दिलीप कुमार के निधन पर एक चैनल मालिक का ट्वीट पढ़िए… क्या इसे बेहूदगी न कहा जाए?

Sanjaya Kumar Singh-

एक चैनल मालिक का ट्वीट पढ़िए उनकी चिन्ता में सर फोड़िए और उनके प्रशंसक को पहचानिए।

यह अपने आप में पर्याप्त है, भारत की आज की दिशा-दिशा बयान करने के लिए। (Pratik Sinha @free_thinker के ट्वीट से प्रेरित)।

अगर ऐसे चैनल मालिक होंगे तो उनकी चिन्ता ऐसी ही होगी, प्राथमिकताएं भी। और यही सब वे दिखाएंगे, बताएंगे। वो चैनल मालिक हैं क्योंकि उनके प्रशंसक हैं।

यही हमारा समाज है। इसी में हम रहते हैं तो हम भी वैसे हो जाएंगे। बचना बहुत मुश्किल है।

मामला समय का है कि कितने समय तक हम खुद को रोक पाते हैं।

देखिए इस चैनल मालिक को केंद्रीय मंत्री तक किस कदर तवज्जो देते हैं….

चर्चा इसकी तो होनी ही चाहिए कि एक केंद्रीय मंत्री, “….समाचार जगत में विशेष स्थान बनाने वाले ….” को हार्दिक शुभकामनाएं दे रहा है। और उनका विश्वास भी तो देखिए। पेट्रोल से आग बुझाने की उम्मीद कर रहे हैं तो उनकी समझ पर रोना आता है।

संजय कुमार सिंह के उपरोक्त एफबी स्टेटस पर आए ढेरों कमेंट्स में से एक ये देखें-

Sanjay Omar
इतना भी गलत नही है,,यह पूंछना, आखिर क्यों नही वो अपने मूल नाम से फिल्मी दुनिया मे दाखिल हुए,,जब नाम,दाम हिन्दू नाम से ही मिला,तो यह सवाल गलत कैसे,

Sanjaya Kumar Singh
इसलिए कि आप जानकर क्या करेंगे और अगर उन्हें दफनाया ही जाए तो अब आप क्या उखाड़ लेंगे और जब नाम (या काम) दाम हिन्दू नाम से मिला तो उन्होंने चूतिया बना लिया अब रोइए (अगर रो सकते हैं तो)। मतलब किसी को दफनाया जाएगा या जलाया जाएया या गंगा में बहा दिया जाएगा (परंपरा के अनुसार) ये सवाल किसी और के पूछने को भी जस्टीफाई किया जा सकता है? कमाल की सोच है। सीधी सी बात है कि जो बिकता था, बेचा गया। अब आप क्या चाहते हैं? दिलीप कुमार या युसूफ खान का तो कुछ बिगड़ेगा नहीं – सामाजिक वैमस्य ही तो बढ़ेगा। जो आप बोल रहे हैं कि हिन्दू नाम से मिला। आपको दिलीप कुमार पसंद हैं यूसूफ खान को नहीं देखते तो अब अफसोस कीजिए, आईपीसी की धारा 420 के तहत मुकदमा हो सकता है तो कर दीजिए। पर ऐसे पूछने का मुझे कोई मतलब नहीं लगता है। मुझे पता नहीं है, दिलीप कुमार का बेटा है कि नहीं, मैं होता तो सोच में पड़ जाता कि आप जैसे बुद्धिमान को क्या जवाब दूं।

Sanjay Omar
भैया मुझे ना आपका झुंझलाना गलत लगा,ना इस चैनल का ट्वीट,मुझे पता है ना इनको कोई इंटरेस्ट है कि दिलीप या यसुफ़ साहब दफनाए जाएंगे,या फूंके जाएंगे,और ना आपको,
उन्हें इस बात का विरोध करना है,की उन्होंने छद्म वेस जब धारण ही किया तो,हिन्दू ही बने रहें अंत मे भी, और आपको तो उनकी बात का विरोध करना ही करना,क्यो की यह आपका पेशा है,,बस इतनी सी बात है,

Sanjaya Kumar Singh
वैसे भी, अगर किसी मुस्लिम का अंतिम संस्कार हिन्दू रीति से हो तो हिन्दुओं को या हिन्दुत्व को क्या मिलेगा कि यह चिन्ता का विषय होना चाहिए? चिन्ता ही करनी है तो इसपर कीजिए कि शाहरुख खान या आमीर खान ने नाम नहीं बदला – या उसकी जरूरत नहीं समझी। मुझे लगता है कि यह आजादी के बाद स्थिति बेहतर होने का संकेत है जिसे फिर पहले जैसे बनाने की कोशिशें जारी हैं। Sanjay Omar जी, बस एक करेक्शन है – मेरा पेशा नहीं है। दो रुपए प्रति ट्वीट नहीं मिलता है। मैं ऐसे ही मीडिया मालिकों के कारण कहीं नौकरी नहीं कर पाया। मैं घर चलाने के लिए अनुवाद करता हूं। और इसीलिए खुलकर लिख सकता हूं क्योंकि उनकी नौकरी नहीं चाहिए। वो दंगाई हैं इसलिए मुझे लगा कि मुफ्त में भी बताया जाना चाहिए। आपको दंगाई में बुराई नहीं दिखी क्योंकि उसकी बुराई को सामने लाना आप मेरा पेशा मान रहे हैं।

Alok Sinha
संजय उमर (ओमर) जी आप हिन्दू हैं या मुसलमाँ अगर मुसलमाँ हैं तो संजय नाम संजय खान से प्रेरित हो आपके माता पिता ने रखा ,अगर हिन्दू हैं तो उमर या ओमर तो मुस्लिम अल्ल है ये किस हिन्दू माँ बाप ने रखा ।अब ये बताइये की मुस्लिम होने से संजय उमर जी मृत्यू के बाद कब्र मैं कयामत तक इन्तजार करेंगे या तुरंत खाक होकर मुक्ति चाहेंगे।

सुरेश चह्वाणके को किसी ने ये ठीक ही रिप्लाई दिया है-

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