फर्जी लोग प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचते रहे हैं। कार्यशैली में सेवा तो छोड़िए सामान्य प्रशासन देने की नीयत भी नहीं दिखती है। खबरों से सरकार के प्रचार की कोशिश अक्सर दिखती है। वह गलत न भी हो तो अभी भी कांग्रेस की आलोचना होती है और अपने एक काम का उल्लेख नहीं होता है।
संजय कुमार सिंह
दिल्ली के सत्य निकेतन में छह सितंबर को एक पांच मंजिली इमारत गिरने की घटना के बाद आज नौ सितंबर को द हिन्दू की लीड खबर है, फ्रेट कॉरिडोर का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आलोचकों पर निशाना साधा। खबरों के अनुसार, उनका भव्य स्वागत हुआ। दो कॉलम की फोटो में प्रधानमंत्री मंच पर कैट वॉक जैसा कुछ करते हुए दिख रहे हैं। कैप्शन है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को वडोदरा में कार्यक्रम में मौजूद लोगों का अभिवादन करते हुए। खबर का उपशीर्षक है, प्रधानमंत्री ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अहम हिस्सों का उद्घाटन किया; अपनी सरकार के ख़िलाफ़ राहुल गांधी के अभियान को ‘झूठ की गूँज’ बताते हुए मोदी ने कहा कि उनके विरोधी शिकायतें करते रहेंगे। इसके साथ दो कॉलम की खबर अलग है, सुप्रीम कोर्ट स्टूडेंट हॉस्टल्स के लिए पूरे देश में लागू होने वाले सुरक्षा नियमों पर विचार कर रहा है।
द टेलीग्राफ की लीड पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा पंडालों के पारंपरिक स्वरूप, थीम और सजावट में आ रहे बदलावों को लेकर चर्चा है। इसमें पारंपरिक बंगाली संस्कृति की जगह उत्तर भारतीय सांस्कृतिक, स्थापत्य और धार्मिक शैलियों का प्रभाव बढ़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद ऐसा किए जाने का विरोध भी हो रहा है। द टेलीग्राफ ने इसके साथ पेरिस के एफिल टावर का मामला भी बताया है जो एक हिन्दू धार्मिक समूह के दौरे के बाद हड़ताल के कारण बंद रहा। असल में दौरे के दौरान वहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों को उनके वर्कस्टेशन से हटने/बाहर रहने के लिए कहा गया था। इस लैंगिक भेदभाव और अनुचित व्यवहार के विरोध में एफिल टावर के कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी, जिससे स्मारक को बंद करना पड़ा और पेरिस अधिकारियों ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। दि एशियन एज की लीड गुजरात के लिए 35 हजार करोड़ की परियोजनाओं की घोषणा और नाराज फूफा पर प्रधानमंत्री के विचार हैं।
देशबन्धु की लीड है, दिल्ली पीजी हादसा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कल होगी सुनवाई, अवैध निर्माण के बड़े केस से जुड़ सकता है मामला। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट इमारतों की अपनी जांच का विस्तार करके पीजी को भी शामिल कर सकता है। अमर उजाला में भी पहले पन्ने की दोनों खबरें यही हैं। झूठ की गूंज से गुमराह करने वाले हर चौराहे पर मिलेंगे, मगर युवा सच्चाई के साथ : मोदी। एक सच्चाई टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताई है, “पुलिस वालों ने कहा : (बिल्डिंग के) मालिक को पता था कि आधार कमजोर है (फिर भी) चार अतिरिक्त मंजिलें बनाईं”।टाइम्स ऑफ इंडिया ने ही एक खबर के साथ दिल्ली की हाल की त्रासदियों का उल्लेख किया है जिसका शीर्षक है, 2026 में शहर को हिला देने वाली त्रासदियां लेकिन स्पष्ट रूप से जो पर्याप्त नहीं हैं।
सत्य निकेतन का हादसा दिल्ली में ही इस साल का (कम से कम) चौथा है तो सरकार के लोग बुक माई शो के जरिए प्रधानमंत्री की लोकप्रियता बता रहे थे। प्रधानमंत्री का भाषण जो था उसका पता आगे के कुछ और शीर्षक से चलेगा। प्रधानमंत्री के स्तर पर कार्रवाई के लिए 3 मई, 30 मई, 3 जून और 6 सितंबर के हादसे पर्याप्त हों या नहीं, अमर उजाला की खबर के अनुसार – देश भर में इमारतों की जांच पर विचार कर रहा है शीर्ष कोर्ट। खबर के साथ छपी फोटो का कैप्शन है, सत्य निकेतन में कई संपत्तियों को सील किया गया। इसके चलते उसमें रहने वाले लोगों ने सामान बाहर निकाल लिया है। अब वे दूसरा ठिकाना ढूंढ़ रहे हैं।
