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उत्तर प्रदेश

बीएचयू में डॉ टीके लाहिड़ी की पिटाई के आरोपी डॉक्टर को मीडिया से झूठ बोलकर बचाने वाले चिकित्सा अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?

डॉ ओम शंकर-

आज कई लोग डॉ. लाहिड़ी साहब को पीटने के आरोपी डॉ. अरविंद पांडे के बचाव में उनके रिश्तेदारों से पूछ रहे हैं कि वे आज उनकी सेवा के लिए उपलब्ध क्यों नहीं हैं।

  • जबकि सवाल यह होना चाहिए कि आरोपी के विरुद्ध अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • वह कब जेल जाएंगे,
  • कब BHU से निष्कासित होंगे और
  • डॉ. लाहिड़ी साहब को न्याय कब मिलेगा?

प्रशासन और मेडिकल सुपरिटेंडेंट घटना से जुड़े तथ्यों को छिपाने, सच को बाहर आने से रोकने/दबाने के लिए एक संगठन विशेष से संबंधित अधिकारियों द्वारा जाँच करवाने, जो पहले से ही डॉ. अरविंद पांडे से व्यक्तिगत तौर पर जुड़े हैं, और मीडिया में झूठी और भ्रामक जानकारी देने के आरोपी हैं।

डॉ. अरविंद पांडे के पक्ष में मीडिया में झूठ बोलकर उनका बचाव करने वाले चिकित्सा अधीक्षक के विरुद्ध भी कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?

घटना के दस दिन बीत जाने और चेहरे के निशान काफी हद तक मिट जाने के बाद, दूर से मीडिया शूट कर यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि जैसे उनके साथ कभी डॉ. अरविंद पांडे द्वारा मारपीट हुई ही नहीं थी।

मीडिया में कुलपति जी द्वारा अपने PRO के माध्यम से ऐसी झूठी और भ्रामक जानकारी दिलवाई गई, जैसे कि डॉ. लाहिड़ी साहब मानसिक रोग से ग्रसित हैं और कुछ भी बोलने, समझने और करने की स्थिति में नहीं हैं।

जबकि प्रशासन द्वारा जारी वीडियो में हीं डॉ. लाहिड़ी साहब सामान्य, सजग और मानसिक रूप से स्वस्थ दिखाई देते हैं। वे आक्रामक तो बिल्कुल नहीं दिखते।

स्वयं आरोपी डॉ. अरविंद पांडे ने भी अपनी सफाई में उनके आक्रामक होने का कोई दावा नहीं किया है।

वीडियो में भोजन के बारे में पूछे जाने पर वे सोच-समझकर स्पष्ट रूप से जवाब देते हैं कि खाना अच्छा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस व्यक्ति ने मरीजों की सेवा के लिए विवाह तक नहीं किया, जिसने अपनी पूरी जिंदगी BHU और मरीजों की सेवा में समर्पित कर दी, जिसने जन्म के रिश्तों से ऊपर BHU, काशी और पूर्वांचल की जनता को अपना परिवार माना, आज उसी के साथ कथित मारपीट के बाद क्या हम उन्हें न्याय दिलाने के बजाय आरोपी के बचाव में खड़े हो सकते हैं?

इससे बड़ी विडंबना और शर्म की बात क्या हो सकती है?

जिन जन्मजात रिश्तेदारों को डॉ. लाहिड़ी साहब ने जीवन में अपना परिवार नहीं माना, उनकी सेवा की जिम्मेदारी आज उन पर कैसे थोपी जा सकती है?

जब उनके द्वारा तन, मन और धन से बनाए गए वास्तविक सेवा परिवार और समाज ने ही उनके साथ खड़े होने की जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो क्या रिश्तेदारी के नाम पर सवाल उठाना उचित है?

डॉ. लाहिड़ी साहब के रिश्तेदारों ने BHU के कुलपति और प्रशासन से आरोपी को दंडित करने की माँग की है और लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

फिलहाल इतना करना भी उनकी जिम्मेदारी निभाने के लिए पर्याप्त है। आज जरूरत रिश्तेदारों से सवाल पूछने की नहीं, बल्कि यह पूछने की है कि डॉ. लाहिड़ी साहब को न्याय कब मिलेगा और दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

अस्पताल में सफाई कर्मचारियों से लेकर चिकित्सकों तक की भूमिका स्पष्ट है। वरिष्ठ चिकित्सकों का मूल कार्य मरीज को देखना, बीमारी निर्धारित करना तथा इलाज लिखना होता है।

शोधार्थी चिकित्सकों का कार्य वरिष्ठ चिकित्सकों की सलाह का अनुपालन करना तथा आपात स्थिति से निपटना इत्यादि होता है।

मरीजों को दवाइयाँ लगाना, उनकी साफ-सफाई करना, बिस्तर लगाना तथा खाना-पानी खिलाना इत्यादि नर्सिंग स्टाफ की जिम्मेदारी होती है।

अर्थात, अगर आप सेवा की बात करेंगे, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ उठाता है। सफाई कर्मचारियों का कार्य कमरे आदि की सफाई करना होता है।

इसलिए, डॉ. अरविंद पांडे के पक्ष में वकालत करने वाले जो लोग उनके द्वारा डॉ. लाहिड़ी साहब की सेवा किए जाने की अफवाह फैला रहे हैं, वह झूठी है। और न ही फोर्सफुल रेस्ट्रेंट करना डॉक्टर का कार्य है।

डॉक्टर का कार्य, जरूरत पड़ने पर, सिर्फ उचित आदेश देना होता है। उनके पक्ष में वकालत करने वालों की नजर में अगर सेवा करने का अर्थ थप्पड़ और घूँसे मारना है, तो डॉ. अरविंद पांडे ने जरूर डॉ. लाहिड़ी साहब की सेवा अपने पिताजी की तरह की है।

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