भारत के लोकतंत्र में सेंध डालने के लिए यूएस एड ने फूंके 2.10 करोड़ डॉलर। बहुत से एनजीओ मालामाल हुए होंगे। वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए 2.10 करोड़ डॉलर दिया गया भारत में! USAID के पैसे से भारत में बहुत से लोगों ने माल बनाया है।


अमेरिका ने भारत में मतदान बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर की फंडिंग रद्द की
अमेरिकी सरकार द्वारा विदेशों में विभिन्न लोकतांत्रिक और विकास परियोजनाओं के लिए दी जाने वाली करोड़ों डॉलर की फंडिंग को रद्द कर दिया गया है। इसमें भारत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना भी शामिल है, जिसके तहत भारत में मतदाता टर्नआउट बढ़ाने के लिए 21 मिलियन डॉलर (लगभग 174 करोड़ रुपये) की सहायता दी जानी थी।

ट्विटर पर Department of Government Efficiency के एक पोस्ट के मुताबिक, अमेरिका ने कई देशों में राजनीतिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने और सामाजिक सुधार लाने से जुड़ी परियोजनाओं पर खर्च किए जाने वाले करोड़ों डॉलर को बंद कर दिया है। इनमें बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए 29 मिलियन डॉलर और नेपाल में ‘वित्तीय संघवाद’ के लिए 20 मिलियन डॉलर की योजनाएं भी शामिल हैं।
भारत में मतदान बढ़ाने की परियोजना क्यों हुई रद्द?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां हर चुनाव में मतदाता जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। अमेरिकी सरकार द्वारा भारत में मतदान बढ़ाने के लिए इतनी बड़ी रकम देने की योजना पर पहले से ही सवाल उठाए जा रहे थे। यह स्पष्ट नहीं है कि यह रकम भारत सरकार या किसी गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से खर्च की जानी थी।
राजनीतिक और कूटनीतिक असर
इस फैसले से अमेरिका के वैश्विक लोकतांत्रिक एजेंडे पर सवाल खड़े हो सकते हैं। भारत में विपक्षी दल इस मुद्दे को संप्रभुता से जोड़ सकते हैं, जबकि सरकार इसे विदेशी हस्तक्षेप से दूरी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मान सकती है।
क्या यह भारत-अमेरिका संबंधों को प्रभावित करेगा?
फिलहाल इस फैसले से भारत-अमेरिका संबंधों पर कोई सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी सरकार इस फंडिंग रोकने के पीछे क्या आधिकारिक कारण देती है।
वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश शर्मा की टिप्पणी-
अरबपति बिजनेसमैन एलन मस्क के नेतृत्व में अमेरिका के सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन के तहत 1 अरब 80 करोड़ रुपये (21 मिलियन डॉलर) की फंडिंग को रद्द कर दिया है. इस फंड का इस्तेमाल ‘भारत में वोटर टर्नआउट’ को प्रभावित करने के लिए किया जाना था. DOGE ने इस फंड को रद्द करते हुए बताया कि ये 1 अरब 80 करोड़ रुपये ‘चुनाव और राजनीतिक प्रक्रिया सुदृढ़ीकरण के लिए संघ’ को आवंटित $486 मिलियन (लगभग 4 हजार करोड़) के बड़े बजट का हिस्सा था. इस फंड में 2 अरब 50 करोड़ रुपये (29 मिलियन डॉलर) बांग्लादेश में राजनीतिक परिदृश्य को मजबूत करने के लिए निर्धारित किए गए थे. बता दें कि बांग्लादेश की सत्ता से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाने में अमेरिका का हाथ होने का आरोप लगा था. हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था. बीजेपी ने अब रद्द की गई फंडिंग को भारत की चुनावी प्रक्रिया में ‘बाहरी हस्तक्षेप’ करार देते हुए सवाल उठाए हैं.