सच्चाई है कि दिल्ली में (सरकारी) हॉस्टल ही नहीं, कोचिंग के लिए सुरक्षित परिसरों की भी कमी है। चर्चित घटनाओं में एक 27 जुलाई 2024 की है। ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित ‘राऊज आईएएस स्टडी सर्किल’ की बेसमेंट में चल रही लाइब्रेरी में पानी भर जाने से तीन बच्चों की मौत हो गई थी। इससे पहले 15 जून 2023 को संस्कृति आईएएस (व अन्य) कोचिंग सेंटर में आग लग गई थी। इसमें 61 से अधिक छात्र घायल हुए थे। आग बिजली के मीटर/एसी में शॉर्ट सर्किट से लगी थी। इमारत में बाहर निकलने का एक ही संकरा रास्ता (सीढ़ी) था, जो धुएं और आग से ब्लॉक हो गया था। जान बचाने के लिए छात्रों ने तीसरी और चौथी मंजिल की खिड़कियों से तारों और रस्सियों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश की, जबकि कई छात्र घबराहट में नीचे कूद गए थे।
द हिन्दू और टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, पांच महीने में 23 मौत की सजा सुनाने वाले मुजफ्फरनगर के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज रवि कुमार दिवाकर का मामला चर्चा में है। खबरों के अनुसार, मुजफ्फरनगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने एक प्रशासनिक आदेश जारी कर जज दिवाकर की अदालत से हत्या से जुड़ी 97-100 गंभीर फाइलों (मुकदमों) को वापस ले लिया। इस पर जज दिवाकर ने लिखा, “फाइलें वापस लेना माफिया, गैंगस्टर और अपराधियों को बचाने के लिए किया गया है… मैं डरपोक जज कहलाने के बजाय मरना पसंद करूंगा।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धमकियां दी जा रही हैं कि अगर उन्होंने ज्यादा टिप्पणी की तो उनका तबादला जिला से बाहर करवा दिया जाएगा।
इस खबर से मुझे डबल इंजन वाले मध्य प्रदेश का एक मामला याद आता है। बल्ला कांड के नाम से चर्चित इस घटना में तत्कालीन भाजपा विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता/मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय का नाम आया था। खबरों के अनुसार, इंदौर नगर निगम के भवन निरीक्षक/बिल्डिंग इंस्पेक्टर धीरेंद्र सिंह बायस 26 जून 2019 को इंदौर नगर निगम की टीम के साथ गंजी कंपाउंड इलाके में एक पुराने/जर्जर मकान को गिराने पहुंचे थे। स्थानीय लोगों के बुलाने पर तत्कालीन विधायक आकाश विजयवर्गीय समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान बहस हुई और आकाश विजयवर्गीय ने नगर निगम अधिकारी धीरेंद्र बायस पर सबके सामने क्रिकेट बैट से पीट दिया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और उनके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी हुई (बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी)। 9 सितंबर 2024 को इंदौर की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने सबूतों के अभाव में आकाश विजयवर्गीय और 9 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। पीड़ित अधिकारी धीरेंद्र बायस ने अदालत में बयान दिया कि जब उन्हें चोट लगी, तब वे मोबाइल पर बात करने में व्यस्त थे, इसलिए वे यह नहीं देख पाए कि उन्हें बैट किसने मारा। कोर्ट में वायरल वीडियो की फॉरेंसिक प्रामाणिकता साबित नहीं की जा सकी। अभियोजन पक्ष के अन्य गवाह भी अपने बयानों से मुकर गए।
यही नहीं, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष अरावली पर बनी उच्चाधिकार प्राप्त विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 28 फरवरी 2027 तक का समय माँगा था। इस परसीजेआई ने कहा: “कमेटी ने मूल रूप से मेरे रिटायरमेंट तक मामले को टालने के लिए समय मांगा है… उन्हें स्पष्ट रूप से मेरे रिटायरमेंट के बाद की तारीख मांगनी चाहिए थी। ऐसा लगता है कि वे मेरे सेवानिवृत्त होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हम इसकी अनुमति नहीं देंगे।” (सीजेआई का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है।) अरावली की पहाड़ियों का मामला विवादों में रहा है और पर्यावरण मंत्री के चार करीबी सहायकों को अचानक एक साथ हटाया जा चुका है और इसपर कोई स्पष्टीकरण नहीं है सो अलग। यह सब 2018 में चार जजों की ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस के बावजूद है इसलिए क्या कुछ हो पाएगा वह भी मुद्दा है।
