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उत्तर प्रदेश

पूर्व चीफ सेक्रेटरी से 10 करोड़ रिकवरी नोटिस निरस्त!

क्या एसपी गोयल से ज़्यादा ताकतवर हो चुके हैं दीपक कुमार सिंह?

अभिषेक उपाध्याय-

‘टॉप सीक्रेट’ ने पूर्व चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार सिंह के खाते में दर्ज किए गए 10 करोड़ के जिस रिकवरी नोटिस का खुलासा किया था, उसमें उन्हें भारी राहत दे दी गई है।

मनोज कुमार सिंह से जुड़े इस रिकवरी नोटिस को दीपक कुमार सिंह ने बतौर APC (Agriculture Production Commissioner) रद्द कर दिया है और उन्हें भारी राहत दे दी है।

हैरानी वाली बात ये है कि मनोज कुमार सिंह के ख़िलाफ़ 4 अक्टूबर की ये रिकवरी नोटिस APC की सहमति के बाद जारी की गई थी।

ये बात नोटिस में साफ़ लिखी हुई है। टॉप सीक्रेट ने इसी सच्चाई का ख़ुलासा किया था। अब उन्हीं APC साहब ने 15 दिनों के भीतर ही इस फ़ैसले को पलट दिया!!

दिलचस्प बात ये भी है कि दीपक कुमार सिंह इस समय उन अधिकतर पदों पर विराजमान हैं जिन पर इससे पहले मनोज कुमार सिंह काबिज थे।

इनमें IDC, यूपीडा से लेकर यूपी डास्प और यहां तक कि APC का महत्वपूर्ण पद भी शामिल है। बड़ी बात यह है कि वे ACS वित्त भी हैं। इस लिहाज से वे ऐसे अनोखे अधिकारी बन चुके हैं जिनके पास वित्त, उद्योग, कृषि जैसे सारे महत्वपूर्ण महकमे मौजूद हैं, और इस लिहाज से वे चीफ सेक्रेटरी एसपी गोयल से भी अधिक पावरफुल हो चुके हैं। 

इससे पहले IDC, यूपीडा और डास्प जैसे महकमे चीफ सेक्रेटरी शशि गोयल के पास थे। मगर एक झटके में ये सब उनसे ले लिए गए।

चर्चाएं तब तेज हो गईं जब ये सारे महत्वपूर्ण महकमे एक ही अधिकारी को सौंप दिए गए जबकि यूपी में अधिकारियों की कोई कमी नहीं है।

अब इन्हीं दीपक सिंह ने बतौर APC और प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर यूपी डास्प, पहल करते हुए  इस नोटिस को निरस्त कर दिया है और मनोज कुमार सिंह को भारी राहत मिल गई है। 

सवाल है कि आख़िर यूपी सरकार के मानस पटल में अचानक से वो कौन सा ब्रहम ज्ञान जाग्रत हो गया कि अपनी ही सरकार के 4 अक्टूबर के नोटिस को 21 अक्टूबर को धराशायी कर दिया गया?

क्या 4 अक्टूबर को ब्यूरोक्रेसी का चंद्रमा किसी राहु का ग्रास बनकर चंद्रग्रहण का शिकार बन गया था और 21 अक्टूबर आते आते उसने शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा में नहाकर ‘सब चंगा सी’ का ब्रह्राज्ञान प्राप्त कर लिया?

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