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अरुण धुरी ने मीटिंग बुलाकर कहा- ”यार इस मोदी की कैसे बैंड बजाएं…. कुछ मसाला दो….”

अरुण धुरी जी ‘टीवी टुंडे कबाब’ ग्रुप के सारे एडिटर्स को बुलाकर गहन मंत्रणा कर रहे हैं. देखिए मीटिंग का दृश्य…

अरुण धुरी जी ‘टीवी टुंडे कबाब’ ग्रुप के सारे एडिटर्स को बुलाकर गहन मंत्रणा कर रहे हैं. देखिए मीटिंग का दृश्य…

अरुण धुरी: “यार कैसे बैंड बजाएं इस मोदी की.. कुछ मसाला दो ताकि इस हेलीकाप्टर घोटाले को दबाया जाए.”

करन कापर: “अरे हमारे पास बीजेपी के एक ऐसे नेता का नंबर है जो मोदी से जला भुना रहता है.”

अरुण धुरी: “भाई तुम अरुण शौरी की बात तो नहीं कर रहे हो, एक साल पहले उसका इंटरव्यू लिया था, साला किसी ने भाव नहीं दिया. बीजेपी संसदीय दल ने मीटिंग भी नहीं की शौरी को निकालने के लिए. आज भी बीजेपी का सदस्य है. ये फ्लॉप शो नहीं चलेगा.”

‘आजकल तक’ के हुन्न रंगून हाजपेयी जी बोले: “सर इनसे अच्छा तो हमने कर डाला. कल परिकर और स्वामी ने संसद में जोरदार स्पीच दी थी. क्रांतिकारी. पर हमने उसको लील लिया. मिशेल ने मोदी को फ़िक्सर बोला था कुछ महीने पहले उसको ख़ास खबर बनाकर दिखाया.”

इस बीच राजकाजदीप बरबराई अचानक जागे, सवाल दागते हुए: “और सर सुना है वो हेलीकाप्टर का पैसा कुछ पत्रकारों को दिया गया था. हेलीकाप्टर मामले से ज्यादा जरूरी देश के बाकी मुद्दों को न्यूज़ पर दिखाते रहने के लिए. वो पैसा आखिर…”

अरुण धुरी (बीच में काटते हुए): “यार तुम मुद्दे से भटक रहे हो. हम पैसा कमाने नहीं देश की सेवा करने के लिए अपने चैनल चलाते हैं. समझे आप लोग.”

राजकाजदीप ने शांति के साथ ऐसा मुँह बना लिया जैसा मेडिसन गार्डन स्क्वायर पर थप्पड़ खाने के बाद बनाया था. बाकी एडिटर्स मंद मंद मुस्कराने लगे थे. पर अपनी मुस्कराहट को धुरी जी की तारीफ की तरह चेहरे पर प्रकट कर रहे थे.

हाजपेयी जी: “सर इनसे कुछ नहीं होगा. आप बताइए क्या करना है.”

अरुण धुरी: “अब साला ये भी हम ही बताएं. तुम हिंदी वाले हो भाई. फिर भी कापर जी से अच्छा  काम कर रहे हो. पर इन्टेलेकचुअल लोगो को साधने के लिए अंग्रेजी में बात करना होता है. इतना बड़ा हंडिया टुडे न्यूज़ चैनल लांच कर दिया है, लानत है कोई ढंग का स्कैंडल नहीं ला पा रहे हो.”

करन कापर: “सर अरुण में कुछ बात है. अरुण में वो दम है कि बीजेपी की खटिया खड़ी कर देगा.”

अरुण धुरी (गला साफ़ करते हुए, और अपनी टाई को कसते हुए): “हाँ हाँ ठीक है, बुला लो शौरी जी को. ये देख लेना इस बार कुछ विस्फोटक होना चाहिए. टीआरपी और समाज सेवा एक साथ होनी चाहिए.”

हाजपेयी: “बहुत ही क्रन्तिकारी हो जायेगा.”

अरुण धुरी: “हाजपेयी जी ये क्रांति की बातें करना छोडिये. देखो कापर टीआरपी लाने जा रहा है. तुम भी कुछ बढ़िया माल लाओ फिर अगली मीटिंग में बात करेंगे.”

धुरी जी और सारे चेले अपना अपना कॉफ़ी मग उठाकर मीटिंग से बाहर निकल जाते हैं.

इस व्यंग्य कथा के लेखक दिवाकर सिंह आईटी फील्ड से जुड़े हुए हैं और नोएडा से खुद की कंपनी संचालित करते हैं. उनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

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