होगा, बस तरीक़ा बदल जाएगा!

Harsh Vardhan Tripathi : लिखा जा रहा है कि मोदी-शाह के क़रीबी अजय सिंह ने NDTV ख़रीद लिया। तो पूरा लिखिए कि सीपीएम नेता प्रकाश करात के रिश्तेदार प्रणय-राधिका रॉय को 100 करोड़ रुपए इस बिक्री से मिलेंगे। 400 करोड़ रुपये का क़र्ज़ भी अजय सिंह चुकाएँगे। मेरा मानना है कि कारोबारी बेवक़ूफ़ नहीं होता कि सिर्फ ख़रीदकर बन्द करने के लिए चैनल ले रहा होगा। हाँ, यह जरूर है कि चैनल चलाना और हवाई जहाज़ चलाना एकदम अलग बात है।

एनडीटीवी ने मुंह खोला- ‘नहीं बिके हैं हम!’

सुबह इंडियन एक्सप्रेस ने एनडीटीवी के बिकने की खबर छापकर तहलका मचाया तो दोपहर आते आते द हिंदू की वेबसाइट पर खबर आ गई कि एनडीटीवी ने बिकने से इनकार कर दिया है. दो बड़े अखबारों की इन दो अलग अलग विरोधाभासी खबरों से पूरे देश का मीडिया जगत हलकान रहा. फिलहाल द हिंदू की वेबसाइट पर प्रकाशित खबर पढ़ें और इसके ठीक बाद इस खबर को लेकर आईं नई प्रतिक्रियाओं को देखें…

बिकने के बाद भी एनडीटीवी में काम करेंगे रवीश कुमार?

Ashwini Kumar Srivastava :  ”अब तेरा क्या होगा रवीश कुमार…” एनडीटीवी पर भी कब्जा कर चुके मोदी-अमित शाह और उनके समर्थक शायद ऐसा ही कुछ डॉयलाग बोलने की तैयारी में होंगे। जाहिर है, रवीश हों या एनडी टीवी के वे सभी पत्रकार, उनके लिए यह ऐसा मंच था, जहां वे बिना किसी भय के सरकार की आलोचना या खामियों की डुगडुगी पीट लेते थे। उनकी इसी डुगडुगी को अपने लिये खतरा मानकर संघ और भाजपा के समर्थकों की नजर में ये पत्रकार और एनडीटीवी सबसे बड़े शत्रु बने हुए थे।

एनडीटीवी बिक गया, स्पाइस-जेट वाले अजय सिंह ने खरीदा

Om Thanvi : आख़िर NDTV भी क़ब्ज़े कर लिया गया। मसालों के नाम पर स्पाइस-जेट हवाई कम्पनी चलाने वाले अजय सिंह अब यह तय करेंगे कि एनडीटीवी के चैनलों पर क्या दिखाया जाए, क्या नहीं। इसका मुँह-चाहा फ़ायदा उन्हें सरकार से मिलेगा। इस हाथ दे, उस हाथ ले। एक मसाला-छाप व्यापारी को और क्या चाहिए? इस ख़रीदफ़रोख़्त के बीच कुछ पत्रकार तो पहले ही एनडीटीवी छोड़कर जा चुके हैं। कुछ चले जाएँगे। कुछ को चलता कर दिया जाएगा। फिर एक संजीदा सच दिखाने वाले चैनल में बचा क्या रह जाएगा? हींग-जीरा, लौंग-इलायची?

अपने उपर लगे आरोपों का कमाल खान ने दिया करारा जवाब

..मेरी पत्नी रुचि के पिता की पलामू में बॉक्साइट की दो बहुत बड़ी माइंस थी जिससे एल्युमीनियम बनता था और बिरला की एल्युमीनियम फैक्ट्री को सप्लाई होता था… जब उनके पिता बुजुर्ग हो गए तो उन्होंने अपने पिता से कहा कि आपको अब इस उम्र में भागदौड़ नहीं करनी चाहिए इसलिए उन्होंने उनकी दोनों माइंस सरकार को सरेंडर करा दी.. अगर उनको यही चिरकुट टाइप बेईमानी करनी होती तो इसके बजाय वो अपने पिता की खानें चला कर उससे बहुत ज़्यादा पैसा कमा लेतीं… आपके तर्क के मुताबिक अगर पत्रकार को अच्छा वेतन पाना, खुशहाल होना या सम्पत्ति खरीदना अपराध है तो फिर पत्रकारों को मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिश लागू करने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए… क्योंकि इतना पैसा तो सभी मीडिया हाउस देते हैं कि पत्रकार झोला लटका के साइकिल पर घूम सके…

(कमाल खान के जवाब का एक अंश)

एनडीटीवी : जंग हारने पर यहां हर बार सिपाही हलाल होते हैं, सिपहसालार और राजा कतई ज़िम्मेदार नहीं!

एनडीटीवी चैनल में कम से कम 40 लोग होंगे जो दस लाख से ज्यादा महीना कमाते हैं, और ये वो लोग हैं जो नंबर वन चैनल को आख़िरी पायदान पर ले आए… फिर भी हर दिन अच्छे पत्रकार, कैमरामैन, एडिटर चैनल छोड़ रहे हैं या उन्हें छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है… एक तरफ जहां नौकरी जा रही है वहीं दूसरी तरफ अभिजात्य 40-50 लोगों के लिये ऑडी गाड़ियां आती है, कमरों में एयर प्यूरीफायर लगता है, हर रोज़ हज़ारों के फूल सजाए जाते हैं … कॉस्ट कटिंग जरूरी है तो अपनी लाखों की तनख्वाह छोड़ें… शेयरधारकों का पैसा डुबोने का हक़ इन्हें किसने दिया…

एनडीटीवी से हटाए जाने वाले मीडियाकर्मियों की संख्या 100 के पार हो गई

एक बड़े मीडिया संस्थान में मीडियाकर्मियों की छंटनी की जा रही है और पूरा मीडिया जगत चुप्पी साधे है. खासकर वो लोग भी जो दूसरों जगहों पर छंटनी या बंदी के सवालों पर मुखर होकर अपने यहां स्क्रीन काली कर प्राइम टाइम दिखाते थे. एनडीटीवी के लोग इस छंटनी के पक्ष में भांति भांति के तर्क दे रहे हैं लेकिन सवाल यही है कि क्या दूसरों को नसीहत देने वालों को अपना घर ठीक-दुरुस्त रखने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

एनडीटीवी का मालिक दूध का धुला ना हो तो भी सरकार को सबसे ज़्यादा दिक्कत उसी से है!

Nitin Thakur : सब जानते हैं कि एनडीटीवी की छंटनी किसी पूंजीपति के मुनाफा बढ़ाने का नतीजा नहीं है. वो किसी नेटवर्क18 या ज़ी ग्रुप की तरह मुनाफे में होने के बावजूद लोगों को नहीं निकाल रहा. एनडीटीवी एक संस्थान के बिखरने की कहानी है. यही वजह है कि उनका कोई कर्मचारी मालिक को लेकर आक्रोशित नहीं है. वो जानते हैं कि उनसे ज़्यादा ये मुसीबत संस्थान के प्रबंधन की है. बावजूद इसके किसी को तीन महीने तो किसी को छह महीने कंपन्सेशन देकर विदा किया जा रहा है.

