बच्चों के कहने पर कुछ रुपए बचत में से शेयर बाजार को सौंप दिए थे, ज़्यादातर डूब चुके हैं और हमें यह समझाया जा रहा है कि अर्थव्यवस्था की पिछली तिमाही की विकास दर 7.8% है!
-शीतल पी सिंह, वरिष्ठ पत्रकार
अश्विनी कुमार-
शेयर बाजार लगातार गिर रहा है और गिरावट के सारे रिकॉर्ड तोड़ने पर आमादा है. यूं तो कई वजहें हैं इस भयावह गिरावट की लेकिन देश के IT sector का इंडेक्स शेयर बाजार में रोज बड़ी बड़ी गिरावट झेल रहा है , उस पर किसी की नजर नहीं जा रही है. आईटी सेक्टर का वेटेज इंडेक्स में इतना ज्यादा है कि शेयर बाजार की गिरावट में इसमें लगातार हो रही गिरावट का बेहद अहम रोल है.
IT sector आखिर गिर क्यों रहा है ? वह इसलिए क्योंकि भारत दुनिया में हो चुकी AI revolution में कहीं है ही नहीं. इस AI क्रांति में लड़ाई अमेरिका, चीन और यूरोप के बीच है , भारतीय IT कम्पनियां इस लड़ाई से बाहर खड़ी अपनी पुरानी आउटडेटेड होती तकनीक पर आधारित business का झुनझुना लेकर खड़ी हैं. उनके ग्राहक और कारोबार का ग्राफ गिर नहीं रहा बल्कि बहुत तेजी से धराशाई हो रहा है.
उधर, एआई क्षेत्र में कारोबार का आकार कितना बड़ा हो रहा है इसका अंदाजा लगाना हो तो Nvidea के हाल के रिजल्ट और फ्यूचर ग्रोथ के अनुमान को देख लीजिए.
भारत की जीडीपी से बड़ी हो चुकी इस कंपनी की कुल वैल्यू बढ़ती ही जा रही है. Nvidea इन दिनों एआई कम्पनियों से चिप बनाने का इतना कारोबार पा रही है कि दुनिया की बड़ी बड़ी एआई कम्पनियों के ऑर्डर कई साल की वेटिंग पर हैं. भारत की कम्पनियां न तो एआई से जुड़े कोई ऑर्डर पा रही हैं और न ही Nvidea को ऑर्डर देकर एआई बाजार पर कब्जे के लिए लड़ रही उन कम्पनियों में शामिल हैं. हालात यह हैं कि अब एआई के दौर में उनकी परपंरागत सेवाओं की कोई खास जरूरत दुनिया को रह नहीं गई है.
राजीव गांधी के दौर में हुई कम्प्यूटर क्रांति से भारत दुनिया की बड़ी कम्प्यूटर ताकत बना. फिर मनमोहन सिंह की नीतियों से सॉफ्टवेयर में भारत ने चीन और अमरीका को टक्कर दी. लेकिन नरेंद्र मोदी का दौर जाहिलियत और अंधभक्ति का दौर है इसलिए अब आउटडेटेड होती सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के बाद हुई AI क्रांति में भारत ने कुछ नहीं किया.
कुल मिलाकर पिछले बारह साल में अनाप शनाप मुद्दों में उलझे भारत की इकॉनमी को सुपर पॉवर बनाने वाली सॉफ्टवेयर की ताकत खत्म होती जा रही है. बाजार और दुनिया का नया बादशाह जिस AI तकनीक से तय होना है, भारत उसमें दुनिया में दबदबा बनाने वाले देशों की सूची में शामिल ही नहीं है.