दूसरी ओर, संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करके, खुलेआम हिन्दू मुसलमान करके, कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के ऐसे आरोप लगाकर जो बाद में साबित नहीं हुए, सत्ता पाने वाले चंदा चोरी के बाद भी बेशर्मी कर रहे हैं। राफेल सौदे के समय चौकीदार चोर है का नारा लगा तो भाजपा के तमाम नेताओं ने चौकीदार होने की घोषणा की थी और चोर कहने पर एतराज होना ही था। उसके बाद से सब चंगा सी और भाजपा चुनाव जीतती रही है। प्रचार यह भी किया जाता रहा है कि राहुल गांधी चुनाव हारने का रिकार्ड बना चुके हैं। अब जब सरकार फंसी लग रही है, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भाषण के बाद कथित शुद्धिकरण के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग पर सुनवाई नहीं, उल्टे राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर हो गई। जवाब में कर्नाटक में भाजपा के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर लिखाई गई।
आज देशबन्धु में खबर है, हल्द्वानी शुद्धिकरण कांड के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के 20 एससी / एसटी सांसद मंगलवाल को संसद भवन थाने पहुंच गए। एसएचओ ने बताया कि हलद्वानी थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। खरगे ने आठ अगस्त को हलद्वानी के राम लीला मैदान में रैली की थी दो दिन बाद शुद्धिकरण की कार्रवाई की गई थी। मल्लिकार्जुन खरगे ने 13 अगस्त को यह मामला राज्य सभा में उठाया था। एफआईआर अब लिखी गई है। इसकी खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में सिंगल कॉलम में है। खबर के अनुसार, खरगे के कार्यक्रम को लेकर विवाद के संबंध में उत्तराखंड पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम के बाद एक सार्वजनिक मैदान में “शुद्धिकरण” की रस्म निभाई गई। इसे छुआछूत का मामला कहा जा रहा है लेकिन खबर के अनुसार सांप्रदायिक व जातिगत नफरत फैलाने के मकसद से इस रस्म के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ किया गया वीडियो फैलाया गया। एसपी (सिटी) मनोज कात्याल ने कहा, “अगर जांच के दौरान और लोगों की पहचान होती है, तो उनके नाम भी एफआईआर में जोड़े जाएंगे।” जिस मामले में खुद एफआईआर हो जानी चाहिए थी या लगभग एक महीने में जांच कर आश्वास्त हुआ जा सकता था कि आरोप सही या गलत, उसमें कल एफआईआर हुई जब दिल्ली में 20 एससी / एसटी सांसदों का दबाव पड़ा।
नवोदय टाइम्स दिल्ली में एक खबर का शीर्षक है, “नाराज फूफा जी को काम मिला : मोदी”। दैनिक भास्कर का शीर्षक है, “फ्रेट कॉरिडोर से ‘नाराज फूफा’ चिल्लाएंगे : मोदी”। दि इंडियन एक्सप्रेस में प्रधानमंत्री की इस फूहड़ता को उसी रूप में पेश नहीं करके कायदे से प्रस्तुत किया गया है। गुजरात में अगले साल दिसंबर 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस लिहाज से इंडियन एक्सप्रेस का फ्लैग शीर्षक है, गुजरात में 35,000 करोड़ रुपए मूल्य की परियोजनाओं की घोषणा। मुख्य शीर्षक है, फ्रेट कॉरीडोर्स पूर्ण, यूपीए (सरकार) फाइलें लंबित रखती थी : प्रधानमंत्री। इस खबर का इंट्रो है, “2014 से पहले की प्रशासनिक जड़ता पर प्रधानमंत्री : अटकती, लटकती, भटकती”।
हिन्दुओं का भला करने आई सरकार के कुशासन में कितने हिन्दू बेमौत मरे इसका हिसाब नहीं है जबकि दावा आग लगाने वालों को कपड़ों से पहचानने का था। छुआछूत फैलाने की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही है और 12 साल से ज्यादा पहले के कई आरोप साबित नहीं हुए फिर भी अपने काम बताने की बजाय पिछली सरकार को कोसा ही जा रहा है क्योंकि राजनीति अपने काम के लिए नहीं विपक्ष को कोस कर सत्ता में बने रहने की ही है। इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबारों का सहयोग है और जिसका नहीं था उसे राजकीय सेठ को दिलवा दिया गया है। पर वह अलग मुद्दा है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