एनडीटीवी ने 70 कर्मचारियों को निकाला, रवीश कुमार ने चुप्पी साधी

हर मसले पर मुखर राय रखने वाले पत्रकार रवीश कुमार अपने संस्थान एनडीटीवी के घपलों-घोटालों और छंटनी पर चुप्पी साध जाते हैं. ताजी सूचना के मुताबिक एनडीटीवी ने अपने यहां से छह दर्जन से ज्यादा मीडियाकर्मियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. इनमें से ज्यादातर तकनीकी कर्मी हैं. करीब 35 तो कैमरामैन ही हैं. बाकी टेक्निकल स्टाफ है. वे कैमरामैन में जो पहले एडिटोलियल टीम के सदस्य थे, अब एचआर ने उन्हें टेक्निकल स्टाफ में कर दिया है.

बाबू मोशाय प्रणय रॉय, शीशे​ के घर में रहने वाले दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकते

इंद्र वशिष्ठ कृपया क्या कोई बता सकता है कि मीडिया मालिक/संपादक द्वारा शोषित, पीड़ित, प्रताड़ित, नौकरी से निकाले गए पत्रकारों को न्याय दिलाने, मजीठिया वेतन बोर्ड लागू कराने के लिए या बीमारी से जूझ रहे किसी पत्रकार के लिए प्रेस क्लब और एडिटर गिल्ड ने कभी कोई पहल की है। जैसे धोखाधड़ी और आपराधिक साज़िश …

देश के सभी बड़े न्यूज चैनलों में अंबानी का पैसा लगा है!

Pushya Mitra : एनडीटीवी वाले मामले से और कुछ हुआ हो या न हो, मगर यह जरूर पता चल गया कि देश के टॉप टेन चैनलों में से शायद ही कोई बचा हो जिसमें अम्बानी का ठीक ठाक पैसा न लगा हो (NDTV में भी प्रणव-राधिका के तमाम शेयर अंबानी के पास गिरवी हैं)। इस हिसाब से राष्ट्रवादी हो, बहुराष्ट्रवादी हो या साम्यवादी हो। तकरीबन हर न्यूज़ चैनल अंततः अम्बानी न्यूज़ ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई चीख कर बातें करता है तो कोई मृदुल स्वर में। कोई राष्ट्रवादियों को शेयरिंग कंटेंट उपलब्ध कराता है तो कोई उदारवादियों को।

मैं रवीश कुमार, एनडीटीवी पर पेश है प्राइम टाइम, प्रायोजक हैं ‘पतंजलि’!

Samar Anarya : बस सनद रहे कि रवीश कुमार का आज का शानदार प्राइम टाइम भी पतंजलि प्रायोजित है! बोले तो लड़ाई बहुत मुश्किल है, बहुत बहुत मुश्किल। Gentle Reminder: Even today’s gallant Prime Time of Ravish Kumar is sponsored by Patanjali. The battle is going to be difficult, very very difficult.

एनडीटीवी पर छापे के पक्ष में पोस्ट और कमेंट लिखने वाले आदमी नहीं, पाजामा हैं!

Sheetal P Singh : वित्त मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 5500 willful defaulters हैं जिन से बैंकों को करीब साठ हजार करोड़ रुपये वसूलने हैं। माल्या के अलावा। प्रणव राय के उपर यह राशि 43 करोड़ बताई गई है जिसे वे अदा कर चुके हैं सिर्फ़ ब्याज पर यह FIR दायर है। बाकी किसी पर होमगार्ड तक नहीं पहुंचा। क्या यह तथ्य जानने के बाद भी आप सीबीआई की रेड के लिए पक्ष में पोस्ट लिख सकते हैं, कमेन्ट कर सकते हैं? आप आदमी हैं कि पाजामा?

मोदी सरकार में हिम्मत होती तो प्रणव रॉय अपनी दाढ़ी के बाल नोचते हुए तिहाड़ की रोटी तोड़ रहे होते!

Dayanand Pandey : एनडीटीवी पर आयकर और सीबीआई के संयुक्त छापे पर बहुत हाहाकार मचा हुआ है। यह व्यर्थ का हाहाकार है। जैसे सभी मीडिया घराने चोर और डाकू हैं, काले धन की गोद में बैठे हुए हैं, एनडीटीवी भी उनसे अलग नहीं है। एनडीटीवी भी चोर और डाकू है, अपने कर्मचारियों का शोषण करता है, क़ानून से खेलता है, काले धन की गोद में बैठा हुआ है। वह सारा कमीनापन करता है जो अन्य मीडिया घराने करते हैं। एनडीटीवी में चिदंबरम का ही काला धन नहीं बल्कि पोंटी चड्ढा जैसे तमाम लोगों का भी काला धन लगा है। सरकार से टकराना भी एनडीटीवी की गिरोहबंदी का हिस्सा है, सरोकार का नहीं। सरकार से टकराने के लिए रामनाथ गोयनका का डीएनए चाहिए जो आज की तारीख में किसी एक में नहीं है। अलग बात है कि आखिरी समय में व्यावसायिक मजबूरियों में घिर कर रामनाथ गोयनका भी घुटने टेक कर समझौता परस्त हो गए थे। इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की धार रामनाथ गोयनका के जीवित रहते ही कुंद हो गई थी। अब तो वह धार भी समाप्त है।

भड़ास के यशवंत ने एनडीटीवी छापे पर क्या लिखा, ये पढ़ें

Yashwant Singh : हां ठीक है कि ये लोकतंत्र पर हमला है, अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार है, मीडिया का गला घोंटने की कोशिश है.. लेकिन पार्टनर ये भी तो बता दीजिए कि जो आरोप लगे हैं आईसीआईसीआई बैंक के 48 करोड़ रुपये के फ्राड करने का, उस पर आपका क्या मत है.

एनडीटीवी पर छापे के बाद रवीश कुमार ने क्या लिखा फेसबुक पर, पढ़ें

Ravish Kumar : तो आप डराइये, धमकाइये, आयकर विभाग से लेकर सबको लगा दीजिये। ये लीजिये हम डर से थर थर काँप रहे हैं। सोशल मीडिया और चंपुओं को लगाकर बदनामी चालू कर दीजिये लेकिन इसी वक्त में जब सब ‘गोदी मीडिया’ बने हुए हैं , एक ऐसा भी है जो गोद में नहीं खेल रहा है। आपकी यही कामयाबी होगी कि लोग गीत गाया करेंगे- गोदी में खेलती हैं इंडिया की हज़ारों मीडिया। एन डी टी वी इतनी आसानी से नहीं बना है, ये वो भी जानते हैं। मिटाने की इतनी ही खुशी हैं तो हुजूर किसी दिन कुर्सी पर आमने सामने हो जाइयेगा। हम होंगे, आप होंगे और कैमरा लाइव होगा । ये एन डी टी वी का बयान है-

संबित पात्रा को शो से बाहर निकालने का मजा एनडीटीवी को तो चखाना ही था!

Shrikant Asthana : सत्तारूढ़ दल के बड़बोले प्रवक्ता को कार्यक्रम से बाहर करने पर सरकारी तंत्र को एनडीटीवी को मजा तो चखाना ही था। प्रणव राॅय ने अगर कोई गड़बड़ न की हो तो भी परेशान तो किए ही जा सकते हैं। मीडिया हाउस चला रहे हैं तो इतने के लिए तैयार रहना भी चाहिए।

सीबीआई और आईटी रेड पर एनडीटीवी ने भावुक और आदर्शवादी बयान जारी किया, आप भी पढ़ें…

बैंक फ्राड मामले के आरोपी एनडीटीवी के मालिक-मालकिन प्रणय राय और राधिका राय ने अपने यहां सीबीआई-आईटी रेड के बाद एक बयान एनडीटीवी की तरफ से जारी करवाया है जिसमें भावुक और आदर्शवादी बातें कही गई हैं.

