अपनी शामों को मीडिया के खंडहर से निकाल लाइये : रवीश कुमार

Ravish Kumar : अपनी शामों को मीडिया के खंडहर से निकाल लाइये…. 21 नवंबर को कैरवान (carvan) पत्रिका ने जज बीएच लोया की मौत पर सवाल उठाने वाली रिपोर्ट छापी थी। उसके बाद से 14 जनवरी तक इस पत्रिका ने कुल दस रिपोर्ट छापे हैं। हर रिपोर्ट में संदर्भ है, दस्तावेज़ हैं और बयान हैं। जब पहली बार जज लोया की करीबी बहन ने सवाल उठाया था और वीडियो बयान जारी किया था तब सरकार की तरफ से बहादुर बनने वाले गोदी मीडिया चुप रह गया।

संपादक कुछ समझ पाता, उसके पहले ही मालिक के केबिन से बुलावा आ गया…

Abhishek Srivastava : पत्रकारिता की आधुनिक कथा। संपादक ने मीटिंग ली। सबसे कहा आइडिया दो। आजकल आइडिया पर काम होता है, घटना पर नहीं। सबने आइडिया दिया। कोई बोला, सर महंगाई… मने टमाटर ईटीसी। धत्। पागल हो? नेक्‍स्‍ट। सर, इस बार छंटनी पर कर लेते हैं। आइटी कंपनियों में भयंकर संकट है। संपादक अस मुस्‍कराया जस बुद्ध क्‍या मुस्‍कराते। बोले- बच्‍चा, पूरा करियर विशेषांक बंगलोर पर टिका है, आइटी को तो छूना भी मत। राजनीतिक संपादक अब तक चुप थे। जब सारे लौंडों ने आइडिया दे दिया तो उन्‍होंने सिर उठाया- मेरी समझ से हमें आज़ादी के सत्‍तर साल पर एक विशेषांक की तैयारी करनी चाहिए। ओके… संपादक ने कहा… आगे बढि़ए। राजनीतिक संपादक बोलते गए, ”…कि हम क्‍या थे और क्‍या हो गए… जैसा माननीय ने कहा था अभी… कि चीन याद रखे भारत 1962 वाला भारत नहीं है। तो आ‍इडिया ऑफ इंडिया… इस पर कुछ कर लेते हैं।”

कुछ चैनलद्रोही बाथरूम में घण्टों से घुसे बैठे हैं ताकि कहीं कोई पैकेज न पकड़ा दे…

Arvind Mishra : नीतीश के इस्तीफे के बाद टीवी चैनलों का न्यूज़ रूम युद्ध क्षेत्र बन गया… जानिए ग्राउंड जीरो से सूरत-ए-हाल…

”बकवास 7×24” चैनल, चीखू ऐंकर और एक गधे का लाइव इंटरव्यू

विनय श्रीकर

देश के सबसे लोकप्रिय खबरिया चैनल ”बकवास 7×24” का चीखू ऐंकर पर्दे पर आता है और इस खास कार्यक्रम के बारे में बताता है। ऐंकर– आज हम अपने दर्शकों को दिखाने जा रहे हैं एक ऐसा लाइव इंटरव्यू, जिसको देख कर वे हमारे चैनल के बारे में बरबस कह उठेंगे कि ऐसा कार्यक्रम तैयार करने का बूता किसी और चैनल में नहीं है। स्टूडियो में गधे का प्रवेश। माइक लेकर चैनल का पत्रकार गधे से मुखातिब होता है। इंटरव्यू शुरू होता है–

टीवी यानि वो सर्कस जो बड़े तंबू से निकल कर आपके घर में आ गया है!

Arun Maheshwari : आज के ‘टेलिग्राफ़’ में वरिष्ठ पत्रकार सुनन्दा के दत्ता राय ने अपने लेख ‘टीवी सर्कस ही है, यह गंभीर अख़बार का विकल्प नहीं’ में ब्रिटिश अभिनेता राबर्ट मोर्ले के टीवी के बारे में इस कथन को याद किया है कि यह ‘बिग टेंट’, स्थानीय भाषा में सर्कस है। “अब सर्कस बड़े तंबू में नहीं, आपके घर में आ गया है।”

पंडितों की फतवानुमा बातों पर चैनल वाले हांय हांय क्यों नहीं करते?

