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सुख-दुख

नौ पत्रकारों की नौकरी जाने के बाद नीलेश मिश्रा ने मांगी माफी, दूसरे मीडिया घरानों से की रोजगार देने की अपील

Screenshot of a tweet by Neelesh Misra announcing the shutdown of a Gaon Connection vertical and upcoming layoffs, offering to share CVs of affected team members.

लखनऊ। ग्रामीण पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था गांव कनेक्शन से नौ पत्रकारों की नौकरी जाने के बाद मामला चर्चा में आने पर संस्थापक नीलेश मिश्रा ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी है। उन्होंने प्रभावित कर्मचारियों को लेकर दुख जताते हुए दूसरे मीडिया और कंटेंट संस्थानों से उन्हें रोजगार देने की अपील की है।

नीलेश मिश्रा ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि कुछ अत्यावश्यक परिस्थितियों के कारण गांव कनेक्शन के एक विभाग को बंद करना पड़ा और इसकी वजह से अपनी एक टीम को भी हटाना पड़ा। उन्होंने प्रभावित कर्मचारियों को प्रतिभाशाली और बेहतरीन लोग बताते हुए इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसके लिए दिल से माफी मांगी।

उन्होंने मीडिया और कंटेंट से जुड़े उद्यमियों और अधिकारियों से अपील की कि यदि वे वीडियो कंटेंट क्रिएशन, प्रोडक्शन, ग्राफिक्स या सोशल मीडिया मैनेजमेंट के क्षेत्र में सहयोगियों की तलाश कर रहे हैं तो उन्हें बताएं। नीलेश मिश्रा ने कहा कि वह प्रभावित कर्मचारियों के सीवी संबंधित संस्थानों को भेज देंगे।

गौरतलब है कि गांव कनेक्शन की ओर से इससे पहले Rural TV वर्टिकल बंद करने की जानकारी दी गई थी। संस्था ने कहा था कि यह वर्टिकल अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था और इसे चलाए रखने के बावजूद उसे बंद करने का कठिन फैसला लेना पड़ा। प्रभावित कर्मचारियों को तीन महीने की सैलरी देने और इस अवधि में उन्हें नई नौकरी तलाशने का मौका देने की बात भी कही गई थी।

अब नीलेश मिश्रा की माफी और दूसरे मीडिया घरानों से प्रभावित कर्मचारियों को नौकरी देने की अपील ने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।


Gmail screenshot of an email from Neelesh Misra in Hindi, with a red-highlighted sentence near the bottom.

नए-नए पत्रकारों से Neelesh Misra ऐसे बात करते हैं.
मुझे अचानक काम से निकाल दिया गया और जब मैंने उसपर सवाल पूछा था, तो धमकाया गया कि तुमने कई रास्ते बंद कर दिये हैं.
नीलेश जी की तरफदारी करने वालों आँखें फाड़ कर देख लो, जिनको आप तथाकथित ‘नैतिक पुरुष’ मानते हैं, उन्हें जब कोई कर्मचारी मेल करता है, तो जवाब में उनका अहंकार और दंभ किस स्तर तक पहुंच जाता है.
-सचिन धर दुबे


रणविजय सिंह-

अब जब न‍िलेश इस स्‍तर पर उतर आए हैं क‍ि अपने छर्रों से ट्वीट करवा रहे हैं, तो धमकी वाला मेल सार्वजन‍िक हो ही जाना चाह‍िए.

आपके पास पैसा नहीं तो कह‍िए क‍ि मेरे हालात ठीक नहीं हैं, आप पत्रकारों को क्‍यों कहते हैं क‍ि तुम अच्‍छा काम नहीं करते.

कम पैसे में कोल्‍हू के बैल की तरह काम लीज‍िए और जब काम न‍िकल जाए तो अचानक से न‍िकाल दीज‍िए.

कोई नोट‍िस नहीं, रात 2 बजे मेल भेजकर छुटकारा पा लीज‍िए.

स्‍क्रीन पर स्‍लो-स्‍लो बोलकर स‍िद्धांतवादी बनेंगे, और असल में कर्मचार‍ियों का खून चूसकर फेंक देंगे.

अभी तुम धमकी वाला मेल सार्वजन‍िक करो, लोगों को भी पता चले इनकी भाषा.

ये गलत कर द‍िया इन्‍होंने – अपने छर्रों से ये ग‍िरी हुई हरकत नहीं करवानी थी.

सच‍िन पहले धमकी वाला मेल सार्वजन‍िक करो. इससे भी नहीं मानते तो फ‍िर लोगों को फंड‍िंग के साथ जो खेल होता है वो भी समझाएंगे.

मूल खबर…

नीलेश मिश्रा वाले गाँव कनेक्शन से 9 पत्रकारों की छंटनी चर्चा में!

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
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