Financial Express के संपादकों ने अंबानी परिवार के खिलाफ एक आलोचनात्मक रिपोर्ट को हटा दिया और उसकी जगह एक पक्षधर (favorable) लेख या प्रमोशनल कंटेंट डाल दिया। लेकिन उन्होंने गलती से उस लेख का URL (वेब एड्रेस) नहीं बदला, जिससे यह पता चल गया कि पहले वहां कोई आलोचनात्मक रिपोर्ट थी।
यह मीडिया हाउसों पर दबाव या सेंसरशिप की ओर भी इशारा कर सकता है, खासकर जब प्रभावशाली बिजनेस टाइकून की बात हो।
नीचे फाइनेंशियल एक्सप्रेस की ख़बर का url और उसके अनुसार मामला क्या था? जो पहले छपा और फिर हटा दिया गया- पढ़ें
दक्षिण अफ्रीका की एक संगठन ने मुकेश अंबानी के अलीबाग स्थित एनिमल रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर ‘वंतारा’ के लिए जंगली जानवरों के निर्यात को लेकर चिंता जताई है।
मुख्य बिंदु:
- किस संगठन ने चिंता जताई?
दक्षिण अफ्रीका की एक पशु संरक्षण संस्था ने इस निर्यात को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है।
- क्या मुद्दा है?
संगठन का मानना है कि जंगली जानवरों को भारत भेजने से वे अपनी प्राकृतिक जगह से दूर हो जाएंगे, जिससे उनके संरक्षण और कल्याण पर असर पड़ सकता है।
- कहां भेजे जा रहे हैं जानवर?
ये जानवर अंबानी के अलीबाग स्थित ‘वंतारा’ नामक रेस्क्यू सेंटर में भेजे जा रहे हैं, जहां उनकी देखभाल और पुनर्वास किया जाएगा।
- इसका क्या असर हो सकता है?
अगर यह निर्यात जारी रहता है, तो इससे दक्षिण अफ्रीका के वन्यजीव संरक्षण नीति और अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार पर प्रभाव पड़ सकता है।
संक्षेप में, यह खबर दक्षिण अफ्रीका से भारत में अंबानी के वंतारा सेंटर के लिए जंगली जानवरों के निर्यात पर उठ रहे विवाद को दर्शाती है।
आकार पटेल-
financial express editors bravely switched report critical of ambanis with plug but forgot to change url..