Mrinal Vallari : गाजियाबाद के जिस इलाके में मैं रहती हूं वहां बहुत से मंदिर हैं और बहुत से पंडी जी भी हैं। कभी-कभी इन पंडी जी की बातों को सुनने का मौका भी मिलता है। अगर लड़कियों और औरतों के बारे में इनकी बातों पर ध्यान देने लगें तब तो हो गया। जींस पहनीं मम्मियां भी मंदिर आती हैं पंडी जी की बात सुनती हैं, और जो मानना होता है उतना ही मानती हैं।

सूरज ने कई न्यूज चैनलों का प्रसारण रोका (देखें वीडियो)

ऐसा साल में दो बार होता है जब सूरज महाशय कई टीवी चैनलों का प्रसारण रोक देते हैं. असल में जब सैटेलाइट और धरती पर स्थित अर्थ स्टेशन दोनों ही सूरज के एक सीध में आ जाते हैं तो सूरज के जबरदस्त विकिरण और आग के कारण प्रसारण का काम रुक जाता है. उस दौरान …

लगभग सारे चैनल झूठी खबर परोसते रहे, भला हो अखबारों का जिनने ये झूठ नहीं छापा

: इलेक्ट्रानिक मीडिया को शर्म क्यों नहीं आती? :  जल्द खबर देने और ब्रेकिंग न्यूज चलाने की अंधी होड मीडिया को सच से दूर कर रही है। ये बात छोटे और नये चैनलों की नहीं है। देश के प्रमुख टी.वी. चैनल भी झूठी और बेसिर-पैर की खबरें चलाने लगे हैं। इलेक्ट्रानिक मीडिया के सच से दूर होने और झूठी खबरें प्रसारित करने का एक बड़ा प्रमाण 21 अप्रैल को मिला। उत्तराखंड हाई कोर्ट की डिवीजन बैंच के आदेश के हवाले से देश के लगभग सभी न्यूज चैनल बड़े जोर शोर के साथ झूठी खबर चलाते रहे।

संघ के मुताबिक टीवी पर ब्रेन लेश डिसकसन, इसमें शामिल होते हैं अपठित पत्रकार जिन्हें भारतीय संस्कृति का ज्ञान नहीं (देखें वीडियो)

मऊ : भारत में चाहें जो बड़ी समस्या चल रही हो, सूखा हो, महंगाई हो, भ्रष्टाचार हो लेकिन आरएसएस वालों का हमेशा एक राग बजता है. वह है राग मुसलमान. घुमा फिरा कर कोई ऐसा मुद्दा ले आते हैं जिससे मुसलमानों को चुनौती दी जा सके और पूरे भारत की बहस इसी मसले पर शिफ्ट किया जा सके. दुर्भाग्य से मीडिया का बड़ा हिस्सा भी इसी उलझावों में बह जाता है और भाजपा-संघ का भोंपू बनते हुए मूल मुद्दों से हटते हुए इन्हीं नान इशूज को इशू बना देता है. हालांकि संघ नेता फिर भी टीवी वालों को बख्शते नहीं और कहते हैं कि चैनलों पर ब्रेनलेस डिसकशन चलती है और इसमें अपठित पत्रकार भाग लेते हैं जिन्हें भारतीय संस्कृति का ज्ञान नहीं. मतलब कि अगर संघ का चले तो वो सारे चैनल बंद करा के सिर्फ एक संघ नाम से चैनल चलाएं और उसमें जो कुछ ज्ञान दिया जाएगा, उसे ही प्रसाद के रूप में पाने के लिए देश भर के दर्शक बाध्य होंगे.

