
अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-
योगी सरकार ने अवैध प्लॉटिंग करने वालों के लिए तकरीबन सारे रास्ते बंद करने शुरू कर दिए हैं. इस सिलसिले में प्राधिकरण के भ्रष्ट अफसरों पर कड़ी कार्यवाही करने का सिलसिला तो तेज हुआ ही है, अब किसान और प्रॉपर्टी डीलर के बीच अग्रीमेंट करके अवैध प्लॉटिंग करने के गठजोड़ पर भी FIR दर्ज होनी शुरू हो गई हैं.
इससे लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, कानपुर या पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम बड़े शहरों में बिना नक्शा पास कराए अवैध प्लॉटिंग करने वाले प्रॉपर्टी डीलर ही नहीं कृषि जमीन पर अवैध प्लॉटिंग से मोटा मुनाफा कमाने वाले किसान भी फिलहाल सांसत में हैं.
दरअसल, कुछ समय पहले लखनऊ में विकास प्राधिकरण ने कई अवैध प्लॉटिंग में कानूनी कार्यवाही करवाने की प्रक्रिया शुरू की तो अग्रीमेंट पर जमीन होने के चलते वह प्रक्रिया बाधित हो गई. लोगों से मिली शिकायत या प्राधिकरण द्वारा की गई जांच पड़ताल में अवैध प्लॉटिंग के लिए जिन प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई, उनमें से लगभग सभी ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि अवैध प्लॉट की रजिस्ट्री तो किसान ने की है, इसलिए उन पर कोई मामला दर्ज कराए जाने का कोई तुक नहीं है.
प्राधिकरण या शासन अभी किसान को अवैध प्लॉटिंग का दोषी मानकर उस पर कानूनी कार्यवाही से बचता रहा है और इसी का फायदा ये प्रॉपर्टी डीलर उठा रहे हैं. लिहाजा ऐसी खबरें हैं कि ऐसी स्थिति में शासन और प्राधिकरण अपने भ्रष्ट अफसरों, प्रॉपर्टी डीलर ही नहीं बल्कि अग्रीमेंट करके बाद में रजिस्ट्री करने वाले किसानों को प्रॉपर्टी डीलर मानकर उन पर भी कड़ी धाराओं में FIR दर्ज करा सकते हैं.
यह कदम कठोर तो है मगर इसके लागू होने के बाद अवैध प्लॉटिंग करने वालों के लिए कानून से बचने का संभवतः कोई रास्ता नहीं रह जाएगा. फिलहाल किसान किसी प्रॉपर्टी डीलर से अग्रीमेंट करके बिक्री उसके माध्यम से तथा रजिस्ट्री खुद करके इस कानून का तोड़ निकाल कर धड़ल्ले से अवैध प्लॉटिंग में लिप्त थे.
योगी आदित्यनाथ की सरकार कुछ काम ऐसे बेहतरीन कर रही है, जो शायद ही कोई यूपी में कर पाता। ऐसे कामों की एक लंबी लिस्ट है, जिस पर मैं जल्द ही बारी बारी से लिखने की कोशिश करूंगा। फिलहाल शुरुआत करता हूं, उस काम से, जो मेरे दिल के बहुत करीब है। वह है लखनऊ में देश की पहली और दुनिया की पांचवी नाइट सफारी का, जो लगभग 900 एकड़ से अधिक के क्षेत्र में फैली होगी। इस क्षेत्र में एशियाटिक लॉयन, घड़ियाल, बंगाल टाइगर, तेंदुआ और हॉयना आदि मुख्य आकर्षण होंगे।
यही नहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह भी ऐलान किया है कि दिसंबर 2026 में उत्तर प्रदेश देश को पहली नाइट सफारी का उपहार दे देंगे। वाइल्डलाइफ का इससे बेहतरीन अनुभव क्या हो सकता है यदि लखनऊ और आसपास के लोगों को यहीं लखनऊ में नाइट सफारी का लुत्फ मिल जाए।
इससे लखनऊ और यूपी दुनिया के वाइल्डलाइफ टूरिज्म के नक्शे में बेहद अहम दर्जा पाकर अलग ही नजर आने लगेगा। योगी आदित्यनाथ की नीतियां यूपी को न सिर्फ धार्मिक टूरिज्म के क्षेत्र में देश में सबसे ऊपर लाने में कामयाब दिख रही हैं बल्कि अब इस तरह के फैसलों से वह राज्य में वाइल्डलाइफ टूरिज्म को भी देश दुनिया की टक्कर में लाने में जुट गए हैं।
दुधवा, पीलीभीत जैसे राज्य के तमाम छोटे बड़े वाइल्डलाइफ पार्क और जंगलों के लिए योगी सरकार ने हाल ही में खास टीम और कार्यक्रम के साथ बड़े बजट का आवंटन कर दिया है। इस टीम को इस सिलसिले में कई टास्क दिए गए हैं। जाहिर है, योगी का इरादा स्पष्ट है कि वाइल्ड लाइफ टूरिज्म में मौजूदा सूरते हाल में आमूल चूल परिवर्तन लाया जाए।
मुख्यमंत्री इस मामले पर कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद मुख्यमंत्री के सामने उनके सरकारी आवास पर हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी पार्क और जू का मॉडल प्रेजेंटेशन पेश किया गया। मुख्यमंत्री ने बैठक में सख्त निर्देश देते हुए कहा कि इसका निर्माण कार्य हर हाल में जून 2026 तक पूरा कर लिया जाए।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शासन स्तर से नाइट सफारी और जू के लिए वन्य जीवों के लाने की समुचित व्यवस्था की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है।