प्रणय और राधिका राय द्वारा ICICI बैंक को 48 करोड़ का चूना लगाने के कारण पड़े छापे

एनडीटीवी के को-फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरपर्सन प्रणय रॉय के घर पर सीबीआई और आईटी रेड पड़ने के बाद पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है. सीबीआई की टीम प्रणय रॉय और उनकी पत्नी राधिका रॉय से बैंक फ्रॉड के मामले में भी पूछताछ कर रही है. इनके खिलाफ केस भी दर्ज हो गया है. सीबीआई की टीम ने दिल्ली और देहरादून के चार ठिकानों पर छापे मारे हैं.

‘एनडीटीवी 24×7’ की एंकर ने लाइव डिबेट में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा को शो से जाने के लिए कह दिया

Vineet Kumar : ये संबित पात्रा का अपमान नहीं, टीवी में भाषा की तमीज बचाने की कोशिश है… कल रात के शो में निधि राजदान (NDTV 24X7) ने बीजेपी प्रवक्ता और न्यूज चैनल पैनल के चर्चित चेहरे में से एक संबित पात्रा से सवाल किया. सवाल का जवाब देने के बजाय संबित ने कहा कि ये एनडीटीवी का एजेंडा है, चैनल एजेंडे पर काम करता है. निधि राजदान को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि उसके बाद आखिर-आखिर तक सिर्फ एक ही बात दोहराती रही- ”प्लीज, आप इस शो से जा सकते हैं. आप प्लीज ये शो छोड़कर चले जाएं. ये क्या बात हुई कि आपसे कोई सवाल करे तो आपको वो एजेंडा लगने लग जाए.”

NDTV India पर सुशील बहुगुणा की उत्तराखंड से पलायन पर शानदार रिपोर्ट

Ila Joshi : कल NDTV India पर Sushil Bahuguna की उत्तराखंड से पलायन पर रिपोर्ट देख रही थी और ये एक संयोग ही है कि पलायन की सबसे ज़्यादा मार झेलते दोनों ज़िले, पौड़ी और अल्मोड़ा, से मेरा सम्बन्ध है। एक माँ का घर और एक पिता का, कभी बचपन में छुट्टियों में गए थे अब तो वहां जाने का बहाना भी नहीं मिल पाता। मेरा एक सपना है कि अपना घर अगर कहीं बनाउंगी तो वो उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में ही होगा, लेकिन अभी उस सपने को पूरा करने के लिए पैसे जोड़ने बाकी हैं. 

रिपोर्टरों की इनवेस्गेटिव स्टोरीज पर मीडिया मालिक कर लेते हैं डील… सुनिए एनडीटीवी की कथा

Abhishek Srivastava : एक और कहानी। एनडीटीवी में किसी ने पहाड़ पर लग रही एक परियोजना पर स्‍टोरी बड़ी मेहनत से की। स्‍टोरी लेकर वो आया। इनजेस्‍ट करवाया। जिस दिन उसे प्रसारित होना था, उस दिन उसके पास वरिष्‍ठ का फोन आया। कहा गया- तुम बोलो तो चला दें। अब ये भी कोई बात हुई भला? ख़बर की ही थी चलाने के लिए। न चलाने का विकल्‍प कहां है। रिपोर्टर ने भी स्‍वाभाविक जवाब दिया। ख़बर नहीं चली क्‍योंकि परियोजना और चैनल के बीच एक नाम कॉमन था- जिंदल। अब रिपोर्टर क्‍या करे? नौकरी छोड़ दे? आप उसका घर चलाएंगे? क्‍या वो किसी हथियार कारोबारी सांसद को खोजे अपनी स्‍टोरी पर पैसा लगाने के लिए? अगर उसकी नीयत और उसका विवेक सही है तो वह ऐसा कुछ नहीं करेगा, बल्कि बिना बिदके अगली बढि़या स्‍टोरी करेगा। क्‍यों? क्‍योंकि एक स्‍तर पर अपनी की हुई ख़बर से वह मुक्‍त हो चुका है और अपनी सीमाएं जानता है।

एनडीटीवी माफी मांग ले तो एक दिन का प्रतिबंध हम भी माफ कर देंगे : मोदी सरकार

एक दिन का प्रतिबंध लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. केंद्र की मोदी सरकार ने कहा है कि पठानकोट एयरबेस पर आतंकी मामले की गलत रिपोर्टिंग के लिए चैनल अगर माफी मांग ले तो वह एक दिन के प्रतिबंध को माफ कर सकती है. एनडीटीवी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उन्हें हफ्ते भर का समय दिया जाए ताकि वह एनडीटीवी प्रबंधन से बात कर उसके रुख की जानकारी दे सकें. ऐसे में माना जा रहा है कि चैनल प्रबंधन विवाद को आगे न बढ़ाते हुए माफी मांगने को तैयार हो जाएगा और पूरे मामले का पटाक्षेप हो जाएगा.

बरखा दत्त एनडीटीवी से मुक्त हुईं, देर सबेर रवीश कुमार भी जा सकते हैं!

बरखा दत्त ने 21 साल की नौकरी के बाद एनडीटीवी को अलविदा कह दिया. वह खुद का वेंचर शुरू करेंगी. उधर एनडीटीवी ने भी बयान जारी कर बरखा दत्त के इस्तीफे की वजह बताई है. बरखा दत्त एनडीटीवी में बतौर कंसल्टिंग एडिटर कार्यरत थीं.  आधिकारिक बयान जारी करके एनडीटीवी ने उनके लंबे समय तक चैनल के साथ कार्यकाल की तारीफ की और उनके भविष्य के लिए बधाई दी है.

एनडीटीवी को सरकारी प्रतिबन्ध की बधाई

Sanjaya Kumar Singh : एनडीटीवी पर कार्रवाई की खबर से मुझे आम आदमी पार्टी के सासंद भगवंत मान पर संसद की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के आरोप और फिर मान के आरोप की याद आई। पता नहीं अब यह मामला किस स्थिति में है पर “सैंया भये कोतवाल” ऐसे ही नहीं कहा जाता है। संसद की साइट पर संसद भवन का वर्चुअल लिंक दिख तो अब भी रहा है पर चल नहीं रहा। चूंकि संसद देखा हुआ है इसलिए वर्चुअल लिंक देखने की जरूरत ही नहीं महसूस हुई। संसद का वीडियो लोड करने के लिए जब मान का मामला गर्माया तो मैंने देखना चाहा कि अधिकृत तौर पर क्या दिखाया जा रहा है और मान ने क्या दिखा दिया। पर उस दिन से वह लिंक चल ही नहीं रहा है। काफी दिन हो गए। आज याद आया तो सोचा फिर देखा जाए। पर उसे चलाने, लगाने, हटाने वाले भी, लगता है, भूल गए। वैसे ही है। ना हटा है, ना चल रहा है। फिलहाल, एनडीटीवी मामले में मुझे यकीन है कि वह इस कार्रवाई से और मजबूत होगा। उसका समर्थन बढ़ेगा। अगर ऐसे प्रतिबंधों से डरना होता तो वह ऐसा कुछ करता ही क्यों जिससे मिर्ची लगती है।

मोदी अगर एनडीटीवी को ठिकाने लगाने पर आ जाएंगे तो एक दिन का नहीं, पूरा ही ब्लैक आउट करा देंगे

Rajat Amarnath : NDTV जहाँ नौकरी पाने का पैमाना होता था कि आपके परिवार में कौन कौन ब्यूरोक्रेसी में हैं ताकि ख़बर के साथ साथ आड़े वक्त पर चैनल का काम निकाल सकें सरकार बदली तो काम निकालने वाले ब्यूरोक्रेट्स भी बदल गए डॉक्टर राय खुद कांग्रेसी हैं इसलिए उन्हीं के समय मे पनपे हैं उनकी पत्नी राधिका राय की बहन हैं वृंदा करात और बहनोई हैं प्रकाश करात जो वामपंथी हैं ये जगजाहिर है ऐसे में ये चैनल सरकारी पक्ष की तो बात करने से रहा और अब जब सरकार ने बाकी चैनलों को बख्श दिया लेकिन NDTV को एक दिन के लिए ब्लैक आउट करने का आदेश दिया तो छटपटाहट शुरू हो गई. अब इसे अघोषित आपातकाल बताया जा रहा है.  