मोदी का जादू चुक गया, चैनल अब नहीं दिखा रहे लाइव कवरेज

मोदी के भाषण अब चुक गए हैं. उनका जादू खत्म हो चुका है. इसलिए उनकी अब टीवी चैनलों को जरूरत नहीं. एक दौर था जब मोदी के भाषण को घंटों दिखाने के कारण टीवी चैनलों की टीआरपी आसमान पर थी. तब मोदी खुद को नंबर वन होने का दावा कर रहे थे. लोकसभा चुनाव के दौरान तो प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेने की प्रतिस्पर्धा चल पड़ी थी. मोदी भी अपने अनुसार चैनलों को चुनकर उनको खूब टीआरपी दिलवा रहे थे. शायद इसी का असर रहा कि कुछ टीवी चैनलों को इसका खूब लाभ मिला. मोदी अपने भाषणों से चैनलों को टीआरपी देते चले गए और मोदी चैनलों के मुनाफे के धंधे में तब्दील हो गए.

क्लीवेज दिखाना एंकर को पड़ा महंगा, चैनल ने किया सस्पेंड

अल्‍बीनिया में एक टीवी रिपोर्टर को न्‍यूज प्रजेंट करते समय क्‍लीवेज दिखाना और प्‍लेब्‍वॉय मैग्जीन ज्‍वाइन करना काफी महंगा पड़ गया। चैनल के नाराज अधिकारियों ने उसे तुरंत ही सस्‍पेंड कर दिया। साथ ही उसे अभी अपनी पढा़ई और जर्नलिज्‍म पर ध्‍यान देने की नसीहत दी। टीवी रिपोर्टर ने जिस समय ऐसा हाटॅ शूट दिया उस समय वह अंतरराष्‍ट्रीय खबरें पढ़ रही थी। अल्‍बीनिया में एक समाचार चैनल के लिए 21 साल की एन्‍की ब्रैकाज इंटरनेशनल लेवल की न्‍यूज पढ़ रही थीं, लेकिन अपने इस काम के दौरान उसने कुछ ऐसा कर दिया कि बाकी सभी लोग सन्न रह गए।

प्रबल प्रताप और संजीव पालीवाल ला रहे एक नया नेशनल न्यूज चैनल!

नोएडा के सेक्टर63 में जहां पर न्यूज एक्सप्रेस चैनल का आफिस हुआ करता था, उसके ठीक बगल वाली बिल्डिंग से एक नया चैनल अवतार लेने जा रहा है. चैनल का नाम वैसे तो फाइनली तय नहीं हुआ है लेकिन लोग कह रहे हैं कि यह ‘नेशन्स वायस’ नाम से लांच होगा. चैनल से अभी दो लोग जुड़ चुके हैं. प्रबल प्रताप सिंह और संजीव पालीवाल. प्रबल प्रताप के नेतृत्व में ही चैनल के सारे इक्विपमेंट्स, मशीनों आदि की खरीद-फरोख्त होने से लेकर इंस्टालेशन का काम चल रहा है. संजीव पालीवाल चैनल से सलाहकार की भूमिका में जुड़े हैं. भड़ास4मीडिया ने जब प्रबल से मैसेज कर इस चैनल से जुड़ने के बारे में पूछा तो उन्होंने पूरी तरह से इनकार किया. हालांकि सूत्र कहते हैं कि प्रबल प्रताप सिंह चैनल से न सिर्फ जुड़े हुए हैं बल्कि चैनल इंस्टालेशन का सारा काम उनकी अगुवाई में हो रहा है.

कुछ चैनलों ने इंद्राणी प्रकरण में किसी जासूसी कहानी की तरह रहस्य-रोमांच का ‘रस’ घोल दिया है

Om Thanvi : मेरी पत्नी प्रेमलताजी ने अजीब उलझन में डाल दिया है: कहती हैं समझाओ कि यह इंद्राणी मुखर्जी वाला मामला क्या है? शीना बेटी थी तो बहन क्यों बनी? विधि कौनसी बेटी है? कितने भाई-बहन थे? इंद्राणी का पहला पति कौन था? संजीव कितने नंबर का पति था, दूसरा या तीसरा? शीना का पिता कौन है? पिता की जगह वह नाना का सरनेम बोरा क्यों प्रयोग करती थी? पीटर की पहली और दूसरी बीवी कौन थी? राहुल कौनसी बीवी से है? पीटर के और कितने बच्चे हैं? पीटर की नजर में शीना साली थी तो अपने सास-ससुर या ससुराल में अन्य किसी निकट-पास के शख्स से बातचीत में यह बात पोशीदा कैसे रही, जो शीना को पीटर के सामने उसकी बेटी ही कहेंगे, साली तो नहीं?

