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द ट्रिब्यून में महाकुंभ भगदड़ की कवरेज देखें

प्रदीप राय-

कैसे लिखूँ इस विषय पर. मैं पत्थर नहीं हूँ. मैं मशीन नहीं हूँ, जो एक बटन दबते ही शुरू हो जाऊँगा. महाकुंभ में 30 लोग भगदड़ में मर गए. पढ़ते ही हृदय दर्द से भर गया. इतना कि विश्लेषणात्मक लिख न पाऊँगा.

बस इतना कहूँगा भारत को भीड़ में चलने की अक्ल कभी नहीं आएगी. और भारत के अफसरों को कभी फूल प्रूफ इंतजाम करने की नियत प्राप्त नहीं होगी. यू पी सरकार ने अफसरों को अपार साधन उपलब्ध कराए, पर भारत का अफसर बहुत गैर जिम्मेदारी के जेनेर का निर्माण है. उसे संभालना नहीं, बिखेरना आता है. प्रभु शोक संतप्त परिवारो को हौंसला दे.

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