सरकार के निशाने पर एक बार फिर 4 PM आ गया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 4 PM के एक थंबनेल को टैग करते हुए लिखा है कि इस तरह के यूट्यूब और फेसबुक चैनलों के खिलाफ संसदीय समिति ने लोकसभा अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि “हम भारत को बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका या थाईलैंड नहीं बनने देंगे।”

यह कोई पहला मौका नहीं है जब सरकार ने 4 PM या इसके संपादक संजय शर्मा को निशाना बनाया हो। कभी उनके खिलाफ आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) की टीमें गठित की गईं, कभी उनके दफ़्तर पर हमला हुआ। सरकार ने उनकी पत्रकार मान्यता रद्द कर दी, अख़बार को मिलने वाले विज्ञापन रोक दिए, इनकम टैक्स और ईडी की जांचें पीछे लगा दी गईं।
हाल ही में पहलगाम हमले के बाद चैनल को यह कहकर बंद कर दिया गया कि वह “राष्ट्र विरोधी” है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की दलीलों के बाद संजय शर्मा को जीत मिली और चैनल दोबारा चालू हो गया। इस कार्रवाई की आलोचना सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बड़े मीडिया संस्थानों ने की। और जब सरकार ने चैनल पर ताले लगाने की कोशिश की, तो संजय शर्मा ने 24 घंटे के भीतर ही दुबई पहुँचकर 4 PM Middle East लॉन्च कर यह साबित कर दिया कि वह डरने वालों में से नहीं हैं।
दरअसल, सरकार की यह बौखलाहट 4 PM की ताक़त का सबसे बड़ा सबूत है। पिछले डेढ़ साल से यह चैनल देश के सभी यूट्यूब न्यूज़ चैनलों में लगातार नंबर वन पर है। हर दिन करीब सवा करोड़ व्यूज़ जुटाकर इसने मीडिया जगत में तहलका मचा दिया है। सरकार से सीधे सवाल पूछने की हिम्मत कर संजय शर्मा ने जो साहस दिखाया है, वही आज सरकार की बेचैनी का कारण है। निशिकांत दुबे का ट्वीट इस बेचैनी की ताज़ा मिसाल है।
इस मामले में 4पीएम न्यूज नेटवर्क के संपादक संजय शर्मा ने लिखा है-
बहुत बहुत शुक्रिया डिग्री दुबे जी. आप पहले भी हमारे चैनल को बंद कराने की कोशिश कर चुके हैं. फिर जोर लगाईये! पहलगाम हमले में हमने चंद सवाल क्या पूछे आपकी सरकार ने हमें देश विरोधी होने का आरोप लगाकर हमारा चैनल ही बंद करवा दिया था. आपको भले ही ना हो हमको देश के संविधान पर पूरा भरोसा है.
जब आपकी सरकार ने चैनल बंद कराया था तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चैनल खोला गया था. गडकरी आपकी सरकार को सच में दर्द दे रहे हैं ये आपने एक बार फिर साबित कर दिया.
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