वाराणसी: बीएचयू के इमेरिटस और पद्मश्री प्रोफेसर डॉ. टीके लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट के मामले में बीएचयू प्रशासन और आरोपी डॉक्टर की ओर से सफाई सामने आई है। बीएचयू प्रशासन ने डॉ. लाहिड़ी के साथ मारपीट के आरोपों को खारिज किया है। वहीं, उनकी देखरेख कर रहे एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अरविंद पांडेय ने डॉक्टरों के वॉट्सऐप ग्रुप में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने डॉ. लाहिड़ी को थप्पड़ नहीं मारा, बल्कि सफाई की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उन्हें बलपूर्वक रोकने (Forceful Restraint) की कोशिश की गई थी।
डॉ. अरविंद पांडेय ने अपने संदेश में बताया कि पिछले करीब 4-5 महीनों से प्रो. लाहिड़ी उनकी देखरेख और मेडिकल बोर्ड की निगरानी में भर्ती हैं। उनके मुताबिक, बेड पर मल त्याग के बाद सफाई के दौरान डॉ. लाहिड़ी ने सहयोग नहीं किया और सफाई कर्मचारी को सफाई करने से रोक रहे थे। डॉक्टर का दावा है कि इस दौरान डॉ. लाहिड़ी लगातार उनके और सफाई कर्मचारी के चेहरे पर थूक रहे थे।
डॉ. पांडेय के अनुसार, सफाई की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उन्हें बलपूर्वक रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉ. लहरी को थप्पड़ नहीं मारा गया। डॉक्टर ने कहा कि उस समय उन्हें बलपूर्वक रोकने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था और ऐसा केवल उनकी सफाई के लिए किया गया था। उन्होंने घटना पर दुख भी जताया।
बीएचयू प्रशासन ने भी मारपीट से किया इनकार
बीएचयू प्रशासन ने रविवार को जारी बयान में डॉ. लहरी के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों को तथ्यहीन बताया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, डॉ. लहरी 27 जनवरी से छाती संबंधी समस्या के चलते सर सुंदर लाल अस्पताल में भर्ती हैं और उनका लगातार इलाज किया जा रहा है।
बीएचयू के अनुसार, बढ़ती उम्र के कारण डॉ. लहरी सिनाइल डिमेंशिया और व्यवहार में बदलाव जैसी मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसके अलावा उन्हें हृदय रोग और टीबी की भी शिकायत है। प्रशासन का कहना है कि उम्र से जुड़ी शारीरिक और मानसिक समस्याओं के कारण वह कई बार इलाज, दैनिक कार्यों और साफ-सफाई में सहयोग नहीं करते।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि डॉ. लहरी को विशेष चिकित्सीय निगरानी में रखा गया है। उनसे संबंधित शिकायत मिलने के बाद आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक वार्ड में पहुंचे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
जांच के लिए दो कमेटियां गठित
आईएमएस निदेशक डॉ. एसएन संखवार के मुताबिक, इस मामले में चिकित्सा अधीक्षक ने डॉ. अरविंद पांडेय को डॉ. लहरी की ड्यूटी से हटा दिया है। साथ ही मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने अस्पताल पहुंचकर डॉ. लहरी से मुलाकात की। उन्होंने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर, आईएमएस निदेशक और डीसीपी को शामिल किया गया है। राज्यमंत्री के मुताबिक, डॉ. लहरी ने अपने साथ किसी अप्रिय घटना से इनकार किया है।
परिजनों ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, डॉ. लहरी के परिजनों ने बीएचयू प्रशासन के दावों पर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें पहले से आशंका थी कि डॉ. लहरी को मानसिक रोगी बताकर मामले को अलग दिशा देने की कोशिश की जा सकती है। उनका दावा है कि परिवार का कोई न कोई सदस्य करीब हर 15 दिन में उनसे मिलने आता है।
परिजनों ने यह भी सवाल उठाया कि डॉ. लहरी पिछले करीब आठ महीने से अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन जब से वह डॉ. अरविंद पांडेय की निगरानी में हैं, तब से मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है।
बीएचयू प्रशासन के अनुसार, डॉ. लहरी के स्वास्थ्य की जांच के लिए हृदय रोग, सामान्य मेडिसिन, मनोचिकित्सा, वृद्धावस्था रोग, न्यूरोलॉजी, क्रिटिकल केयर, टीबी और छाती रोग समेत कई विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।

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