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गाँव कनेक्शन ने बंद किया अपना Rural TV वर्टिकल!

ग्रामीण भारत की पत्रकारिता और गांव-किसानों से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर काम करने वाले मीडिया प्लेटफॉर्म Gaon Connection ने अपने एक महत्वपूर्ण वर्टिकल Rural TV को बंद करने का फैसला किया है। संस्थान का कहना है कि तमाम कोशिशों और लगातार संसाधन लगाने के बावजूद Rural TV अपेक्षित प्रदर्शन स्तर हासिल नहीं कर पाया। आखिरकार आर्थिक दबाव और दूसरे कारणों को देखते हुए इसे बंद करने का कठिन फैसला लेना पड़ा।

Gaon Connection की ओर से सोशल मीडिया पर जारी सफाई में कहा गया है कि Rural TV को चलाने के दौरान संस्थान लगातार नुकसान उठाता रहा, लेकिन इसके बावजूद टीम और वर्टिकल को बनाए रखने की कोशिश की गई। जब हालात में अपेक्षित सुधार नहीं आया तो वर्टिकल को बंद करना पड़ा।

कर्मचारियों के लिए तीन महीने की सैलरी

Rural TV बंद होने के बाद वहां काम कर रहे कर्मचारियों को लेकर भी संस्थान ने अपना पक्ष रखा है। Gaon Connection के मुताबिक, प्रभावित कर्मचारियों को तीन महीने की सैलरी दी जाएगी। इन तीन महीनों में उन्हें ऑफिस आने की जरूरत नहीं होगी और वे दूसरी जगह नौकरी तलाश सकते हैं।

संस्थान का कहना है कि इस अवधि में कर्मचारियों के बेनेफिट्स और इंश्योरेंस समेत दूसरी सुविधाएं भी जारी रहेंगी। उन्हें तीन महीने तक कर्मचारी के तौर पर ही दिखाया जाएगा।

इतना ही नहीं, Gaon Connection का दावा है कि वह प्रभावित कर्मचारियों के लिए दूसरी जगह रोजगार तलाशने और उन्हें प्लेस कराने के लिए भी सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है।

टीम फिर बनेगी, लेकिन लखनऊ में नहीं

Gaon Connection ने यह भी संकेत दिया है कि Rural TV से जुड़ी टीम को भविष्य में दोबारा तैयार किया जा सकता है। हालांकि नई टीम लखनऊ में नहीं होगी। यानी ग्रामीण पत्रकारिता और वीडियो कंटेंट से जुड़े इस प्रयोग को पूरी तरह खत्म करने के बजाय संस्थान भविष्य में इसे किसी दूसरे स्थान या नए मॉडल के साथ आगे बढ़ाने की संभावना रखता है।

सोशल मीडिया पर उठे सवालों पर संस्थान की सफाई

Rural TV बंद किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर सामने आए एकतरफा नैरेटिव पर संस्थान ने आपत्ति जताई है। Gaon Connection का कहना है कि किसी भी मामले में दूसरी तरफ का पक्ष भी सामने रखा जाना चाहिए।

Tweet by Neelesh Misra about GaonConnection shutdown and paying three months’ salary; includes a screenshot of a tweet by Sachin Gupta.

नीलेश के उपरोक्त ट्वीट का सचिन गुप्ता द्वारा दिया गया जवाब पढ़ें-

मुझे कोई सपना नहीं आया कि न्यूज संस्थान “गांव कनेक्शन” ने रातोंरात अपने 9 पत्रकार नौकरी से निकाल दिए। जाहिर सी बात है कि संस्थान से ही मुझे पता चला होगा।

“गांव कनेक्शन” ने 2 महीने पहले तक भर्तियां की। इस छटनी के शिकार ज्यादातर वो पत्रकार हैं, जिन्हें आपने एक साल के भीतर नौकरी दी थी। जब संस्थान 2 महीने पहले भर्तियां कर रहा था, क्या तब भी आपको पता नहीं था कि हम उस सेगमेंट को बंद करने जा रहे हैं तो नई भर्ती क्यों करें? अगर नहीं पता था तो आप एक फेल्योर प्रबंधक हैं, अगर पता था तो आपने उन पत्रकारों के करियर से खेलने का काम किया है।

जो पत्रकार 4–6 महीने पहले ही दूसरे संस्थान से जॉब छोड़कर आपके यहां भर्ती हुआ, उसे आपने एक झटके में पैदल कर दिया। अब वो दूसरी कंपनी में जाएगा तो सबसे पहले यही पूछा जाएगा कि वहां जॉब से निकाला क्यों गया था?

जब आप भर्ती करते हैं तो प्रॉपर इंटरव्यू लेते हैं। नियम शर्तें बताते हैं। क्या नौकरी से निकालने से पहले इसी तरह सबको बताया गया?

2 महीने पहले नौकरी का विज्ञापन-

Hiring poster announcing job openings; positions include Video Editor, Multimedia Journalist, Website & Social Media Content Creator; Location: Lucknow; apply via hr@gaonconnection.com

संस्थान ने साफ किया कि Rural TV बंद करने का फैसला कई कारणों से लिया गया है और इसे सिर्फ एक घटनाक्रम या कर्मचारियों से जुड़े किसी एक मुद्दे से जोड़कर देखना सही नहीं है।

Gaon Connection की यह सफाई एक ऐसे समय में आई है जब डिजिटल मीडिया संस्थानों के सामने कंटेंट की लागत, डिजिटल रेवेन्यू, विज्ञापन बाजार और लगातार बढ़ते ऑपरेशनल खर्च बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में किसी खास वर्टिकल को बंद करना और सीमित संसाधनों को दूसरे क्षेत्रों में लगाना मीडिया संस्थानों की बदलती रणनीति का हिस्सा भी माना जा सकता है।

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