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ये कौन सा विकास है जिसकी घोषणा होते ही शेयर बाजार भी “नाराज फूफा” बन गया?

Screenshot of a trading app showing the NIFTY NSE chart with price bars, volume, EMA 200, Moving Average lines, and a right-side price ladder.

कृष्ण कांत-

ये कौन सा विकास है जिसकी घोषणा होते ही शेयर बाजार भी “नाराज फूफा” बन गया?

जिस दिन से 7.8% का आंकड़ा जारी हुआ है, उसी दिन से बाजार रोज नीचे जा रहा है। जीडीपी का डेटा 31 अगस्त को जारी हुआ। 1 सितंबर से एक दिन बाजार सपाट रहा, बाकी सभी ट्रेडिंग सेशन में नीचे गिरा।

31 अगस्त को निफ्टी 24080 पर था। 8 सितंबर को 23635 पर बंद हुआ। आज फिर 100 पॉइंट्स से ज्यादा गिरावट है। 31 अगस्त के बाद से आज तक विदेशी ​निवेशकों ने भारतीय बाजार से 6000 करोड़ से ज्यादा निकाल चुके हैं।

कॉरपोरेट ने रंगाई पुताई करके अपने लिए एक कठपुतली तैयार की थी, अब उसे अपनी ही कठपुतली पर भरोसा नहीं बचा है।


GDP के आंकड़ों पर तो बजार सुभाष चंद्र गर्ग और रघुराम राजन के आंकलन को ही सही सिद्ध कर रहा है कि 7.8% ग्रोथ रेट झूठी है
निफ़्टी, 24100 के आसपास भाव था जो कि लगातार गिर रहा है, आज 23500 के भी नीचे आ चुका है
खैर स्वतंत्र भारद्वाज के कारण इस पर कोइ चर्चा ही नहीं हो पायी।
-गिरधारी लाल गोयल


शीतल पी सिंह-

सिर्फ़ और सिर्फ़ हेराफेरी

जैसा कि आजकल आम है सरकार ने अगस्त 2026 में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन बताया और दावा किया कि इसमें पिछले साल की तुलना में 14.8% की वृद्धि हुई है। साथ ही अप्रैल से अगस्त तक के 5 महीनों में 11% की वृद्धि बताई गई।

लेकिन पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग (डेक्कन हेराल्ड में) का कहना है कि सरकार ने एक तरकीब अपनाई है। उन्होंने 2025-26 के जीएसटी सेस (Compensation Cess) को चुपके से आंकड़ों से बाहर कर दिया है।

Social media post by Subhash Chandra Garg with a bold GST growth headline; profile photo on the left and a photo of stacked coins with GST-letter blocks beneath.

जब इस सेस को भी शामिल कर लिया जाए, तो 5 महीनों की असली ग्रॉस जीएसटी वृद्धि सिर्फ 4.08% रह जाती है और नेट वृद्धि तो और भी कम 1.30% हो जाती है।

यह प्रदर्शन बहुत कमजोर और निराशाजनक है। आजकल सुभाष चंद्र गर्ग मोदी सरकार के कार्यकाल के समय की आर्थिक सफलताओं के फ़र्ज़ी आँकड़ों का लगातार भंडाफोड़ कर रहे हैं और मोदीजी इन्हें नाराज़ फूफा कहकर अपनी खिसियाहट मिटा रहे हैं।

आम लोगों के लिए अच्छा है कि खुद मोदी सरकार के वित्त सचिव रह चुके गर्ग साहब अंदर के खेल को बाहर सामने ला रहे हैं।

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