छप्पन इंच के सीने पर छेद तमाम हैं… अगर छेद दिखाए गए तो बैन कर दिया जाता है…

सच को सच कह दिया था इसी पर मेरे पीछे ज़माना पड़ा है… इस ज़माने में सिर्फ वो सरकार है जिसे सवाल पसंद नहीं, और कुछ भक्तों की संख्या है जिनकी आंखें फूट चुकी हैं.. छप्पन इंच के सीने पर छेद तमाम हैं… और अगर छेद दिखाए गए… तो बैन कर दिया जाता है… 2014 से 2019 तक के बीच के लोगों को खुद को महान समझना चाहिए… क्योंकि उन्हें दोबारा हिटलर को देखने का मौक़ा मिल रहा है… हमें कोरिया जाने की ज़रूरत नहीं है… क्योंकि एक ‘किम जोंग’ हमारे देश में भी फल-फूल रहा है… उसे सवाल पसंद नहीं है, उसे मन की करनी है, उसे किसी की नहीं सुननी है… रावण जैसा अहंकार, बकासुर जैसी सोच, कंस जैसी क्रूरता उसके भीतर कूट-कूट कर भरी है…

सच की जुर्रत करने वाले एनडीटीवी चैनल को खत्म करो!

गले में बाँधे रहते थे, अब मुँह पर पट्टा बाँधे हैं,
पालतू हैं हम मोदी के, इस बात का गंडा बाँधे हैं।
सच की जुर्रत करने वाले एनडीटीवी को खत्म करो,
झूठ के भोपू वाले हैं, हम झूठ का दामन थामे हैं।

ये पंक्तियाँ उन चंद तथाकथित बिकाऊ पत्रकारों की भावनाओं की कल्पना है जिन्हें कोई अंध भक्त कहता है, कोई सरकार के झूठ का भोंपू तो कोई मोदी का पालतू। आजाद पत्रकारिता और निष्पक्ष कलम जब सरकार की गलत नीतियों का बखान करने लगता है तो पालतू गला फाड़-फाड़ कर भोंकते हैं। सरकार की मुखालिफत पर ये अक्सर काट भी लेते हैं। लेकिन इनके काटने से पीड़ितों को ना इन्जेक्शन लगवाना पड़ता है और न ही जान का खतरा महसूस होता है। मेडिकल साइंस कहती है कि काटने वाला जब तक जीवित है तब तक पीड़ित खतरे से बाहर है। अभी तीन साल तक इन्हे चंद टुकड़ों की ताकत जिन्दा रखेगी और सत्ता की ताकत इन्हेँ झूठ का साथ देने की आब-ए-हयात देती रहेगी। झूठ की हिफाजत के लिये निष्पक्ष पत्रकारिता पर जो भौकते रहते है उनका मोदी सरकार की दमनकारी नीतियों पर खामोश रहना स्वाभाविक भी है।

ये तीन तरह के लोग एनडीटीवी पर बैन के खतरनाक फैसले को नहीं समझ पाएंगे

Nitin Thakur : एनडीटीवी इंडिया पर बंदिश का फैसला कितना खतरनाक है, ये बात तीन तरह के लोगों की समझ में नहीं आएगी।  1. वो जिन्होंने मजबूरी में पत्रकारिता के पेशे को अपनाया है। 2. किसी और एजेंडे को पूरा करने के लिए इस पेशे में घुस आए लोग। 3. ग्लैमर से अंधे होकर पत्रकारिता की गलियों में आवारगर्दी कर रहे पत्रकार जैसे दिखनेवाले लोग। इनके लिए रिपोर्टिंग करते किसी पत्रकार का पिटना हास्य का विषय है। किसी पत्रकार या पत्रकारिता संस्थान पर चलनेवाले सरकारी डंडे को ये इज़्ज़त देते हैं। दरअसल इन्हें अपने पेशे पर शर्म है लेकिन ये लोग इस पेशे के लिए खुद शर्म का विषय हैं।

बरखा दत्त जा चुकी हैं, विक्रम चंद्रा भी जा चुके हैं, क्‍या अगली बारी सोनिया सिंह की है?

पिछले शनिवार यानी 22 अक्‍टूबर को एनडीटीवी के सीईओ विक्रम चंद्रा के चैनल छोड़ देने की अटकलों के बारे में पूछा गया था तब उन्‍होंने साफ़ कह दिया था कि ऐसी अटकलें हर रोज़ लगाई जाती हैं, इसलिए जब भी ऐसा कुछ होगा तो वे सूचित कर देंगे। ठीक पांच दिन बाद 27 अगस्‍त को ”हर रोज़” लगाई जाने वाली अटकलों को उन्‍होंने हकीक़त में तब्‍दील कर दिया और वास्‍तव में अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया। क्‍या यह संयोग था या पहले से चले आ रहे किसी घटनाक्रम का परिणाम? क्‍या एनडीटीवी में अभी कुछ और विकेट गिरने बाकी हैं?

एनडीटीवी के ग्रुप सीईओ विक्रम चंद्रा पर गिरी गाज, कई अन्य भी निपटाए जाएंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टेबल पर पड़ी ब्लैकमनी को ह्वाइट करने वाली एनडीटीवी के मालिक प्रणय राय की फाइल ने करामात दिखाना शुरू कर दिया है. मोदी खांटी नेता हैं. वे किसी चीज का देर तक और दूर तक इस्तेमाल करते हैं. कांग्रेसी, वामपंथी और आपाइयों का पसंदीदा चैनल कहे जाने वाला एनडीटीवी इन दिनों चोला बदल रहा है. इसके पीछे कारण चिदंबरम-प्रणय राय वाली फाइल है जिसमें इन लागों के कारनामों का डिटेल है.

एनडीटीवी ने भी मोदी राज के आगे घुटने टेक दिए!

Mukesh Kumar : तो अब एनडीटीवी को भी घुटने टेकने पड़ गए हैं। सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े कवरेज को सेंसर करने के जो तर्क उसने दिए हैं वे न पत्रकारिता की कसौटी पर खरे उतरते हैं और न ही लोकतंत्र की। सर्जिकल स्ट्राइक पर राजनीति करने या सेना पर संदेह करने वाली सामग्री नहीं दिखाने का ऐलान उसकी संपादकीय समझदारी के बजाय उसके भय को ज्यादा प्रतिध्वनित कर रहा है। प्रश्न और संदेह करना पत्रकारिता का बुनियादी काम है, मगर वह उसी से खुद को अलग कर रहा है। ये और कुछ नहीं राष्ट्रभक्ति का पाखंड है, जो दूसरे चैनल पहले से उससे बेहतर ढंग से कर रहे हैं। सरकार या सेना दोनों सही या ग़लत काम कर सकते हैं और मीडिया का ये दायित्व है कि वह दोनों ही को वस्तुपरक ढंग से रिपोर्ट करे।

क्या एनडीटीवी ने मोदी सरकार के दबाव में चिदंबरम का इंटरव्यू नहीं दिखाया?