भारत का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सरकार की मर्जी पर !

यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि आज भारतीय मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपने लिए निर्धारित मानदंडों और आचरण संहिता को भूलकर किसी न किसी राजनीतिक दल का अनुयायी या उग्र राष्ट्रवादी संगठनों की तरह व्यवहार करने लगा है। एंकर चीख चीख कर अशोभन लहजे में अपनी परम देश निष्ठा का परिचय दे रहे हैं। अपने अलावा किसी और को बोलने का मौका वे नहीं देना चाहते। खबरों का प्रसारण यहां राजनीतिक मंतव्यों के तहत हो रहा है। 

‘समाचार प्लस’ पर डिबेट में पते की बात कम, भाषण ज्यादा करते हैं पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री

मैं किसी भी पत्रकार के बारे में लिखने से बचता हूँ लेकिन कई पत्रकारों की हरकतों की वजह से आज यह पोस्ट लिखनी पड़ रही है. वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ‘समाचार प्लस’ पर जब डिबेट में बैठते हैं तो खुद ही बोलते रहते हैं, गेस्ट को बोलने का मौका ही नहीं देते हैं. सवाल पूछने की जगह भाषण देते हैं. 

Lok Sabha TV को किसने बना दिया ‘जोक सभा’ टीवी?

लोकसभा टीवी अब पूरी तरह से ‘जोकसभा’ टीवी का रूप ले चुका है। ये चैनल अब काम के लिए कम और विवादों के लिए ज्यादा जाना जाता है। चाहे लोकसभा टीवी के पत्रकारों का शिकायती पत्र लोकसभा के महासचिव तक पहुँचने का मामला हो, या फिर पूर्व राष्ट्रपति कलाम के असामयिक निधन पर लोकसभा टीवी के सोये रहने का मामला हो। इन दिनों सोशल मीडिया और वेब मीडिया पर आलोचकों की टीआरपी में ये चैनल नंबर वन बना हुआ है।

हर ख़बर को दूसरी ख़बर से जोड़कर बुलेटिन बनाने के आदती हैं पुण्य प्रसून बाजपेयी

टीवी चैनलों में लिंक न्‍यूज़ का प्रयोग Punya Prasun Bajpai ने किया था। उनकी आदत है कि हर ख़बर को दूसरी ख़बर के साथ जोड़कर बुलेटिन बनाते हैं ताकि एक परिप्रेक्ष्‍य निर्मित हो सके। इसीलिए आज सुबह जब वे रामेश्‍वरम और मुंबई को अलग-अलग दिखा रहे थे, तब मैंने उन्‍हें एक एसएमएस किया कि क्‍यों न दो विंडो में रामेश्‍वरम और मुंबई को एक साथ दिखाया जाए और याकूब व कलाम की मौत को लिंक कर के बात की जाए।

कभी रवीश कुमार मत बनना

अपने आप को नौजवानों की आंखों में चमकते देखना किसे नहीं अच्छा लगता होगा। कोई आप से मिलकर इतना हैरान हो जाए कि उसे सबकुछ सपने जैसा लगने लगे तो आप भी मान लेंगे कि मुझे भी अच्छा लगता होगा। कोई सेल्फी खींचा रहा है कोई आटोग्राफ ले रहा है। लेकिन जैसे जैसे मैं इन  हैरत भरी निगाहों की हक़ीक़त से वाक़िफ़ होता जा रहा हूं, वैसे वैसे मेरी खुशी कम होती जा रही है। मैं सून्न हो जाता हूं। चुपचाप आपके बीच खड़ा रहता हूं और दुल्हन की तरह हर निगाह से देखे जाने की बेबसी को झेलता रहता हूं। एक डर सा लगता है। चूंकि आप इसे अतिविनम्रता न समझ लें इसलिए एक मिनट के लिए मान लेता हूं कि मुझे बहुत अच्छा लगता है। मेरे लिए यह भी मानना आसान नहीं है लेकिन यह इसलिए ज़रूरी हो जाता है कि आप फिर मानने लगते हैं कि हर कोई इसी दिन के लिए तो जीता है। उसका नाम हो जाए। अगर सामान्य लोग ऐसा बर्ताव करें तो मुझे ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता। मैं उनकी इनायत समझ कर स्वीकार कर लेता हूं लेकिन पत्रकारिता का कोई छात्र इस हैरत से लबालब होकर मुझस मिलने आए तो मुझे लगता है कि उनसे साफ़ साफ़ बात करनी चाहिए।

