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आजतक के पत्रकार ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी को नंगा कर दिया, छात्रों के प्रायोजित प्रोटेस्ट का हुआ पर्दाफ़ाश!

मोहम्मद अनस-

अगर आप अपने बच्चे या बच्ची का एडमिशन गलगोटिया यूनिवर्सिटी में कराने जा रहे हैं तो रूक जाइए। बेहतर है उसे घर बैठे रहने दें। यहां की फीस औसतन दो लाख प्रति वर्ष है। रहने और खाने का खर्च अलग से। इन स्टूडेंट्स को कल राहुल गाँधी के विरोध के लिए भेजा गया था। गोदी मीडिया ने बताया कि अलग अलग कॉलेज के बच्चे हैं, जबकि सच ये है कि गलगोटिया, नोएडा के बच्चे थे। इन्हें एक बस में भर कर लाया गया था। भला हो आज तक के पत्रकार आशुतोष मिश्रा का जिन्होंने गलगोटिया के प्रायोजित प्रोटेस्ट पर खड़े होकर मूत दिया।

सौमित्र रॉय-

बात कड़वी, लेकिन सच है। सिर्फ गलगोटिया ही क्यों, भारत की तकरीबन हर यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स का देश की राजनीति और मुद्दों को लेकर यही स्टेटस है। आपकी जेब से लाखों रुपए की फीस काटकर अपना 70% वक्त मौज–मस्ती पर लुटाने वाले इन युवाओं के सपने सिर्फ खुद तक आकर सिमट गए हैं। इनके सपनों को आप उनके मोबाइल और वॉट्सएप में झांककर देख सकते हैं।

ये भेड़ें राजनीतिक इशारे पर वोट देती है। जो बेईमान, निरंकुश, तानाशाह सत्ता इनके सामने खड़ी है, वे इसी व्यवस्था में इसलिए खुश हैं, क्योंकि देश का यही सिस्टम उन्हें आवारागर्दी और कानून तोड़ने की आजादी देता है।

गलगोटिया का फीस मेनू

राहुल गांधी या मुद्दों पर बात करने वाला कोई और इनका आदर्श नहीं हो सकता। क्योंकि इनके आदर्श लोफर, लफंगे, झूठे, मक्कार गुंडे–मवाली हैं, जिन्होंने ठगी, लूट, भ्रष्टाचार से दौलत कमाई है। इनकी अपनी कोई राजनीतिक विचारधारा नहीं है, क्योंकि इनसे पुरानी पीढ़ी ने खुद को मुद्दों से डिस्कनेक्ट किया हुआ है।

यह देश में सिविल वॉर की फसल है, जिसमें ऊर्जा और ताकत है। इनके पीछे एक सड़ा हुआ, बदबूदार समाज खड़ा है, जो खुद सौदेबाजी कर विकास की दो पायदान चढ़ा है। यानी, भेड़ बन चुके इन नौजवानों के पीछे उम्रदराज भेड़ों की लंबी कतार है, जिनके पास डिग्रीनुमा कागज़ी पुर्जे हैं। ये भटक चुकी पीढ़ी किसे वोट डालेगी? बीजेपी को।

मध्यप्रदेश में चोरी–चकारी, दलाली, गुंडागर्दी, रेप, मर्डर सब झेल लिए जाते हैं, क्योंकि शिवराज सिंह चौहान ने 17 साल में शिक्षा को धंधेबाजों के हाथों बेच दिया। वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन और विरासत कर जैसी तख्तियां लिए ये युवा कांग्रेस का घोषणा पत्र नहीं पढ़ते। क्योंकि, विस्तार से गहराई में पढ़ना इनके बाप–दादा भी छोड़ चुके हैं।

जो कुछ मेडलवीर चेहरे अपने बाप, मां के साथ सामने आते हैं, वे लाखों की नौकरी पाकर उसी असमान विकास में समायोजित हो जाते हैं, जिसकी बात ये लौंडे कर रहे हैं। इसीलिए मैं 100% मार्क्स या मेरिट को भी एंडोर्स नहीं करता। मेरे लिए अच्छा इंसान होने से ज्यादा दूसरा कोई मेरिट नहीं। ये सिस्टम के साथ चलकर रोबोट की तरह 18 घंटे काम तो कर सकते हैं, लेकिन देश के लिए अच्छे नागरिक, बेहतर इंसान नहीं बन सकते।

इनसे आप भगत सिंह, अशफाक या आजाद बनने की उम्मीद न करें। आज के मां–बाप इन बंजर फसलों को देखें, जो उनकी ही उपज है। फिर खुद को भी आईने में देखें। पता चलेगा कि वे खुद बंजर हो चुके हैं। फिर मेरी महंगी थाली वाली आज की पोस्ट पढ़ें। वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन समझ आ जायेगा। अंत में प्रभु राम का नाम लें। मंगल सूत्र को पकड़ें और सो जाएं। क्या पता, कल हो न हो।

मनीष दुबे-

ग्रेटर नोएडा के परी चौक स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी का एक वीडियो वायरल है. वीडियो में आज तक के पत्रकार आशुतोष मिश्रा भाजपा के समर्थन में कांग्रेस के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे कुछ छात्रों से बातचीत कर रहे हैं. स्टूडेंट्स से प्रोटेस्ट का कारण पूछा जा रहा है. यह वीडियो जितना कमाल का है उतनी ही कमाल छात्रों की बातचीत और जवाब हैं.

मतलब जवाब ही नहीं है कि आखिर वे यह प्रोटेस्ट कर क्यों रहे हैं. 6 मिनट से ज्यादा अंतराल के इस वीडियो में पत्रकार का माइक और कैमरा देख कई छात्र भागते दिख रहे हैं. इसी भागमभाग से पता चलता है कि हमारी नई पीढ़ी एक अंधी खाई में ढकेली जा रही है.

नेता तो चाहते हैं देश की पूरी जमात अनपढ़ रहे और उसे आँख मूंदकर वोट करती जाए. लेकिन उससे बड़ा सवाल गलगोटिया जैसी महंगी यूनिवर्सिटी पर उठता है. आकिर ऐसी क्या मजबूरी है जो पैरेंट्स से लाखों रुपये चूसने वाली यूनिवर्सिटी को अपने छात्रों को इस तरह के फर्जी, गलत मंसूबे वाले प्रोटेस्ट की इजाजत देनी पड़ी.

फ़ायक अतीक किदवई-

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के लिए बहुत बड़ी बदनामी है, पहले तो पॉलिटिक्स के चक्कर में दुनिया भर में राइट विंगर कहलायेंगे, दूसरा इन मूर्ख बच्चों की वजह से ‘गलगोटिया” का हर पढ़ा लिखा लड़का मज़ाक का पात्र बनता रहेगा।

ऐसे समझिए “फुकरे” मूवी में जब ‘भोली पंजाबन’ लाली से कहती है तू बिल्ले हलवाई का लड़का है?? तो लाली कहता है आप जानती हो डैडी जी को….उसके बाद जो ग़ज़ब की सर्केस्टिक हँसी से भोली पंजाबन कहती है हाँ अच्छे से..वहाँ खड़े सभी लोग ऐसे हँसते की पूछे मत।

बस लाली की तरह जैसे ही बताओगे गलगोटिया के हैं आप जानते हैं मेरी यूनिवर्सिटी को, ऐसा ही माहौल बनेगा। यकीन करो चम्पको तुम लोगो ने एक जाहिल के चक्कर में सबका मज़ाक बना डाला है जिसकी भरपाई दशकों नही होगी। देखें यह प्रायोजित प्रोटेस्ट का वीडियो…

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