Sanjaya Kumar Singh : एनडीटीवी पर कार्रवाई हो, इसकी आड़ में ब्लैकमेल गलत है… एनडीटीवी के खिलाफ कोई वित्तीय मामला है। यह हमेशा से कहा जाता रहा है। एनडीटीवी का स्पष्टीकरण भी आता रहा है। सरकार के खिलाफ मीडिया संस्थानों पर आरोप कोई नई बात नहीं है और सरकार समर्थक माने जाने वाले मीडिया संस्थान पर विपक्षी दल आरोप लगाएं इसमें भी कुछ नया नहीं है। पर भड़ास 4 मीडिया की आठवीं सालगिरह के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव ने बिना नाम लिए एनडीटीवी का जिक्र किया था और श्रोताओं को यह यकीन दिलाया था कि दाल में कुछ तो काला है। परोक्ष रूप से उनका कहना यही था कि संस्थान में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम का बेनामी निवेश है जिसकी जांच करने से उन्हें रोका गया।

इस IRS अफसर ने किया चिदंबरम, प्रणय राय और NDTV को एक्सपोज… देखें 3 Video

एसके श्रीवास्तव, आईआरएस अधिकारी

ये हैं आईआरएस अफसर संजय श्रीवास्तव. इन्हें एसके श्रीवास्तव यानि संजय कुमार श्रीवास्तव भी कहा जाता है. इन दिनों नोएडा में आयकर भवन में पदस्थ हैं. इस बहादुर अफसर ने पी. चिदंबरम, प्रणव राय और एनडीटीवी के काले धन के खेल का भंडाफोड़ तब किया था जब चिदंबरम खुद वित्त मंत्री हुआ करते थे. ऐसे में पूरा शासन सत्ता एसके श्रीवास्तव के पीछे पड़ गया और इन्हें पागल तक करार दिया गया. पर यह अफसर न झुका, न टूटा. इनके खिलाफ दो महिला आईआरएस अफसरों के जरिए छेड़छाड़ के झूठे मकुदमे तक लिखवाए गए. पर सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं. उस दौर में सिर्फ भड़ास एक ऐसा पोर्टल था जो एसके श्रीवास्तव के खुलासे के साथ खड़ा था और उनकी सारी बातों, परेशानियों, खुलासों को बिना डरे छापता रहा

टीआरपी में नौवें स्थान पर रहने वाला एनडीटीवी इंडिया चल कैसे रहा है, पैसा कितना और कहां से आ रहा है?

Nadim S. Akhter : एक गंभीर बात. बार्क की तरफ से 29वें हफ्ते की टीआरपी के जो आंकड़े जारी किए गए हैं, वो इस प्रकार हैं. गौर से देखिए इनको और जरा अंदाजा लगाए कि कौन चैनल -सफलता- के किस पायदान पर खड़ा है. फिर आगे की बात करूंगा.

NDTV के परम पवित्र मालिकों से तो लाख गुना बेहतर है ज़ी ग्रुप के मालिक डॉ सुभाष चन्द्रा!

Abhishek Upadhyay : ज़ी ग्रुप के मालिक डॉ सुभाष चन्द्रा राज्य सभा पहुंच गए। बीजेपी के समर्थन से। तो क्या हुआ? लॉयल्टी है तो खुलेआम है। इसमें छिपाना क्या! NDTV के परम पवित्र मालिकों से तो लाख गुना बेहतर है ये। आप 2G केस के चार्जशीटेड आरोपी की कंपनी से साझेदारी करो। आप विदेशों में अंधाधुंध कम्पनियां खोलकर भारत में उस कमाई का हिसाब ही न दो। आप आरबीआई के निर्देशों की ऐसी की तैसी कर दो। आपकी मरी हुई दुकान के शेयर आसमान छूती बोलियों में खरीद लिए जाएँ और कोई एजेंसी आपसे सवाल तक न पूछे? कि भइया! ये चमत्कार हुआ कैसे?

NDTV के पांच पत्रकारों को रेड इंक अवार्ड, रवीश कुमार ‘जर्नलिस्ट ऑफ द ईयर’

एनडीटीवी के पांच पत्रकारों को प्रतिष्ठित रेड इंक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। रवीश कुमार को जर्नलिस्ट ऑफ़ द ईयर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। मुकेश सिंह सेंगर को क्राइम कैटेगरी में रेड इंक अवॉर्ड मिला है। पल्लव बागला को विज्ञान और इनोवेशन के लिए और सुनेत्रा चौधरी को स्वास्थ्य के कार्यक्रमों …

कायदे से यही होना चाहिए जो अभी एनडीटीवी इंडिया पर हो रहा है

Vineet Kumar : कायदे से यही होना चाहिए जो अभी एनडीटीवी इंडिया पर हो रहा है. एबीवीपी और आइसा के छात्र नेता के बीच आमने-सामने बातचीत. (आज साकेत बहुगुणा, एबीवीपी और सहला रशीद, आइसा) कुछ नहीं, बाकी के चैनल एक सप्ताह यही काम करें, किसी राजनीतिक दल के प्रवक्ता, बुद्धिजीवी, पत्रकार के बजाय इन छात्र नेताओं को शो में शामिल करें, काफी कुछ बदल जाएगा. हम दर्शकों को काफी कुछ नया देखने को मिलेगा वो तो है ही.

डेन केबल नेटवर्क पर एनडीटीवी का प्रसारण रोकने के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

वाराणसी : देश के कई हिस्‍सों में डेन केबल नेटवर्क पर एनडीटीवी चैनल का प्रसारण नहीं किए जाने के कारण लोगों में निराशा और रोष है। इसी सिलसिले में 4 अप्रैल को बनरास के लहुराबीर इलाके में चंद्रशेखर आज़ाद पार्क में सद्भावना एकता मंच के बैनर तले शहर के सामाजिक राजनीतिक संगठनों और प्रबुद्ध जनों ने धरना प्रदर्शन किया। इसमें तमाम लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए और कहा कि किसी केबल नेटवर्क पर लंबे समय से किसी चैनल को बंद करना सूचना प्राप्त करने के जनता के मौलिक अधिकार का हनन है। इसके लिए इन लोगों ने लंबी लड़ाई लड़ने के साथ इसकी शिकायत संबंधित विभाग में करने की बात कही।

NDTV ने अपनी प्रगतिशीलता, धर्मनिरपेक्षता और जनपक्षधरता को विजय माल्या के साथ इस तरह शेयर किया था

Pushya Mitra : तो माल्या साहब NDTV के पार्टनर भी रह चुके हैं। नाहक जी न्यूज़ बदनाम है।:) वैसे NDTV के साझेदारों में तो वेदांता समूह का भी नाम आता है, जिन पर नियामगिरी में आदिवासियों को खदेड़ कर पहाड़ कब्जाने का आरोप रहा है। वस्तुतः प्रगतिशीलता यही होती है। बनियान चाहे जितनी मैली हो कुरता झकाझक सफ़ेद रहना चाहिए। वैसे ndtv के साथ किंगफिशर वाली वह चिड़िया बड़ी प्यारी लग रही है 🙂