जनवरी तक एक दूसरे से अलग हो जाएंगे सीएनएन और टीवी 18 ब्राडकास्ट

मीडिया कंपनी टीवी 18 ब्राडकास्ट लि. और केबल न्यूज नेटवर्क इंक (सीएनएन) अगले साल जनवरी में अपना गठजोड़ समाप्त कर देंगे। अंग्रेजी समाचार चैनल सीएनएन आईबीएन के लिये 10 साल पुराना ब्रांड लाइसेंसिंग समझौता अगले साल जनवरी में समाप्त हो रहा है। दोनों कंपनियों ने संयुक्त बयान में कहा, ‘‘समझौता खत्म होने के बाद दोनों कंपनी दुनिया के सबसे गतिशील, जटिल और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक बाजार में स्वतंत्र रूप से वृद्धि की रूपरेखा तैयार करेंगी.’’ बंबई शेयर बाजार को दी गई सूचना में अंग्रेजी समाचार चैनल सीएनएन-आईबीएन चलाने वाली टीवी 18 ब्रॉडकास्ट ने कहा कि सीएनएन और वह ‘‘सीएनएन ब्रांड और सीएनएन समाचार सामग्री के इस्तेमाल के लिये दस साल पुराने ब्रांड लाइसेंसिंग और समाचार सेवा व्यवस्था के समझौते को जनवरी 2016 में सफलतापूर्वक पूरा कर रहे हैं.’’

पीएम साहब, टी वी चैनलों पर बैठा आपका ‘चतुर गैंग’ काम न आएगा

सार्वजनिक जीवन में आप सवालों से मुँह चुराकर भाग नहीं सकते । सवाल अपने लिये माध्यम खोज लेते हैं अपने प्रियतम तक पहुँचने का , उसकी नींद चैन उड़ाने का ! फ़िलहाल हमारे प्रधानमंत्री जी यह सोच रहे हैं कि वे मीडिया की जद से बाहर रहकर इन सवालों को समय की गाद के नीचे दबाने में कामयाब हो जायेंगे जिन्होंने देश के आसमान में डेरा डाल दिया है ! ..और आप सोच रहे होंगे कि टी वी चैनलों पर बैठा आपका “चतुर गैंग” आदमी के मल से बैठक में लेप लगायेगा और परफ़्यूम छिड़क कर बदबू रोक लेगा ? पी एम साहेब ऐसा हो नहीं पाता !

रिलायंस जिओ मीडिया को टीवी कंटेंट डिस्‍ट्रीब्‍यूशन के लिए मिली प्रोवीजनल मंजूरी

रिलायंस इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने सोमवार को कहा कि उसकी सब्सिडियरी रिलायंस जिओ मीडिया को संपूर्ण भारत में डिजीटल केबल टीवी क्षेत्र में मल्‍टी सर्विस ऑपरेटर के तौर पर काम करने के लिए सरकार से प्रोवीजनल रजिस्‍ट्रेशन हासिल हो चुका है।

सन टीवी के शेयर एक ही दिन में 30 फीसदी तक गिर गए

केंद्रीय गृह मंत्रालय से सिक्युरिटी क्लियरेंस न मिलने की खबरों के बाद सोमवार को सन टीवी नेटवर्क के शेयरों के दाम 30 फीसदी तक गिर गए। इस समूह के मालिक कलानिधि मारन हैं। शेयर गिरने के बाद कंपनी ने एक स्टेटमेंट जारी कर कहा कि उसके चैनल ऑन एयर ही हैं। दोपहर 2.45 पर सन टीवी के शेयर 277.15 रुपए से 79.20 रुपए नीचे आ गए। यह गिरावट पिछली क्लोजिंग से करीब 22.23 फीसदी कम रही। सोमवार सुबह शेयर करीब तीस फीसदी तक गिर गए थे।

