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उत्तर प्रदेश

महिला पत्रकार को मेयर पद के प्रत्याशी के रूप में आत्मसात नहीं कर पा रहे हैं सपाई!

नदीम-

लखनऊ के मेयर चुनाव में समाजवादी पार्टी की सबसे बड़ी दिक्कत यह हो गई है कि उनकी प्रत्याशी कभी समाजवादी पार्टी का हिस्सा नहीं रहीं। उनके पति लंबे वक्त तक कांग्रेस की राजनीति करते रहे, फिर कुछ समय के लिए एनसीपी की राजनीति की। सपा के पार्षद उम्मीदवार उन्हें आत्मसात नहीं कर पा रहे हैं।

वंदना मिश्रा

उनके प्रचार में मेयर प्रत्याशी गायब है। कल जब इसकी सूचना आलाकमान तक गई तो उन्हें लखनऊ प्रभारी अरविंद सिंह गोप को मोर्चा सम्भालने के लिए मैदान में उतारा। पार्षद उम्मीदवारों को चेतावनी जारी करनी पड़ी। वैसे लखनऊ में समाजवादी पार्टी पर यह इल्जाम भी लगता आया है कि वह बीजेपी के खिलाफ गंभीरता से चुनाव नहीं लड़ती। देखें एनबीटी की खबर-


राजनीति के हर तीन-तिकड़म से परे वंदना जी हर किसी की सहज सहायता-सेवा के लिए तत्पर रहती हैं। लखनऊ नगर निगम के मेयर की कुर्सी के लिए उनसे बेहतर और उपयुक्त दीगर कोई प्रत्याशी नहीं। वह खालिस पत्रकार हैं। उनके दर पर हर किसी का स्वागत रहता है या कह लीजिए वह सबको एक नजर से देखती हैं। सांध्य टाइम्स रहा हो चाहे दैनिक जागरण, उन्होंने कभी किसी का प्रेसनोट डस्टबिन के हवाले नहीं किया। सो हमारी गारंटी कि बतौर मेयर वह हर प्रार्थनापत्र पर भी गौर करेंगी और कड़क एक्शन लेंगी। जिताइये भाई वंदना जी को, महसूस होगा कि आप खुद मेयर बन गए हैं। -राजू मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार

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