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सुख-दुख

एक भारतीय जब इस देश पहुंचा तो खाने का बिल आया सवा लाख से ऊपर! देखें तस्वीरें

गौतम कश्यप-

हर किसी का सपना होता है करोड़पति-अरबपति बनना। जब इस जिंदगी में यह सपना पूरा करना मुश्किल हो, तो चिंता की कोई बात नहीं। बस किसी तरह उज़्बेकिस्तान आ जाइए। यह देश आपका यह विशेष सपना पूरा कर देगा। इस देश का हर नागरिक अरबपति है।

आज हमने एक उज़्बेकी भोजनालय में खाना खाया तो 132 160 (एक लाख बत्तीस हजार एक सौ साठ ) का बिल आ गया। दरअसल, इस देश में हजार से कम शायद ही कुछ मिलता होगा। आज 1 भारतीय रूपया 132 उज़्बेकी सोम के बराबर है। यहाँ आपका वॉलेट किसी काम का नहीं है, पैसे झोला में भरकर चलना पड़ता है।

यहाँ चार- पाँच हजार किसी को ज्यादा या कम दे दिए तो भी न कोई खुश होगा, न कोई बुरा मानेगा। पहली बार इस देश में आकर महसूस हुआ कि सच में, पैसा तो हाथों का मैल है।


एक पर्यटक के तौर पर लिफ्ट लेकर यात्रा करने का अपना मज़ा है। रूस में मैंने कई बार अनजान लोगों के साथ ट्रक और कार से लंबी यात्राएं की है। मुझे लगा कि उज़्बेकिस्तान में भी ऐसा अनुभव लेना चाहिए। +42 डिग्री तापमान था, और मैं सड़क के किनारे खड़ा होकर गाड़ियों को लिफ्ट के लिए हाथ दिखा रहा था। करीब पाँच मिनट के इंतजार के बाद एक गाड़ी मुझसे थोड़ा आगे बढ़कर रुक गई।

मैं भाग कर गाड़ी तक पहुँच तो देखा कि चालक सीट पर एक महिला बैठी है। मैंने अपना पता बताते हुए कहा कि अगर आप उधर जा रही हैं, और चाहें तो मुझे वहाँ तक छोड़ सकती हैं। वह तुरंत राजी हो गईं और उन्होंने मुझे मेरे पते पर सुरक्षित छोड़ दिया। उज़्बेकिस्तान में बड़ी बहन (दीदी) को ओपा कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग अपने से बड़ी उम्र की महिलाओं को ‘ओपा’ कह कर ही संबोधित करते हैं। चालक सीट पर बैठी महिला हैं लोबर ओपा, इस्लाम धर्म का पालन करती हैं, साथ ही अपना व्यवसाय भी चलाती हैं। उज़्बेकिस्तान के आम लोग जितने पारंपरिक और धार्मिक हैं, उतने ही आधुनिक और खुले सोच के भी हैं। सोवियत संघ का प्रभाव इस देश और समाज पर आज भी दिखता है।

इस्लामिक देश होने के बावजूद यहाँ महिलायें स्वतंत्र होकर निजी फैसले लेती हैं। दुनिया के कई इस्लामिक देशों को इस देश से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है कि कैसे परंपराओं और आधुनिकता को एक साथ जिया जा सकता है। उज़्बेकिस्तान का ही पड़ोसी देश है अफगानिस्तान। सोवियत मॉडल के आधार पर पुराना अफ़गान समाज भी विकास के पथ पर चलने को तैयार हो रहा था, लेकिन अमेरिकी हस्तक्षेप के चलते यह पूरा क्षेत्र दशकों से युद्ध प्रभावित बना हुआ है, और वहाँ आज भी बदलाव के आसार नहीं दिखते हैं। पाकिस्तान, ब्रिटेन, सऊदी अरब आदि के अलावा अपने आपको कम्युनिस्ट कहने वाले देश चीन तक ने इस षड्यन्त्र में अमेरिका का खुल कर साथ दिया था, और उसका परिणाम है कि अफगानिस्तान में न सिर्फ महिलायें, बल्कि पूरा देश ही असुरक्षित है।

उज़्बेकिस्तान में धर्म समस्या नहीं है। परिचय के दौरान लोग हर जगह मुझसे मेरा धर्म पूछते हैं, क्योंकि यह यहाँ एक आम सवाल है। लेकिन मेरा उत्तर सुनने के बाद वे आगे बढ़कर मेरी मदद करते हैं। उज्बेकिस्तान वाकई में पर्यटकों के लिए बहुत ही शानदार और सुरक्षित देश है। खासकर भारतीयों के साथ उज़्बेक तुरंत घुल-मिल जाते हैं और यथासंभव सहायता करते हैं। उज़्बेकिस्तान में लोग आमतौर पर उज़्बेकी, रूसी और अंग्रेजी बोलते हैं। मैं मिला-जुलाकर इन तीनों भाषाओं में बात-चीत कर लेता हूँ, इसलिए मुझे इस देश में घर जैसा ही अनुभव हो रहा है।

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