यौन हमले की पीड़ित टीवी पत्रकार को इंसाफ नहीं, आरोपी बेखौफ

मुंबई : एक चैनल में काम करने वाली पत्रकार इन दिनों खुद ही एक विचित्र परेशानी से जूझ रही है। उसने कस्तूरबा मार्ग पुलिस थाने में कुछ लोगों के खिलाफ उस पर यौन हमले की शिकायत दर्ज करवाई लेकिन एक महीना होने के बावजूद पुलिस अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अभी तक न तो पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है, न ही उनका पता-ठिकाना लगाने की कोई कोशिश की है।

पढ़ाई-लिखाई से टीवी पत्रकारों का कोई वास्ता नहीं

ना जाने क्यों टीवी एंकर्स के चेहरों पर दो किस्म के भाव रहते हैं। अव्वल तो यह मान कर टीवी एंकर्स चलते हैं, सामने वाला शख्स मूर्ख है और मैं यह भी तय करूंगा कि सामने वाले को क्या बोलना है। दूसरे, कुछेक एंकर्स ऐसी अदा से कैमरे को ताकते हुए मेहमान पर मुस्कराते हैं मानो कह रहे हों, जरा इस लल्लू को देखो तो..या फिर इस कदर आक्रामक हो उठते हैं..लगता है कि दर्शक मेहमान को नहीं, एंकर को सुनने टीवी खोल के बैठा है। 

टीवी मीडिया तो विकसित होने से पहले ही पसर गया, बस सेठजी की रखैल टाइप खबर आना रहा बाकी

व्यावहारिक पत्रकारिता में कई आयाम एक साथ काम करते हैं। उसमें संपादकीय टीम की दृष्टि, ध्येय, प्रस्तुतिकरण और प्रतिबद्धता के साथ भाषा का मुहावरा भी शामिल है। इनसे मिलकर ही एक मुकम्मल सूचना उत्पाद बनता है, जिसे आप प्रारंभिक तौर पर अखबार या मैगजीन के रूप में पहचानते हैं। हमारी पत्रकारिता की शुरुआत के समय हर अखबार और मैगजीन का कलेवर, विषयों का चयन, प्रस्तुतिकरण और भाषा का व्याकरण अलग-अलग था। यहां तक कि फॉन्ट और ले आउट भी, जैसे धर्मयुग और साप्ताहिक हिंदुस्तान या दिनमान और रविवार। आज भी इंडियन एक्सप्रेस और द हिंदू या इकोनॉमिक्स टाइम्स और बिजिनेस स्टेण्डर्ड देख कर इसे समझा जा सकता है ।

‘घी न्यूज़’ पर दलाल न्यूज़ एजेंट (डीएनए ) नामक भांड टाइप कार्यक्रम

कल रात ‘घी न्यूज़’ पर दलाल न्यूज़ एजेंट (डीएनए ) नामक भांड टाइप कार्यक्रम देख रहा था… घी टीवी का नामकरण संस्कार हमारे ज्येष्ठ भ्राता श्री Sheetal P Singh जी ने किया है… कार्यक्रम का एक सूत्रीय एजेंडा था दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलना चाहिए । इसके लिए घी टीवी पर दिए जा रहे तर्क निम्नलिखित हैं ।

