देश की जानी-मानी बहुभाषी न्यूज एजेंसी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया यानी यूएनआई (UNI) लंबे समय से दुर्दशा की शिकार रही है। संस्थान के कर्मियों और मीडिया जगत को यह आशा थी कि नए प्रबंधन के टेकओवर करने के बाद यूएनआई अपनी पुरानी गरिमा को वापस पा सकेगी। नए प्रबंधन ने शुरुआत में भवन में रंग-रोगन और परिसर में फूलपत्ती लगाकर उम्मीद भी जगाई। लेकिन प्रबंधन के आस-पास के चाटुकार सब किए धरे पर पानी फेर दे रहे हैं।
अब संस्थान प्रबंधन के तुगलकी फरमानों से परेशान है। मीडिया के इतिहास में शायद यूएनआई पहली संस्था है जहां पर पत्रकारों को परिसर के बाहर जाने की इजाजत नहीं है। यह फरमान संपादक से लेकर उप-संपादक तक पर लागू है। हालत यह है कि संस्थान में प्रवेश कर जाने के बाद आप आठ घंटे बाद ही बाहर निकल सकते हैं। यहां तक कि कोई रिपोर्टर भी संपादक की अनुमति से किसी एसाइनमेंट पर नहीं जा सकता है। जब तक रिपोर्टर एचआर और मैनेजमेंट से लिखित अनुमित नहीं प्राप्त कर लेता।
यह तो केवल एक आदेश है। अन्य आदेश पत्रकारिता , नौकरी और श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ा दे रहे हैं। किसी भी कर्मी (पत्रकार) को तत्काल प्रभाव से नोकरी से हटा दिया जाता है। न कोई नोटिस,न कोई वेतन। संस्थान में वर्ष भर में केवल 8 अवकाश ही स्वीकृत है। आठ से अधिक छुट्टी लेने पर वेतन कट जाता है या कटने की धमकी मिलती है।
फिलहाल नए मालिक-प्रबंधक यानी आरपी गुप्ता-विनीत गुप्ता की जोड़ी ने यूएनआई, यूनीवार्ता और यूएनआई उर्दू में कुछ अनुभवी पत्रकारों को सस्ते में हायर किया। इसे वादा तो नहीं कहा जा सकता लेकिन ज्वॉइन करते समय ऐसा अहसास कराया गया था बस चार-छह महीने बाद एजेंसी की हालत सुधरने पर वेतन में बढ़ोतरी कर दी जायेगी। लेकिन अब प्रबंधन वेतन बढ़ाने की जगह लोगों को अन्य जगह जाने के लिए स्वतंत्र छोड़ने की बात करता है। पिछले छह महीनों में कई अवसर ऐसे आये कि किसी गलतफहमी के तहत बड़े संस्थानों से बड़े वेतन पर हायर किए गए लोगों को थोक के भाव में निकाल दिया गया।
चंद महीने पहले एबीपी न्यूज से आए संपादक और उनके साथ 14 लोगों को 2 महीने में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं सोशल मीडिया में पांच लोगों को 1 महीने में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जबकि दूसरे जगहों से लोग अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़कर बेहतरी की उम्मीद में आये थे। एक महीने में उनको बढ़िया परफॉरमेंस ना दिखा पाने के बहाने बाहर कर दिया गया। प्रबंधन की यह कार्रवाई लंबे समय से संस्थान में काबिज लोगों के इशारे पर किया जा रहा है।
यूएनआई-यूनीवार्ता पर कुछ पुराने लोगों की एक लॉबी का कब्जा है। जो अपने निहित स्वार्थ को ध्यान में रखकर हर निर्णय करते कराते हैं। जिसमें संस्थान का हित नहीं वरन उनका स्वार्थ होता है।
यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ इंडिया की स्थापना 19 दिसंबर 1959 को एक अंग्रेजी समाचार एजेंसी के रूप में की गई थी। इसका व्यावसायिक संचालन 21 मार्च 1961 से शुरू किया गया था। यूएनआई ने मई 1982 में हिंदी समाचार सेवा यूनिवार्ता और जून 1992 को उर्दू समाचार सेवा शुरू की थी।