अब सेक्यूलरिज़्म के दूसरे सूरमा प्रणव राय पर भी बन आई है…

: भारतीय पत्रकारिता में सेक्यूलरिज्म का तड़का और उस का यह हश्र : विजय माल्या और प्रणव राय की गलबहियां : भारतीय पत्रकारिता में सेक्यूलरिज्म का तड़का भी अजीबोगरीब स्थितियां पेश कर देता है। क़िस्से तो बहुतेरे हैं पर अभी दो लोगों को याद कीजिए। एक तुर्रम खां हैं तहलका के तरुण तेजपाल जो अर्जुन सिंह द्वारा दिए गए सरकारी अनुदान से वाया तहलका सेक्यूलर चैम्पियन बने। फिर जल्दी ही वह कुख्यात माफ़िया पोंटी चड्ढा की गोदी में जा गिरे और देखते-देखते अरबों में खेलने लगे।

विजय माल्या-प्रणय रॉय और किंगफिशर-एनडीटीवी गुड टाइम्स में जबरदस्त याराना का राज जानिए

Dilip C Mandal : माल्या ने मीडिया को धमकी दी है कि मेरे बारे में ज्यादा बोलोगे तो सबके राज़ खोल दूंगा कि किसको क्या क्या दिया है. आखिर कैसे राज़ हैं माल्या के पास? चलिए एक के बारे में मैं बता देता हूं. वैसे तो यह कोई राज़ भी नहीं है. 2007 में एक चैनल खुला था NDTV गुड टाइम्स.  एनडीटीवी के मालिक प्रणय रॉय और विजय माल्या का साझा करिश्मा. उस समय की खबरें देखिए. माल्या का 100 करोड़ रुपये लगाने का वादा. चैनल के लोगो पर मंडराता किंगफिशर पक्षी. माल्या का टैगलाइन गुड टाइम्स चैनल का टैगलाइन बना. यह वही दौर था जब माल्या बैंकों को लूट रहा था. भारतीय प्रगतिशीलता में बहुत झोल है बाबू! एक गिरोह है जो मिलकर देश को लूट रहा है.

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल के फेसबुक वॉल से.

एनडीटीवी न्यूज चैनल अब फ्री में देखने को मिलेगा, बढ़ेगी टीआरपी

9 मार्च के प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में एनडीटीवी न्यूज चैनल के प्रबंधन की ओर से एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ है। इस विज्ञापन में कहा गया है कि एनडीटीवी के न्यूज चैनल अब तक पे चैनल थे, लेकिन आगामी 16 अप्रैल से सभी प्लेटफार्म पर एनडीटीवी के चैनल फ्री देखें जा सकेंगे। यानि टाटा स्काई, एयरटेल, रिलायंस, वीडियोकॉन आदि ऑपरेटरों से जो प्रति ग्राहक शुल्क वसूला जाता था, उसे अब एनडीटीवी का प्रबंधन नहीं लेगा। यानि जिस प्रकार दूरदर्शन के सभी चैनल फ्री टू एयर में देखे जाते हैं, उसी प्रकार अब उपभोक्ताओं को एनडीटीवी के चैनल भी देखने को मिलेंगे।

प्राइम टाईम अंधेरे का सदमा… इस समय इस प्राइम टाइम की सख़्त जरूरत थी

Preety Choudhari : मैंने आदत के तौर पर टीवी देखना दस बारह साल पहले ही छोड़ दिया था ,यानि रवीश कुमार जब से अपने ब्लाग पर टी वी नहीं देखने की सलाह दे रहे हैं उससे बहुत पहले ही. मैं अच्छी तरह जानती थी कि मैं टीवी क्यों नहीं देखती …रवीश कुमार ने पत्रकारिता की इस कालिमा को पेश कर अपने ज़मीर को थोड़ा सुकून बख़्शा है या उसे और किकरत्व्यविमूढ़ कर दिया है पता नहीं पर इतना ज़रूर है कि इस समय इस प्राइम टाइम की सख़्त जरूरत थी.

भारतीय टीवी पत्रकारिता के फील्ड में एनडीटीवी और रवीश कुमार ने इतिहास रच दिया

Shambhunath Shukla : मैने चैनल नहीं बदला रवीश जी। आज की मीडिया की हकीकत को नए और अभिनव अंदाज से दिखाने के लिए Ravish Kumar आपको बधाई और शुक्रिया। शायद विजुअल पत्रकारिता के इतिहास में ऐसा प्रयोग पहली बार हुआ। इसके पहले एक बार 27 जून 1975 को कई अखबारों ने अपने पेज काले ही छोड़ दिए थे।

आजतक और न्यूज24 को फायदा, इंडिया न्यूज व जी न्यूज को तगड़ा झटका

साल के 51वें हफ्ते की टीआरपी से पता चलता है कि दो न्यूज चैनलों ने जबरदस्त फायदा पाया है. ये हैं आजतक और न्यूज24. दोनों को टीआरपी में 1.1 की उछाल मिली है. वहीं नुकसान की बात करें तो इंडिया न्यूज और जी न्यूज सबसे ज्यादा घाटे में रहे. टीआरपी में इंडिया न्यूज को कुल 1.8 और जी न्यूज को 1.3 का पतन झेलना पड़ा. इस गिरावट के कारण इंडिया न्यूज फिर से न्यूज नेशन से पिछड़ कर पांचवें पोजीशन से छठें पोजीशन पर आ गिरा है.

क्या प्रणय राय को निपटा देंगे नरेंद्र मोदी?

आजतक न्यूज चैनल में काम कर चुके वरिष्ठ खोजी पत्रकार दीपक शर्मा इन दिनों इंडिया संवाद नाम से एक हिंद-अंग्रेजी न्यूज पोर्टल संचालित करते हैं जिसमें ढेर सारी ऐसी खबरें ब्रेक करते हैं जिसे मुख्यधारा की मीडिया नहीं छापता दिखाता. उसी में से एक खबर उन्होंने ये प्रकाशित की है कि नरेंद्र मोदी के निशाने …

एनडीटीवी, प्रणय रॉय और मनी लांड्रिंग

एनडीटीवी चैनल और उसके मालिकानों पर मनी लांड्रिग का केस कगार पर है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच निर्णायक मोड पर है। मामला एनडीटीवी लि. कंपनी का ब्रिटेन में वहां बनाई सबसिडरी कंपनी एनएनपीएलसी को पब्लिक इश्यू से फंड जुटाने और उसे ग्रुप कंपनी को जस का तस भेजने की एफआईपीबी की अनुमति से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि जो अनुमति पब्लिक आफरिंग की थी उसके बजाय कंपनी ने विदेशी कर्ज, बांड्स जैसे अलग तरीके से फंड जुटाया। यह एफआईपीबी की मंजूरी की शर्त और फेमा कानून की धारा का उल्लंघन था।

आज तक, एबीपी न्यूज और एनडीटीवी को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का नोटिस

नई दिल्ली : सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने याकूब मेमन की फांसी कवरेज पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तीन न्यूज चैनलों को कार्रवाई के नोटिस जारी कर दिए हैं। सरकार को फांसी से संबंधित समाचारों को प्रस्तुत करने के तरीके पर गंभीर आपत्ति है।

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार देसी हिन्दू उग्रवाद के निशाने पर

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को धमकाया जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह लिखते हैं – ”रवीश “रवीश” होने के नाते देसी हिन्दू उग्रवाद के निशाने पर हैं । अब तो बाक़ायदा ए के ४७ लगाकर उनको धमकाने के यत्न हो रहे हैं । हम असहमति के मुक़ाबले में हिंसा पेश करने के दौर दौरे की ओर हैं जैसा पाकिस्तान और बांग्लादेश में पहले से ही चल रहा है !”

