लखनऊ- उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज) की प्रांतीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक राजधानी लखनऊ (विधायक निवास-2, दारुलशफा) के कॉमन हॉल में आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश भर से आए पत्रकारों ने हिस्सा लिया और पत्रकारों के मान-सम्मान की रक्षा, सुरक्षा एवं 60 वर्ष की आयु उपरांत पेंशन योजना लागू करने की मांग को लेकर पुरजोर आवाज बुलंद की। इस दौरान संगठन के संस्थापक महामंत्री स्व. राधेश्याम लाल कर्ण के योगदान को भी शिद्दत से याद किया गया।
कार्यक्रम में ‘उपज’ के अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह, उपज के महासचिव आनंद लाल कर्ण, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (NUJ) के राष्ट्रीय महामंत्री त्रिवेणी नारायण तिवारी, NUJ (I) के पूर्व अध्यक्ष अशोक मलिक तथा एपीएन न्यूज़ के वरिष्ठ संपादक डॉ. प्रसून शुक्ला मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जेडीयू (एस) के प्रदेश अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
“पेंशन मांगना भीख या दान नहीं, हमारा अधिकार”
बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ संपादक डॉ. प्रसून शुक्ला ने शासन-प्रशासन के रवैये पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि एक सांसद पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद आजीवन पेंशन का हकदार बन जाता है, लेकिन समाज और लोकतंत्र के लिए 24 घंटे अपनी पूरी जिंदगी खपा देने वाले पत्रकार को 60 साल की उम्र के बाद भी सम्मानजनक पेंशन से वंचित रखा जा रहा है।
डॉ. प्रसून शुक्ला ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यह हमारी भीख या दान नहीं है, यह हमारा संवैधानिक व वैधानिक अधिकार है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा को मान्यता प्राप्त है। यदि सरकार हमें हमारा अधिकार देती है तो यह उसका सम्मान होगा, नहीं तो आने वाली व्यवस्था इसे लागू करेगी। पत्रकार किसी एहसान के मोहताज नहीं हैं।”
तहसील, कस्बों और ग्रामीण पत्रकारों के दर्द पर चर्चा
बैठक में वक्ताओं ने रेखांकित किया कि पत्रकारिता की असली रीढ़ प्रदेश के जिलों, कस्बों और गांवों में काम करने वाले जमीनी पत्रकार हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद सामाजिक कुरीतियों और अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं। देश के कई राज्यों में पत्रकारों के लिए पेंशन योजना और सुरक्षा कानून लागू हो चुके हैं, ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार को भी अविलंब पत्रकार सुरक्षा कानून व सम्मानजनक पेंशन योजना लागू करनी चाहिए।
प्रमुख मांगें:
उत्तर प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त व गैर-मान्यता प्राप्त जमीनी पत्रकारों के लिए 60 वर्ष की आयु के पश्चात सुनिश्चित पेंशन योजना लागू की जाए। पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ का प्रभावी निर्माण हो। कर्तव्य पालन के दौरान उत्पीड़न, फर्जी मुकदमों और हमलों पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। दिवंगत व वृद्ध पत्रकारों के आश्रितों के लिए विशेष आर्थिक सहायता कोष का गठन हो।
बैठक के अंत में प्रदेश अध्यक्ष सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारों के हक और स्वाभिमान की इस लड़ाई को प्रांतीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक मजबूती से लड़ा जाएगा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पत्रकार, पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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