यौन हमले की पीड़ित टीवी पत्रकार को इंसाफ नहीं, आरोपी बेखौफ

मुंबई : एक चैनल में काम करने वाली पत्रकार इन दिनों खुद ही एक विचित्र परेशानी से जूझ रही है। उसने कस्तूरबा मार्ग पुलिस थाने में कुछ लोगों के खिलाफ उस पर यौन हमले की शिकायत दर्ज करवाई लेकिन एक महीना होने के बावजूद पुलिस अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अभी तक न तो पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है, न ही उनका पता-ठिकाना लगाने की कोई कोशिश की है।

सूत्रों के मुताबिक लीना (नाम परिवर्तित) के साथ 28 मई 2015 की शाम सात बज कर 55 मिनट पर बोरीवली की कार्टर रोड नंबर 3 पर हिमेश खिमेसरा, रितेश खिमेसरा और हिमेश खिमेसरा के बड़े भाई के खिलाफ भरे बाजार में मारपीट और यौन हमला करने के आरोप लगाए हैं। पुलिस में दर्ज एफआईआर (क्र. 174/14) के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 323, 504, 506, 509 और 324 के तहत मामला दर्ज हुआ है।

लीना के पुलिस में दर्ज बयान के मुताबिक वह एक निजी न्यूज चैनल में बतौर सह संपादक काम करती है। उसने शबनम खान और विशाल दीक्षित को अनालिजा ब्यूटी पार्लर के लिए 22 लाख रुपए का निवेश किया था। ये लोग उसे दो साल से पैसे वापस नहीं दे रहे थे। एक दिन लीना ने अपने परिचित आयकर अधिकारी से इस बारे में बात की। उन्होंने कहा कि बोरीवली पूर्व में उसके दो दोस्त, अमित गुप्ता और सोनू यादव, के पास जाते हैं। उन दोनों की स्थानीय नेता नयन कदम से अच्छी दोस्ती है। वे सभी उनसे मिलेंगे और शबनम व विशाल से पैसे वापस लेने की जुगत लगाएंगे।

25 अप्रैल 2015 की सुबह 8 बजे अधिकारी और लीना एक टैक्सी में बोरीवली पूर्व में कार्टर रोड नंबर 3 पर एक डेयरी के पास रुक कर अमित गुप्ता का पता पूछने लगे। लीना ने देखा कि उसके आयकर अधिकारी मित्र से कुछ लोग झगड़ रहे हैं। वे उनसे मारपीट करने लगे। लीना को कुछ समझ नहीं आया। वह कुछ समझती, तभी वे लोग टैक्सी के पास आ पहुंचे और टैक्सी की चाबी निकाल ली। जब लीना ने उनसे पूछा कि वे कौन हैं और मारपीट क्यों कर रहे हैं, तो उनमें से एक ने लीना को भद्दी गालियां देते हुए बांह पकड़ कर टैक्सी के बाहर खींच लिया। उसके साथियों ने लीना के अश्लील हरकते करना शुरू कर दिया। लीना का आरोप है कि उनमें से एक व्यक्ति ने तो उसके गाल पर चांटा भी मारा था।

लीना के बयान के मुताबिक जब यह हंगामा चल रहा था, वहां लोगों की भीड़ लग गई थी। वे लोग उसे पास की ही एक इमारत की ओर खींच कर ले जाने की कोशिश कर रहे थे। किसी तरह लीना ने उनके चंगुल से बच कर पुलिस नियंत्रण कक्ष में 100 नंबर पर फोन किया। जब वहां पुलिस वैन आई तो उन्होंने लीना और आयकर अधिकारी को बचाया, उनके साथ मारपीट करने वालों को भी साथ में कस्तूरबा थाने ले गई। उस दिन पुलिस अधिकारियों ने लीना के बार-बार कहने पर भी शिकायत दर्ज नहीं की।

लीना के मुताबिक इस पूरे मामले की वीडियो रिकॉर्डिंग भी एक स्थानीय व्यक्ति ने मोबाईल फोन में की थी। वह वीडियो लेकर लीना ने कस्तूरबा पुलिस थाने में जाकर रपट दर्ज करवाने की कोशिश की लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उसकी शिकायती पत्र लेकर रख लिया और एक महीने तक कुछ नहीं किया। जब लीना ने उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत की तब जाकर कहीं एक माह बाद लीना की एफआईआर तो दर्ज हुई लेकिन स्थानीय पुलिस अधिकारी इस मामले में कानों में तेल डाले सोए हुए हैं। अभी तक न तो इसमें कोई गिरफ्तारी हुई है, न ही कोई यह बताने के लिए तैयार है कि इसमें क्या प्रगति हुई है।

विवेक अग्रवाल के ब्लॉग से 

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