उद्यमी किरण मजूमदार शॉ ने एनडीटीवी पर गुस्सा ट्विट किया

महिला उद्यमी किरण मजमूदार शॉ ने एनडीटीवी के खिलाफ ट्विटर पर अपने गुस्से का इजहार किया है। उन्होंने ट्विटर पर एनडीटीवी को टैग करते हुए लिखा है- ‘Most disappointed that @ndtv with all its rhetoric on responsible reporting stoops so low as to use a morphed pic of me n Vasundaraji Shame.’

एनडीटीवी की तरफ से आया बयान, चैनल के मालिक अंबानी नहीं हैं

अंतत: एनडीटीवी प्रबंधन को बयान जारी करना पड़ा. इस बयान में कहा गया है कि एनडीटीवी नेटवर्क के स्वामित्व में कोई बदलाव नहीं किया गया है. एनडीटीवी ने यह बयान मुंबई स्‍टॉक एक्‍सचेंज को भेजा है. एनडीटीवी द्वारा जारी स्‍टेटमेंट में बताया गया है कि नेटवर्क के स्‍वामित्‍व में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

सरोकारी चैनलों का सच : एनडीटीवी मनी लांड्रिंग में दोषी… न्यूज नेशन उगाही में लिप्त…

Yashwant Singh : एनडीटीवी न्यूज चैनल मनी लांड्रिंग का दोषी पाया गया… सेबी ने दो करोड़ रुपये जुर्माना ठोंका… उधर, न्यूज नेशन चैनल उगाही को नंबर एक का धंधा बनाने में लिप्त मिला… एफआईआर दर्ज होने के बाद पूरा मामला दिल्ली के क्राइम ब्रांच के पास… दोस्तों ये दो न्यूज चैनलों की ताजी और बड़ी कहानियां हैं… अच्छा है… सब नंगे हो रहे हैं… बहुत जल्दी जल्दी…. बाजार ने लालचियों को बेनकाब कर डाला है… हिप्पोक्रेटों के असली चेहरे दिखा दिए हैं…. ये लोग सरोकार की पत्रकारिता का डंका पीटते हैं… पर पर्दे के पीछे क्या खेल करते हैं, यह जानकर हमको आपको धक्का जरूर लगता है…

एनडीटीवी भी हुई मुकेश अंबानी की!

Anil Singh : खबर बड़ी सनसनीखेज़, लेकिन सच लगती है। इसे लिखा है हर्षद मेहता कांड का भंडाफोड़ करनेवाली जानीमानी पत्रकार सुचेता दलाल ने गहरी पड़ताल के बाद। खबर का सार यह है कि मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज़ से जुड़ी कंपनी, विश्वप्रधान कमर्शियल प्रा. लिमिटेड ने जुलाई 2009 में एनडीटीवी के मालिक प्रणय रॉय, उनकी पत्नी राधिका रॉय और उनकी निजी होल्डिंग कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग प्रा. लिमिटेड को बैंक का कर्ज उतारने के लिए 350 करोड़ रुपए का ब्याज-मुक्त ऋण दिया था।

एनडीटीवी पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना… सेबी ने मनी लांडरिंग मामले में दोषी माना…

एक बड़ी खबर बाजार नियामक सेबी से आ रही है. एनडीटीवी पर मनी लांड्रिंग समेत कई किस्म की आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगे थे जिसकी सुनवाई सेबी में चल रही थी. सेबी ने इन मामलों को लेकर सूचनाएं और तथ्य छिपाने समेत कई आरोपों को सही मानते हुए एनडीटीवी को दोषी करार दिया है. सेबी ने इस कंपनी पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. न्यू देलही टेलीविजन लिमिटेड नामक कंपनी के बैनर तले एनडीटीवी 24×7, एनडीटीवी इंडिया समेत कई न्यूज चैनलों का संचालन किया जाता है. कंपनी के कर्ताधर्ता प्रणय राय और राधिका राय हैं. इन पर कई किस्म की आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे. एनडीटीवी की तरफ से आरोपों से इनकार किया जाता रहा है. पर अब सेबी द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से एनडीटीवी की नैतिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है. SEBI finds NDTV guilty of concealing information in money laundering matter… imposes fine of Rs. 2 crore… सेबी का आदेश यूं है…

‘एंटिलिया’ की बाहरी दीवार पर ख़त्म हो जाती है NDTV की सीमा

पत्रकार और एक बुलंद इन्सान निखिल वागले ने ट्वीट किया है कि NDTV के बिग फाइट नामके कार्यक्रम में “अम्बानी” के बारे उनके वक्तव्य को डिलिट कर दिखाया गया। यह कार्यक्रम रोडरेज/ सड़क पर कुचल कर मार दिये जाने वाली घटनाओं और व्यवस्था द्वारा उस पर की जा रही कार्रवाई के बाबत था।

इसलिए कोसता हूं एनडीटीवी को

किसी ने मुझसे पूछा था कि मैं एंटरटेनमेंट चैनलों, खासकर एनडीटीवी को इतना कोसता क्यों हूं, पत्रकार (तथाकथित) होने के बावजूद मीडिया को गाली क्यों देता हूं….तो आज इस सवाल का जवाब खोजा।

विनोद मेहता, NDTV और चुनिंदा चुप्पियां

कल भारतीय मीडिया जगत के हिसाब से दो बड़ी अहम घटनाएं हुईं। एक, विनोद मेहता की मौत और दूसरे, एनडीटीवी का एक घंटे तक अपनी स्क्रीन को ब्लैंक रखना। दोनों पर बात होनी चाहिए। एक-एक कर के इन दोनों परिघटनाओं के मायने ज़रा तलाशे जाएं। विनोद मेहता का जब देहान्‍त हुआ, तो कई के मुताबिक, जिन्होंने उनका स्मृतिशेष पढ़ा, वह इस पीढ़ी के अंतिम ‘अक्खड़, ईमानदार, अड़ियल, साफगो और निर्भीक संपादक’ थे। हमारी भारतीय संस्कृति में मौत के बाद किसी की बुराई करने या पंचनामा करने का चलन नहीं है, इसलिए ज़ाहिर तौर पर विनोद मेहता को भी महानता की श्रेणी में धकेल ही दिया जाएगा। बहरहाल, विनोद मेहता इस लेखक के लिए हमेशा उस वामपंथी(?) बौद्धिक बिरादरी का हिस्सा रहे, जो ‘चुनिंदा विस्‍मरण’ (सेलेक्टिव एमनेज़िया) का शिकार रहा है। इसके अलावा भी उनका व्यक्तित्व कोई शानदार नहीं रहा, और इसे पूरी शिद्दत से समझने की ज़रूरत है।

‘इंडिया’ज डॉटर’ पर पाबंदी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आघात : जलेस

रविवार की रात एनडीटीवी ने प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री ‘इंडियाज़ डॉटर’ के नाम पर घंटे भर तक स्क्रीन पर सिर्फ एक जलता दीया दिखाया। इस तरह के प्रसारण पर कई लोगों का कहना था कि इसमें बलात्कार के एक दोषी को मंच दिया गया है। एक यूज़र ने ट्विटर पर लिखा कि एनडीटीवी तुम बहुत पक्षपाती हो और संदिग्ध हो। अन्य एक और ने लिखा – अगर एनडीटीवी को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए तो ये बहुत बड़ी मदद होगी। एक अन्य की प्रतिक्रिया थी- पहले एनडीटीवी अपने पसंद के मंत्री बनवाना चाहता था, और अब वो सरकार से अपनी मर्ज़ी के फैसले चाहता है। जनवादी लेखक संघ का कहना है कि ‘इंडिया’ज डॉटर’ पर पाबंदी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आघात है।