‘गांव कनेक्शन’ टीवी शो और अख़बार के लिए पत्रकारों की जरूरत

देश के उभरते ग्रामीण अख़बार ‘गांव कनेक्शन’ की लोकप्रियता का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। आम आदमी की आवाज उठाने और गांव की बदलती कहानियों को लोगों के सामने लाने के लिए अख़बार ने अपने ढाई वर्ष के छोटे के कार्यकाल में पत्रकारिता के सर्वोच्च पुरस्कार रामनाथ गोयनका और दो लाडली मीडिया ऑवार्ड जीते हैं। हाल ही में जर्मन मीडिया हाउस ‘डायचे विले’ ने दुनियाभर से 4800 नामांकनों में से ‘गांव कनेक्शन’ की वेबसाइट (www.gaonconnection.com) को 14 अंतराष्ट्रीय प्रविष्टियों में चुना है। यह भारत से इस कैटेगरी में एक मात्र नामांकन है।

केक पर लिख भेजा बॉस को इस्तीफा

एक युवा पत्रकार ने अपने बॉस को त्यागपत्र देने का सबसे मीठा तरीका अपनाया. अमेरिका के एरिजोना में स्थित कोल्ड टीवी के न्यूजकास्ट डायरेक्टर मार्क हरमन ने केक पर लिखे गए अपने इस मीठे से इस्तीफे की फोटो सोशल न्यूजसाइट रेडिट पर शेयर की.

टेलीविजन से मुक्ति का मेरा एक दशक : पत्रकार के लिए भी नियमित टीवी देखना जरूरी नहीं!

वक्त के गुजरने की गति हैरान करती है! टीवी को घर से निकाले एक दशक पूरा हो गया! लेकिन लगता है कल की ही बात है। उस वक्त मैं अमर उजाला नोएडा में था, रात की ड्यूटी करके ढाई बजे रूम पर पहुँचता और बस फिर क्या, बिना कपड़े बदले कुर्सी पर पसर जाता और पौ फटने तक न्यूज़ चैनलों को अदालत बदलता रहता। वही एक जैसी बासी ख़बरें सब चैनलों पर देखता रहता। मेरी इस आदत के चलते पढ़ना लिखना एकदम रुक ही गया था। पूरा रूटीन डिस्टर्ब रहता। सुबह छह सात बजे सोता। 11-12 बजे उठता। नींद आधी अधूरी। शरीर की लय ताल बिगड़ी रहती। फिर सोने की कोशिश। लेकिन कोई फायदा नहीं। तब तक फिर ऑफिस जाने की तैयारी। सब कुछ गड़बड़। ऑफिस के अलावा मेरा अच्छा खासा वक्त टीवी देखने में जा रहा था। मेडिटेशन सिट्टिंग्स बंद हो चुकी थी। अब टीवी ध्यान दर्शन चल रहा था। एनएसडी की विजिट्स अब कम हो गई थी। वीकेंड मूवीज और आउटिंग भी बंद क्योंकि टीवी है ना! एलजी का यह नया गोल्डन आई अब मेरी आँखों में खटकने लगा था।

‘जनता टीवी’ ठेके पर लिया लेकिन तय समय पर पैसा न देने के कारण हो गए आउट!

हाल ही में एनसीआर के रीजनल चैनल जनता टीवी से नई टीम की छुट्टी। 2 महीने पहले ही बिका था चैनल लेकिन चैनल के पुराने मालिक को पैसे न देने और नए खरीददारों द्वारा पुराने स्टाफ को प्रताड़ित करने के चलते दिखाया बाहर का रास्ता। आज से लगभग 7 साल पहले टोटल टीवी से गुड़गांव शहर से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले एक शख्स को अब चैनल हेड बनने का शौक चढ़ा है। इन जनाब ने टोटल टीवी की पत्रकारिता छोड़ कर गुड़गांव में खबरें अभी तक न्यूज़ चैनल में मार्किटिंग हेड बन गए। लेकिन वहाँ इन जनाब की दाल ज्यादा दिन तक नहीं गली और इनके कारनामों का मनेजमेंट को पता चल गया तो इनको चलता कर दिया गया। फिर ये p7 न्यूज़ के रीजनल चैनल पर्ल हरियाणा को इन शर्तों पर सम्भालने लगे कि प्रदेश में चुनाव है, जिसमें ये मोटी विज्ञापन राशि लायेंगे। लेकिन चुनाव के बाद यहाँ पर भी हालात ठीक नहीं रहे और p7 बंद हो गया और जनाब घर आ गए।