सोशल मीडिया पर मशहूर शायर मुनव्वर राणा के निधन की झूठी ख़बर फैला दी गई

सोशल मीडिया वर्तमान समय का सबसे आसान और सुलभ माध्यम है। जिसके जरिए अपनी बात लोगों तक आसानी से पहुंचाई जाती है, अपने जज्बात बयान किए जाते हैं और समाजी-सियासी मुद्दों पर चर्चा भी होती है। आम आदमी को इसका हिस्सा बनने में पलभर का समय लगता है। इस समय लगभग हर आदमी किसी न किसी रूप में सोशल मीडिया का हिस्सा बना हुआ है। मगर, यह माध्यम अब धीरे-धीरे झूठ और अफवाह फैलाने का केंद्र बनता जा रहा है।

किसी ने एक बड़ी सनसनीखेज झूठी खबर पोस्ट की नहीं, कि लोग उसकी कापी-पेस्ट शुरू कर देते हैं, देखते ही देखते झूठी ख़बर सैकड़ों, हजारों और फिर लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। हफ्तों, महीनों और कई बार तो वर्षों तक वही झूठी ख़बर सोशल मीडिया के विभिन्न साइट्स पर घूमती रहती है।

किसी भी कापी-पेस्ट करने वाले को यह जरूरत महसूस नहीं होती कि पहले उसकी सच्चाई का पता लगा लें, उसके बाद आगे बढ़ाएं। ऐसे में कई बार समाज का माहौल भी खराब होने लगता है, मारपीट और दंगे की नौबत सामने आ जाती है। 05 फरवरी की रात से लेकर 06 फरवरी की दोपहर तक मुनव्वर राणा के निधन होने की झूठी ख़बर फैलाने का सिलसिला जारी रहा, जबकि मुनव्वर राणा लखनऊ के पीजीआई में भर्ती हैं, और उनकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।

इस मामले में विडंबना यह है कि जो लोग प्रिंट-इलेक्ट्रानिक मीडिया पर सवाल खड़े करते हैं, वही लोग सोशल मीडिया पर झूठी और फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, राजपाल यादव, शाहरूख खान समेत कई फिल्मी हस्तियों के निधन होने की फ़र्ज़ी ख़बर कई बार इससे पहले फैलाई जा चुकी है। अमिताभ बच्चन के निधन की फर्जी खबर में उनके शव के साथ अभिषेक बच्चन की फोटो भी पोस्ट की गई। कई बार ऐसी लोगों की ख़बरें फैलाई गईं, जिसमें बताया कि अमुक बहुत गंभीर बीमारी से पीड़ित है, इलाज के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। ऐसी ख़बरों में संबंधित का मोबाइल नंबर भी दिया जाता है, कई बार लोगों ने मोबाइल पर फोन करने के बाद उनके बैंक एकांउट में इलाज के लिए पैसा भी डाला है।

कुछ विदेशी महिलाओं की फोटो लगाकर फेसबुक पर एकांउट बनाकर मित्रता की गई और फिर उनके साथ ठगी की गई। बाद में ऐसे एकाउंट बंद कर दिए गए। फर्जी युवती की एकांउट के जरिए ठगे गए लोग यह बात किसी को बता भी नहीं पाते। लोगों को ठगने का यह सिलसिला अब भी जारी है।

तकरीबन दो साल पहले उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा की जीत के बाद योगी आदित्य नाथ के मुख्यमंत्री बनने के दो दिन बाद एक ख़बर खूब तेज़ी से फैलाई गई, जिसमें कहा गया कि राष्ट्रªपति ने उत्तर प्रदेश का चुनाव रद्द कर दिया है, अब फिर से चुनाव होंगे। यह ख़बर खास तौर पर मुसलमानों द्वारा फैलाई गई और यह जताने का प्रयास किया गया कि भाजपा ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी करके जीत हासिल किया है, इसलिए चुनाव रद्द किया गया है। कई दिनों तक ख़बर खूब फैलाई गई। बच्चों के रेलवे स्टेशनों पर लावारिस पाए जाने, सेलिब्रिटीज और रिश्तेदारों के निधन होने, फर्जीवाड़ा में लोगों के पकड़े जाने, साहित्यकारों के बड़े पुरस्कार के लिए नामित होने, हत्या, अपहरण की घटना होने आदि की झूठी ख़बरें प्रायः सोशल मीडिया की न्यूज बनी रहती है।