एनडीटीवी सबसे भरोसेमंद मीडिया ब्रांड

एनडीटीवी एक बार फिर से भारत का सबसे भरोसेमंद मीडिया साबित हुआ है। इसके अलावा इसे अखबार, टीवी, रेडियो और इंटरनेट सहित सभी तरह की मीडिया श्रेणियों में नंबर एक माना गया है। ट्रस्ट रीसर्च एडवाइजरी के ब्रांड ट्रस्ट रिपोर्ट ‘इंडिया स्टडी 2015’ में लगातार दूसरे साल एनडीटीवी को भारत का सबसे भरोसेमंद मीडिया ब्रांड नामित किया गया है।

एनडीटीवी को बॉय कहा बरखा दत्त ने, अपनी मीडिया कंपनी स्थापित करेंगी, पढ़ें प्रणय और राधिका का पत्र

बरखा दत्त का नाम एनडीटीवी के लिए पर्याय हो चुका है. पर ये नाता अब टूट रहा है. बरखा दत्त अपनी मीडिया कंपनी बनाएंगी. बरखा की एनडीटीवी से विदाई पर चैनल के मालिक-मालकिन प्रणय राय और राधिका राय ने अपने सभी कर्मियों को एक आंतरिक मेल किया है, जो इस प्रकार है…

अवसरवादी होना अच्छा है, सिद्धांतहीन अवसरवादी ठीक नहीं हैं : रवीश कुमार

एनडीटीवी इंडिया ने गुरुवार को अपनी विशेष पेशकश में, अपने फेसबुक पेज पर एक लाइव चैट आयोजित की। इस लाइव चैट में हमने,विभिन्न सोशल मीडिया के माध्यमों जैसे ट्विटर, फेसबुक और गूगल प्लस पर जुड़े हमारे पाठकों और टेलीविज़न के दर्शकों की बातचीत करायी सीधे-सीधे रवीश कुमार से। ये बातचीत रवीश कुमार के किरण बेदी के इंटरव्यू के बाद लोगों के माँग पर की गई। बातचीत इतनी अच्छी रही कि ये तयशुदा आधे घंटे के समय से बढ़कर 45 मिनट तक चली। इस पूरे दरमयान रवीश कुमार खुद अपने पाठकों और दर्शकों के सवालों का जवाब देते रहे। यहाँ पेश है उसी लाईव चैट के कुछ प्रमुख अंश-

पंकज पचौरी की मूर्खता बनाम रवीश कुमार का अहंकार

रवीश बाबू, इतना स्मार्ट बनना और अपमानित करना गुड बात नहीं

-दयानंद पांडेय-

एक समय मैं रवीश कुमार के अनन्यतम प्रशंसकों में से एक था। उन की स्पेशल रिपोर्ट को ले कर उन पर एक लेख भी लिखा था सरोकारनामा पर कभी। रवीश तब मेरे इस लिखे पर न्यौछावर हो गए थे। मुझे भी अच्छा लगा था उन का यह न्यौछावर होना । यह लेख अब मेरी एक किताब में भी है। मेरी मातृभाषा भी भोजपुरी है इस नाते भी उन से बहुत प्यार है। लेकिन बीते कुछ समय से जिस तरह सहजता भरे अभिनय में अपने को सम्राट की तरह वह उपस्थित कर रहे हैं और लाऊड हो रहे हैं , एकतरफा बातें करते हुए और कि अपने अहमक अंदाज़ में लोगों का भरपूर अपमान हूं या हां कह कर कर रहे हैं और कि एक ढीठ पूर्वाग्रह के साथ अपने को प्रस्तुत कर रहे हैं जिस का कि किसी तथ्य और तर्क से कोई वास्ता नहीं होता वह अपनी साख, अपनी गरिमा और अपना तेवर वह बुरी तरह गंवा चुके हैं।

एनडीटीवी की काली कथा को ईटी में विज्ञापन के रूप में छपवाया, आप भी पढ़ें

एनडीटीवी वाले खुद को साफ पाक और दूध का धुला की तरह पेश करते हैं लेकिन इनके दामन पर भी दाग कम नहीं हैं. एनडीटीवी के एक शेयरहोल्डर ने एनडीटीवी की पूरी कहानी बाकी शेयर होल्डर्स को सुनाई है, दी इकानामिक टाइम्स में विज्ञापन छपवाकर. आइए हम आपको भी पढ़ाते हैं इकानामिक टाइम्स में प्रकाशित एनडीटीवी की काली कथा…. इसे पढ़कर आप खुद दंग हो जाएंगे कि आखिर प्रणय राय, राधिका राय सरीखे ईमानदार कहे जाने वाले मीडिया मालिकान भी इतने बड़े चोर हैं….

टीआरपी का तमाशा : एनडीटीवी जैसे चैनल को दसवें नंबर का बना डाला…

: आजतक फिर नंबर एक पर, न्यूज24 फिर हुआ न्यूज नेशन से पीछे : इस बाजारीकृत व्यवस्था में सब कुछ पूंजी से तय होता है. चैनल कितने देखे गए, इसका आंकड़ा जुटाने वाली प्राइवेट संस्था ‘टैम’ में घपले-गड़बड़ियां खूब है पर इसकी जांच कराने की किसी में हिम्मत नहीं होती. जो ज्यादा आंख तरेरता है और सत्ता में अच्छा खासा दखल रखता है, टैम वाले टामी उसकी ‘मुराद’ पूरी कर देते हैं. या तो उसके या उससे जुड़े चैनल को ज्यादा टीआरपी देकर बड़ा कर देते हैं या फिर उसको किसी अन्य तरीके से ‘ओबलाइज’ कर देते हैं. यही कारण है कि टैम वाले उन न्यूज चैनलों को तो ज्यादा टीआरपी देते हैं जिनका कंटेंट बेहद पूवर यानि घटिया है, लेकिन जो अच्छे कंटेंट दिखाता है, यथा एनडीटीवी जैसे चैनल, उनको बिलकुल आखिरी पायदान पर डाल देते हैं.

पीएम, सीएम, डीएम और लोकल थानेदार को बचा लेना, बाकी किसी के भी खिलाफ लिख देना

आज से 35 साल पहले जब आज के ही दिन मैने अखबार की नौकरी शुरू की तो अपने इमीडिएट बॉस ने सलाह दी कि बच्चा पीएम, सीएम, डीएम और लोकल थानेदार को बचा लेना। बाकी किसी के भी भुस भरो। पर वह जमाना 1979 का था आज का होता तो कहा जाता कि लोकल कारपोरेटर, क्षेत्र के एमएलए और एमपी के खिलाफ भी बचा कर तो लिखना ही साथ में चिटफंडिए, प्रापर्टी दलाल और मंत्री पुत्र रेपिस्ट को भी बचा लेना। इसके अलावा डीएलसी, टीएलसी, आईटीसी और परचून बेचने वाले डिपार्टमेंटल स्टोर्स तथा पनवाड़ी को भी छोड़ देना साथ में पड़ोस के स्कूल को भी और टैक्सी-टैंपू यूनियनों के खिलाफ भी कुछ न लिखना। हां छापो न गुडी-गुडी टाइप की न्यूज। पास के साईं मंदिर में परसाद बटा और मां के दरबार के भजन। पत्रकारिता ने कितनी तरक्की कर ली है, साथ ही समाज ने भी। सारा का सारा समाज गुडी हो गया।  

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