कुल मिलाकर हालत यह हो गई है कि एक फ़र्ज़ी ख़ब़र किसी के भी डालते ही, लोग बिना उसकी सच्चाई जानकारी हासिल किए ही, कट-पेस्ट करने में जुट जा रहे हैं। यही वजह है कि किसी भी शहर में अब दंगा होता है तो वहां का प्रशासन सबसे पहले इंटरनेट को ब्लाक करता है, ताकि लोग सोशल माीडिया के माध्यम से अफवाह न फैलाएं। दंगा या कफ्र्य की स्थिति में अफवाह की वजह से घटनाओं की तादाद बढ़ती है, लोग आक्रोशित होकर घटनाओं को अंजाम देने के लिए निकलते हैं।

सोशल मीडिया पर फर्जी खबर वाले ही प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया की भूमिका पर सवाल भी खड़ा करते हैं, कहते हैं कि ये लोग फर्जी खबरें प्रकाशित-प्रसारित कर रहे हैं। ऐसी बातें कहने वाले खुद अपना दामन देखने को तैयार नहीं, सिर्फ़ दूसरों पर उंगली उठाई जा रही है। इसमें कोई शक नहीं कि कुछ मीडिया घराने केंद्र सरकार की जमकर चम्मचागिरी कर रहे हैं, सरकार के खिलाफ कोई ख़बर प्रसारित-प्रकाशित नहीं की जा रही है।

यहां यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि यहां झूठी ख़बर नहीं चलाई जाती, हां लामबंदी हो सकती है। किसी के निधन होने, किसी के खो जाने या दंगा आदि होने पर भी जब तक उसकी पूरी तरह पुष्टि नहीं कर ली जाती, तब तब ऐसी ख़बरों को किसी सूरत में प्रसारित नहीं किया जाता है। ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी के निधन होने या हादसा होने की झूठी ख़बर फैला दी गई हो। इसलिए कुल मिलाकर देखा जाए तो आज के समय में सोशल मीडिया फर्जी खबरें फैलाने का प्रमुख केंद्र बन गया है। लोगों को इससे सजग रहने और खुद झूठी खबरें न फैलाने के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है।

मुनव्वर राणा साहब की तबीयत में काफी सुधार

अभी-अभी मेरी बात मुनव्वर राणा साहब की बेटी सुमय्या राणा से हुई है। मुनव्वर साहब की तबीयत पहले से काफी बेहतर है, वो बिल्कुल ठीक हैं। कुछ लोग उनके बारे में ग़लत ख़बरें फैला रहे हैं, कृप्या ऐसी ग़लत ख़बरों से सावधान रहें और ऐसे लोगों को अपने ग्रुप और मित्रता से भी बाहर करें। सोशल मीडिय को कुछ लोगों ने अफवाह फैलान का अड्डा बना दिया है।

इलाहाबाद से सोशल एक्टिविस्ट इम्तियाज़ अहमद ग़ाज़ी की रिपोर्ट.

आम आदमी की खास गायकी सुनेंगे तो दंग रह जाएंगे…

आम आदमी की खास गायकी सुनेंगे तो दंग रह जाएंगे… ये आम लोग हैं जो बड़े खास अंदाज़ में गुनगुनाते हैं, सुनेंगे तो सुनते रह जाएंगे… ये जनता है, गाती है तो दिल से… आप सुनिए भी दिल से.. सामान्य लोगों के भीतर गायकी के कुछ असामान्य कीड़े होते हैं जो गाहे बगाहे प्रकट हो जाते हैं… ऐसे ही कुछ आम लोगों की गायकी को इस वीडियो में संयोजित किया गया है. कोई पत्रकार है, कोई बिदेसिन है, कोई समाज सेवी है तो कोई एक्टिविस्ट है. इनमें गायकी की प्रतिभा जन्मना है, कोई ट्रेनिंग नहीं ली इनने. कोई अवधी गा रहा, कोई भोजपुरी गुनगुना रहा, कोई अंग्रेजन छठ का गीत गा रही, कोई पत्रकार क्लासिकल गुनगुना रहा… क्या ग़ज़ब टैलेंट है.. सुनिए और आनंद लीजिए…

Bhadas4media ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಜನವರಿ 31, 2019
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